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MP High Court :‘जिस देश में न्यूक्लियर पॉवर प्लान्ट और अंडरग्राउंड सी मेट्रो बन सकता है, वहां टिकाऊ सड़कें क्यों नहीं बन सकतीं’

मध्यप्रदेश की खराब सड़कों और गड्ढों से बढ़ते सड़क हादसों को लेकर दायर जनहित याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वर्ष 2023 में गड्ढों से जुड़े 5,840 सड़क हादसों में 2,161 लोगों की मौत हुई, जो 2022 की तुलना में 31.4% अधिक है।
‘जिस देश में न्यूक्लियर पॉवर प्लान्ट और अंडरग्राउंड सी मेट्रो बन सकता है, वहां टिकाऊ सड़कें क्यों नहीं बन सकतीं’
फाइल फोटो

जबलपुर। प्रदेश की सड़कों पर मौत के गड्ढों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने काफी चौंकाने वाले दावे किए। उनका कहना है कि प्रदेश की सड़कों पर वर्ष 2023 में हुए 5840 हादसों में 2161 मौतें हुई हैं। ये आंकड़े वर्ष 2022 के मुकाबले 31.4 फीसदी ज्यादा हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस देश में न्यूक्लियर पॉवर प्लान्ट और मुम्बई में समुद्र के नीचे मेट्रो रूट बन सकता है, उस देश में टिकाऊ सड़कें क्यों नहीं बन सकतीं।

पुणे में 50 साल पहले बनी सड़क आज भी जस की तस

पुणे की एक सड़क का हवाला देकर यह भी कहा गया कि वहां पर 50 साल पहले बनी सड़क आज भी जस की तस है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मामले को संजीदगी से लेते हुए केन्द्र व राज्य सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश दिए। मामले पर अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।  

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इंदौर के ट्रेन मैनेजर ने लगाई याचिका

यह जनहित याचिका इंदौर के कल्याण संपत गार्डन में रहने वाले रिटायर्ड ट्रेन मैनेजर राजेन्द्र सिंह की ओर से दायर की गई है।  याचिका में राज्य की सड़क व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया गया कि प्रशासनिक लापरवाही और रखरखाव की कमी ने सड़कों को मौत के गड्ढों में बदल दिया है। याचिका के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की वर्ष 2023 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मध्यप्रदेश, देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। विशेष रूप से गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं में चिंताजनक इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 में गड्ढों से जुड़े हादसों में 31.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन दुर्घटनाओं में 5,840 हादसे और 2,161 मौतें हुईं, जो सड़क सुरक्षा व्यवस्था की भयावह स्थिति को दर्शाती हैं।

पांच अगस्त तक जवाब पेश करने के निर्देश 

इस मामले पर हाईकोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को नोटिस जारी कर अनावेदकों से जवाब मांगा था। मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अभिनव मल्होत्रा ने दलीलें रखीं। मामले पर जवाब पेश करने केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से समय मांगा गया। याचिकाकर्ता की ओर से किए गए दावों पर बेंच ने अनावेदकों को 5 अगस्त तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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