सीहोर के पंकज सुबीर को ख़ैबर दर्रा के लिए प्रतिष्ठित केएलएफ बुक ऑफ द ईयर अवार्ड, MP के खाते में पहली बार आया सम्मान

सीहोर। यह उपलब्धि केवल सीहोर नगर के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे मध्यप्रदेश के साहित्यिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, क्योंकि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इस मंच से यह गौरव पहली बार प्रदेश की धरा पर उतरा है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुई साहित्यिक उपलब्धि
कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल (केएलएफ) भारतीय एवं वैश्विक साहित्य के विमर्श का एक अत्यंत प्रतिष्ठित और मानक मंच माना जाता है। चयन समिति द्वारा देश भर की विभिन्न भाषाओं और विधाओं की कृतियों के गहन मूल्यांकन के पश्चात पंकज सुबीर की इस कृति का चयन किया गया। यह सम्मान इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि अब तक केएलएफ बुक ऑफ द ईयर की यह गरिमामयी उपाधि मध्यप्रदेश के किसी भी साहित्यकार के खाते में दर्ज नहीं हो सकी थी। आगामी दिसंबर माह में देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले भव्य एवं गरिमामय राष्ट्रीय समारोह में देश-विदेश के शीर्षस्थ विद्वानों, साहित्यकारों और विचारकों की उपस्थिति में उन्हें इस सम्मान से अलंकृत किया जाएगा।
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मानवीय संवेदना और इतिहास के अंतर्संबंधों का अद्वितीय शिल्प
पंकज सुबीर का कहानी संग्रह 'ख़ैबर दर्रा' अपने प्रकाशन के क्षण से ही साहित्य जगत में गंभीर विमर्श का केंद्र बना हुआ है। इस संग्रह की कहानियाँ केवल जीवन के यथार्थ का सपाट चित्रण नहीं करतीं, बल्कि वे मानवीय अनुभूतियों, सामाजिक विडंबनाओं और जटिल अंतर्विरोधों की परतें उधेड़ती हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को समकालीन जीवन की व्यथा-कथा से जिस कौशल के साथ उन्होंने जोड़ा है, वह हिंदी कथा-साहित्य में विरल है। चयन समिति ने भी कृति के शिल्पगत वैशिष्ट्य, विषय-वैविध्य और कथ्य की दार्शनिक गहराई को रेखांकित करते हुए इसे इस वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कथाकृति के रूप में स्वीकार किया।
पंकज सुबीर की सुदृढ़ कथा-परंपरा
पंकज सुबीर हिंदी साहित्य में उन चुनिंदा रचनाकारों में गिने जाते हैं जिनकी दृष्टि जीवन की सूक्ष्म से सूक्ष्म धड़कन को पकड़ने में सक्षम है। उनका लेखन बौद्धिक दुरूहता से मुक्त होकर पाठक के मर्म को छूता है। सहज, मुहावरेदार और मारक भाषा शैली के माध्यम से वे समय और समाज के सवालों से सीधे मुखातिब होते हैं। 'ख़ैबर दर्रा' से पूर्व भी उनकी कृतियों ने राष्ट्रीय फलक पर पाठकों और समीक्षकों का ध्यान खींचा है, किंतु इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मान ने उनकी सृजन यात्रा को एक नए शिखर पर प्रतिष्ठित कर दिया है।
सीहोर से लेकर समूचे प्रदेश में गौरव और उल्लास की लहर
इस प्रतिष्ठित घोषणा के पश्चात सीहोर सहित समूचे प्रदेश के साहित्यिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक परिवेश में हर्ष और उल्लास का वातावरण व्याप्त है। स्थानीय साहित्यकारों, पत्रकारों, संस्कृतिकर्मियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने इसे मालवा-निमाड़ और मध्य भारत की समृद्ध साहित्यिक विरासत की जीत बताया है। प्रबुद्धजनों का मत है कि यह ऐतिहासिक सम्मान न केवल सीहोर की साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय क्षितिज पर विस्तार देगा, बल्कि आने वाली युवा पीढ़ी के नए कलमकारों के भीतर मौलिक, गंभीर और जनपक्षधर लेखन के प्रति गहरा आत्मविश्वास और नई प्रेरणा भी संप्रेषित करेगा।




















