मध्यप्रदेश के 12 जिलों में सूखे से निपटने के लिए 20.90 करोड़ रुपए का बजट, जल प्रबंधन पर होगा काम

सूखे की स्थिति से निपटने के लिए 20.90 करोड़ रुपए के बजट से जल प्रबंधन संबंधी कार्य किए जाएंगे। कम वर्षा वाले जिलों में 85 प्रतिशत से अधिक बोवनी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने जल उपभोक्ता समितियों को भी किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने में भूमिका निभाने के निर्देश दिए। बैठक में बांधों, जलाशयों, नदियों के जलप्रवाह, भूजल स्तर और मिट्टी में नमी की स्थिति की समीक्षा की गई।
सूखे से निपटने के लिए 20.90 करोड़ रुपए का बजट
मध्यप्रदेश में कम वर्षा के कारण सूखे की स्थिति का सामना कर रहे 12 जिलों में जल प्रबंधन के उपायों पर काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को अधिकारियों की बैठक लेकर सूखे से निपटने के लिए 20.90 करोड़ रुपए के बजट से जल प्रबंधन संबंधी कार्य करने के निर्देश दिए।
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इंदौर-उज्जैन सहित 12 जिले कम वर्षा से प्रभावित
कम वर्षा वाले जिलों में आलीराजपुर, धार, झाबुआ, रतलाम, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, हरदा और शाजापुर शामिल हैं। इन जिलों में कम वर्षा के बावजूद 85 प्रतिशत से अधिक बोवनी हो चुकी है, जिसे देखते हुए जल प्रबंधन के उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
अधिक पानी वाली फसलों की बोवनी कम करने की सलाह
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कम वर्षा वाले जिलों में गेहूं सहित अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों की बोवनी कम करने के लिए किसानों को सलाह दी जाए। उन्होंने कहा कि कम वर्षा की स्थिति से निपटने के लिए जल उपभोक्ता समितियां भी किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने में भूमिका निभाएं।
बांधों, जलाशयों और भूजल स्तर की समीक्षा
अधिकारियों की बैठक में प्रदेश के प्रमुख बांधों और जलाशयों में जलभराव की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही कम वर्षा वाले जिलों में जलस्रोतों की स्थिति, नदियों के जलप्रवाह, भूजल स्तर और मिट्टी में नमी की स्थिति पर भी चर्चा की गई, ताकि सूखे से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।




















