PU Special :एमपी में यात्री बसों की फिटनेस क्रॉस चेक करेगा परिवहन विभाग, इमरजेंसी गेट की जगह सीटें मिलीं तो एजेंसी होगी ब्लैकलिस्ट

प्रदेश की सड़कों पर दौड़ रही यात्री बसों में फिटनेस सर्टिफिकेट के बाद भी मॉडिफिकेशन मिला तो अब बस संचालक के साथ फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने वाली एजेंसी भी कार्रवाई के दायरे में आएगी। इमरजेंसी गेट की जगह सीट लगाने, अनिवार्य दो दरवाजों में से एक ही रखने या अन्य सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ मिलने पर संबंधित फिटनेस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
एमपी में यात्री बसों की फिटनेस क्रॉस चेक करेगा परिवहन विभाग, इमरजेंसी गेट की जगह सीटें मिलीं तो एजेंसी होगी ब्लैकलिस्ट
एमपी में यात्री बसों की फिटनेस क्रॉस चेक करेगा परिवहन विभाग

विजय एस गौर, भोपाल। परिवहन विभाग यात्री बसों की फिटनेस को क्रॉस चेक करने के लिए अगले माह से औचक जांच अभियान चलाएगा। प्रदेश में करीब 11 हजार यात्री बसें संचालित हैं, जिनमें सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की शिकायतें और जांच में सामने आने वाली गड़बड़ियां चुनौती बनी हुई हैं। अब मौके पर बस की जांच के साथ उसके फिटनेस सर्टिफिकेट का भी क्रॉस चेक किया जाएगा। फिटनेस के बाद बस में बदलाव मिला तो संचालक पर कार्रवाई के साथ यह भी देखा जाएगा कि संबंधित एजेंसी ने किस आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया था।

फिटनेस के बाद मॉडिफिकेशन मिला तो एजेंसी पर भी कार्रवाई

परिवहन विभाग या यातायात पुलिस की औचक जांच में कई बार फिटनेस के समय सही पाई गई बस में बाद में बदलाव मिलने की स्थिति बनती है। इमरजेंसी निकासी के लिए निर्धारित जगह पर सीट लगाना या दो दरवाजों में से एक को हटाकर वहां सीट लगाना इसी तरह की गड़बड़ी है। हादसे या आग लगने की स्थिति में ऐसी व्यवस्था यात्रियों की सुरक्षित निकासी में बाधा बन सकती है। अब ऐसे मामलों में बस संचालक के साथ फिटनेस जारी करने वाली एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी।

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अगले माह से औचक जांच अभियान

यात्री बसों की फिटनेस को क्रॉस चेक करने के लिए परिवहन विभाग अगले माह से औचक जांच अभियान शुरू करेगा। बस में फिटनेस सर्टिफिकेट सही मिलने के बावजूद मॉडिफिकेशन पाया गया तो संबंधित बस संचालक पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही यह भी जांच होगी कि फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करते समय बस की स्थिति क्या थी और एजेंसी ने किस आधार पर प्रमाणपत्र जारी किया था। फिटनेस प्रमाणपत्र सामान्यतः एक वर्ष के लिए वैध होता है।

ऐसे बनती है बसों की बॉडी

बस के इंजन और चेसिस के अनुरूप बॉडी बनाने से पहले बॉडी बिल्डर यह प्रमाणित करता है कि निर्धारित मानकों के अनुसार बॉडी बनाई जा सकती है। बॉडी तैयार होने के बाद अधिकृत फिटनेस सेंटर से प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। इसके बाद ही बस का संचालन किया जा सकता है। विभाग का मानना है कि फिटनेस के बाद बस में किसी तरह का बदलाव सुरक्षा मानकों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है, इसलिए अब इसकी भी जांच की जाएगी।

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प्रदेश में 22 फिटनेस सेंटर संचालित

प्रदेश में अभी 22 फिटनेस सेंटर पहले से संचालित हैं, जबकि 15 नए सेंटर की परमिशन जारी की जा चुकी है। इसके अलावा 50 और फिटनेस सेंटर शुरू करने के आवेदन लंबित हैं। परिवहन विभाग के सामने करीब 11 हजार यात्री बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की निगरानी बड़ी चुनौती है। औचक जांच के दौरान सामने आने वाली गड़बड़ियों को देखते हुए फिटनेस व्यवस्था को क्रॉस चेक करने की तैयारी की जा रही है।

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फिटनेस सही, बस मॉडिफाइड मिली तो होगी जांच

बसों की जांच में फिटनेस सर्टिफिकेट सही मिलता है, लेकिन बस मॉडिफाइड पाई जाती है। ऐसे मामलों में अब सिर्फ बस संचालक पर कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने वाली एजेंसी की भी जांच की जाएगी। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित फिटनेस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने कहा कि फिटनेस सर्टिफिकेट सही होने के बाद भी बस में बदलाव मिला तो एजेंसी की भूमिका की जांच जरूरी होगी। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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