PU Special :AI से खेतों की निगरानी, बीमारी और कीट प्रकोप का पहले चलेगा पता; MP-पंजाब में होगी स्मार्ट खेती की नई पहल

AI और भू-स्थानिक तकनीक से MP और पंजाब में धान-मक्का की फसलों की निगरानी होगी। सैटेलाइट, ड्रोन और डेटा की मदद से बीमारी व कीट प्रकोप की शुरुआती पहचान की जाएगी।
AI से खेतों की निगरानी, बीमारी और कीट प्रकोप का पहले चलेगा पता; MP-पंजाब में होगी स्मार्ट खेती की नई पहल
AI से खेतों की निगरानी

हर्षित चौरसिया, जबलपुर। खरीफ सीजन में बारिश, बादल और खेतों में जलभराव के कारण फसलों की लगातार निगरानी करना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और भू-स्थानिक तकनीक इस मुश्किल को आसान करने की दिशा में काम करेगी। पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, अभिकल्प एवं विनिर्माण संस्थान (टि्रपलआईटीडीएम), जबलपुर ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जो खेतों में फसल की स्थिति पर नजर रखने के साथ बीमारी और कीट प्रकोप के शुरुआती संकेतों की पहचान में मदद करेगी।

एआई रखेगा फसलों पर नजर

परियोजना में टि्रपलआईटीडीएम जबलपुर से प्रो. प्रीति खन्ना ने बताया कि आिर्टफिशियल इंटेंलिजेंस एनेवल्ड खरीफ सीजन क्राॅपलेंड मैिपंग एडं पेनोटाइप मॉिनटरिंग यूिसंग मल्टीमॉडल टेम्परोल डेटा परियोजना के तहत मध्य प्रदेश और पंजाब में खरीफ मौसम की धान और मक्का की फसलों की निगरानी की जाएगी। इसके लिए सैटेलाइट इमेज, ड्रोन और कृषि विशेषज्ञों से मिलने वाले डेटा को एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा। एआई इस डेटा का विश्लेषण कर फसल में दिखाई देने वाले तनाव, बीमारी या कीट के शुरुआती संकेतों को पहचानने का प्रयास करेगा।

मोबाइल पर देख सकेंगे खेत की स्थिति

परियोजना के तहत मोबाइल-अनुकूल वेबजीआईएस विकसित किया जाएगा। इसमें किसानों और संबंधित एजेंसियों को खेतों व फसलों से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने का प्रयास होगा। किसी खेत में बीमारी या कीट प्रकोप के शुरुआती संकेत मिलने पर समय रहते जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है। इससे फसल नुकसान कम करने और उत्पादन बेहतर करने की संभावना बढ़ेगी।

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बादल छाए तो भी नहीं रुकेगी निगरानी

परियोजना की खासियत यह है कि खराब मौसम या बादलों के कारण सैटेलाइट से तस्वीरें स्पष्ट नहीं मिलने की स्थिति में भी अन्य स्रोतों के डेटा का उपयोग कर फसल की निगरानी जारी रखने का प्रयास किया जाएगा। इससे खेतों की स्थिति की समय पर जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।

परियोजना में शािमल हैं ये एजेंसिया

परियोजना में टि्रपलआईटीडीएम जबलपुर से प्रो. प्रीति खन्ना, प्रो. तनुजा शेओरी और प्रो. अपराजिता ओझा, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर से प्रो. सौमित्र बिकास दास तथा भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान, देहरादून से डॉ. अनिल कुमार सहित उद्योग और उपयोगकर्ता एजेंसियां शामिल हैं।

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एमपी, पंजाब के शहरों में होगा अध्ययन

यह अध्ययन मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा व सिवनी तथा पंजाब के कपूरथला व लुधियाना में किया जाएगा। किसानों के लिए जागरुकता कार्यक्रम और अधिकारियों-शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि तकनीक को प्रयोगशाला से खेत तक पहुंचाया जा सके।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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