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यूक्रेन से MBBS करने वाले डॉक्टर समेत 2 मेडिकल छात्रों की याचिका खारिज, MP हाईकोर्ट ने लगाया ₹20 हजार जुर्माना

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खंडवा मेडिकल कॉलेज के दो PG मेडिकल छात्रों की याचिका खारिज कर दी। थीसिस गाइड को लेकर दायर याचिका पर दोनों डॉक्टरों पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
यूक्रेन से MBBS करने वाले डॉक्टर समेत 2 मेडिकल छात्रों की याचिका खारिज, MP हाईकोर्ट ने लगाया ₹20 हजार जुर्माना

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खंडवा मेडिकल कॉलेज के दो PG मेडिकल छात्रों की याचिका खारिज करते हुए दोनों पर कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इनमें एक डॉक्टर ने यूक्रेन की लुगांस्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से MBBS किया था। छात्रों ने अपने थीसिस गाइड के स्थानांतरण के बाद नया गाइड नियुक्त करने और थीसिस जमा करने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित गाइड को स्थानांतरण के बाद भी छात्रों का मार्गदर्शन जारी रखने की अनुमति मिली हुई थी और उन्होंने कभी गाइड के रूप में काम करने से इनकार नहीं किया था। यह मामला नंदकुमार सिंह चौहान शासकीय मेडिकल कॉलेज, खंडवा में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के दो PG छात्रों से जुड़ा है। डिवीजन बेंच ने याचिका को गलतफहमी पर आधारित मानते हुए इसे खारिज कर दिया। कोर्ट के निर्देश के अनुसार दोनों डॉक्टरों को 10-10 हजार रुपये मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर में चार सप्ताह के भीतर जमा करने होंगे।

2 डॉक्टरों ने मांगा था नया थीसिस गाइड

याचिकाकर्ताओं में दुर्ग, छत्तीसगढ़ निवासी डॉ. अमित बोरकर और चित्रकूट, सतना निवासी डॉ. राम सचिव गुप्ता शामिल हैं। डॉ. अमित बोरकर ने वर्ष 2013 में यूक्रेन की लुगांस्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से MBBS की डिग्री हासिल की थी। वहीं डॉ. राम सचिव गुप्ता ने वर्ष 2016 में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से MBBS पूरा किया। दोनों ने वर्ष 2023 में NEET-PG परीक्षा पास करने के बाद खंडवा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया। डॉ. बोरकर ने 11 दिसंबर 2023 और डॉ. गुप्ता ने 4 नवंबर 2023 को माइक्रोबायोलॉजी विभाग में PG छात्र के तौर पर ज्वाइन किया था। इसके बाद 11 दिसंबर 2023 को माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शिक्षक डॉ. सौरभ जैन को दोनों छात्रों का थीसिस गाइड नियुक्त किया गया।

गाइड ने खंडवा मेडिकल कॉलेज से दिया था इस्तीफा

मामले में बताया गया कि डॉ. सौरभ जैन ने 27 मई 2024 को खंडवा मेडिकल कॉलेज से इस्तीफा दे दिया और मंदसौर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज में सेवाएं शुरू कर दीं। इसके बाद दोनों छात्रों ने 13 अप्रैल 2026 को संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर नया थीसिस गाइड नियुक्त करने की मांग की। उनका कहना था कि पुराने गाइड के खंडवा में उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें अपने शोध कार्य और थीसिस जमा करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों ने इसी आधार पर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नया गाइड नियुक्त करने और थीसिस जमा करने की अंतिम तारीख आगे बढ़ाने की मांग की थी।

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हाईकोर्ट ने कहा- गाइड ने काम करने से कभी इनकार नहीं किया

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि डॉ. सौरभ जैन के मंदसौर स्थानांतरण के बावजूद उन्हें छात्रों का थीसिस गाइड बने रहने की अनुमति मिली हुई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो कि डॉ. जैन ने स्थानांतरण के बाद छात्रों का मार्गदर्शन करने से इनकार किया था। बेंच के अनुसार, छात्रों ने अपना शोध कार्य पूरा करने के बाद भी थीसिस जमा नहीं की थी। ऐसे में नया गाइड नियुक्त किए जाने की मांग को अदालत ने उचित आधार वाला नहीं माना।

गलतफहमी पर आधारित थी याचिका, दोनों पर जुर्माना

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने बिना पर्याप्त आधार के अदालत का रुख किया और यह स्थिति इस धारणा पर बनी कि गाइड की अनुपस्थिति के कारण उनका शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। अदालत ने याचिका को पूरी तरह गलतफहमी पर आधारित माना और दोनों याचिकाकर्ताओं पर कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। दोनों डॉक्टरों को 10-10 हजार रुपये मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर में चार सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है।

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कुलपति और रजिस्ट्रार को भी जारी हुए थे वारंट

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के कुलपति और रजिस्ट्रार की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए भी आदेश जारी किए थे। कोर्ट के आदेश के मुताबिक 19 सितंबर 2026 को दोनों अधिकारियों के खिलाफ 10-10 हजार रुपये के जमानती वारंट जारी किए गए थे। बाद की सुनवाई में मामले से जुड़े रिकॉर्ड और परिस्थितियों की समीक्षा की गई।

अदालत में कई पक्षों के वकील हुए पेश

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता पीयूष जैन, केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु, मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी की ओर से अधिवक्ता प्रफुल्ल शर्मा और नंदकुमार सिंह चौहान शासकीय मेडिकल कॉलेज की ओर से अधिवक्ता राहुल रावत अदालत में उपस्थित हुए। मामले में हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर याचिका का निस्तारण किया।

थीसिस गाइड को लेकर उठे विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला

यह मामला मूल रूप से PG छात्रों के थीसिस गाइड के स्थानांतरण के बाद नई नियुक्ति की मांग से जुड़ा था। छात्रों का तर्क था कि गाइड के खंडवा से चले जाने के बाद उनकी थीसिस का काम प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, अदालत के सामने यह तथ्य आया कि संबंधित शिक्षक को स्थानांतरण के बाद भी छात्रों का गाइड बने रहने की अनुमति दी गई थी। इसी बिंदु को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने छात्रों की याचिका को आधारहीन माना और दोनों पर जुर्माना लगाया। अब दोनों डॉक्टरों को निर्धारित अवधि में जुर्माने की राशि जमा करनी होगी।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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