MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आपराधिक केस लंबित होने पर पासपोर्ट रिन्यूअल नहीं रोका जा सकता

जबलपुर। आपराधिक मामलों की आड़ में पासपोर्ट रिन्यूअल रोकने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने या उसके जमानत पर होने मात्र के आधार पर पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने निचली अदालत का आदेश निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने का निर्देश दिया है।
विदेश जाने के लिए लेनी होगी अनुमति
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर याचिकाकर्ता को विदेश यात्रा करनी है, तो उसे पहले संबंधित ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह फैसला दमोह के व्यापारी तरनदीप सिंह होरा की याचिका पर सुनाया गया। उनके खिलाफ पन्ना जिले के पवई थाने में आपराधिक मामला दर्ज है। हाईकोर्ट ने 5 अगस्त 2025 को उन्हें जमानत दी थी। पासपोर्ट की अवधि खत्म होने वाली होने के कारण उन्होंने पासपोर्ट कार्यालय में रिन्यूअल के लिए आवेदन किया। पासपोर्ट कार्यालय ने उन्हें निर्देश दिया कि चूंकि वह आपराधिक मामले में आरोपी हैं, इसलिए सक्षम अदालत से NOC लेकर आएं। इसके बाद निचली अदालत ने 2 सितंबर 2026 को NOC जारी करने से इनकार कर दिया। इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट में रखी गई दलील
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शुभम ठाकुर ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत का आदेश निरस्त करते हुए NOC जारी करने का निर्देश दिया।




















