पीपुल्स समाचार गरबा-डांडिया के मंच से मानवता की मिसाल, SMA टाइप-2 बीमारी से जूझ रही ग्वालियर की बेटी नीलाक्षी की मदद को उठे हाथ

ग्वालियर: गरबा-डांडिया का त्योहार खुशियां बांटने का मौका होता है, लेकिन जब इन खुशियों के बीच किसी जरूरतमंद की मदद का संकल्प जुड़ जाए, तो यह आयोजन और भी खास बन जाता है। ग्वालियर में पीपुल्स समाचार और श्रीजी जलसा इवेंट की ओर से आयोजित गरबा-डांडिया 2026 में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। यहां गंभीर बीमारी से जूझ रही ग्वालियर की बिटिया नीलाक्षी के इलाज के लिए लोगों ने मदद के हाथ बढ़ाए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अतिथियों ने आर्थिक सहायता देने का भरोसा दिलाया।
नीलाक्षी के इलाज के लिए आगे आए जनप्रतिनिधि
नीलाक्षी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 नाम की दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से जूझ रही है। उसका परिवार सामान्य आर्थिक स्थिति से आता है और इलाज का खर्च उठाना उसके लिए बड़ी चुनौती है। नीलाक्षी के इलाज में करीब 15 करोड़ रुपये तक का खर्च बताया जा रहा है, उनकी परेशानी की जानकारी मिलने के बाद पीपुल्स अपडेट ग्वालियर की टीम ने उसकी मदद के लिए पहल की और परिवार को सहयोग का आश्वासन दिया। गरबा-डांडिया कार्यक्रम में शामिल विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने नीलाक्षी के इलाज के लिए 1 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की। वहीं, सभापति मनोज तोमर 51 हजार रुपये की सहायता देने की बात कही और अन्य लोगों ने भी 11-11 हजार रुपये की मदद देने का भरोसा दिलाया। इस पहल का उद्देश्य नीलाक्षी के इलाज के लिए आर्थिक सहयोग जुटाना और अधिक से अधिक लोगों को इस मुहिम से जोड़ना है।
क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 बीमारी?
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी यानी SMA एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जो शरीर की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करती है। यह बीमारी आमतौर पर SMN1 जीन में बदलाव के कारण होती है, जिससे शरीर में मांसपेशियों के सही कामकाज के लिए जरूरी SMN प्रोटीन की कमी हो जाती है। SMA टाइप-2 में बच्चों को बैठने में मदद मिल सकती है, लेकिन बिना सहारे खड़े होने या चलने में कठिनाई हो सकती है। समय के साथ मांसपेशियों की कमजोरी बढ़ सकती है और कुछ मरीजों को सांस लेने या निगलने में भी परेशानी होती है। इसकी गंभीरता हर बच्चे में अलग हो सकती है। यह बीमारी छूने या साथ रहने से नहीं फैलती, बल्कि आनुवंशिक कारणों से होती है। इसका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किया जाता है। कुछ आधुनिक उपचार बीमारी की प्रगति को धीमा करने और मांसपेशियों की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इलाज का विकल्प मरीज की उम्र, स्थिति और चिकित्सा संबंधी जांच पर निर्भर करता है।
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नीलाक्षी की मदद के लिए लोगों से अपील
पीपुल्स समाचार और पीपुल्स अपडेट ग्वालियर की टीम ने नीलाक्षी के इलाज में सहयोग के लिए लोगों से आगे आने की अपील की है। इस पहल का संदेश साफ है कि किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चे और उसके परिवार को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। गरबा-डांडिया जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए जरूरतमंदों की मदद के लिए जागरूकता फैलाना समाज में सहयोग और संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है। अब उम्मीद है कि नीलाक्षी के इलाज के लिए और लोग आगे आएंगे, ताकि परिवार को इस कठिन समय में आर्थिक सहारा मिल सके।




















