PU Special :साकेत नगर के गरबा में संस्कारों की पाठशाला, 4 से 60 साल तक के 850 प्रतिभागी ले रहे हिस्सा

साकेत नगर का गरबा सिर्फ भव्यता ही नहीं, बल्कि पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान भी बन चुका है। यहां गरबा के साथ जेन जी और जेन अल्फा के बच्चों को तर्क के साथ संस्कार दिए जा रहे हैं, जिसमें 4 साल से 60 साल तक के कुल 850 प्रतिभागी शामिल हैं।
साकेत नगर के गरबा में संस्कारों की पाठशाला, 4 से 60 साल तक के 850 प्रतिभागी ले रहे हिस्सा
साकेत नगर के गरबा में संस्कारों की पाठशाला

अखिल सोनी, इंदौर। आयोजन की तैयारी दो महीने पहले शुरू हो जाती है और प्रतिभागियों को 21 दिन तक प्रैक्टिस कराई जाती है। 4 से 12 साल के बच्चों को 8 से 10 श्लोक कंठस्थ करवाए गए हैं और राम, कृष्ण, हनुमान जी की कहानियां सुनाई गई हैं। बच्चों को तीन दिन तक मोबाइल और टीवी से दूर रहने का टास्क भी दिया गया है, जिसके पूरा होने पर उन्हें गिफ्ट देने की बात कही गई। इस पहल के जरिए बच्चों को धार्मिक प्रसंगों के साथ मोबाइल से दूरी बनाने की सीख भी दी जा रही है।

गरबा के साथ बच्चों को दिए जा रहे संस्कार

साकेत नगर का गरबा सिर्फ भव्य आयोजन नहीं, बल्कि पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। यहां गरबा के साथ जेन जी ही नहीं, जेन अल्फा के बच्चों को भी तर्क के साथ संस्कार दिए जा रहे हैं। आयोजन में 4 साल से 60 साल तक के कुल 850 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

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आरांक्षा बच्चों को सिखा रहीं श्लोक और धार्मिक कथाएं

साकेत नगर गरबा के आयोजक नीरज याज्ञनिक की बेटी आरांक्षा याज्ञनिक खुद बच्चों के साथ रम जाती हैं और उन्हें संस्कृत के श्लोक सिखाती हैं। आरांक्षा बताती हैं कि पिछले साल बच्चों को दो श्लोक सिखाए थे, जबकि इस बार हर भगवान की कहानी बताई गई है। गणपति जी से शुरुआत करते हुए बच्चों को ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का अर्थ समझाया गया और दुर्गा मां के नौ रूपों का विश्लेषण किया गया।

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राम, कृष्ण और हनुमान जी के प्रसंगों से सीख

आरांक्षा ने बताया कि राम जी के लिए ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ 11 बार बुलवाया जाता है और ‘सर्वमांगल्ये मांगल्ये’ सिखाया जाता है। श्रीकृष्ण के लिए ‘श्री कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने’ के साथ गीता सार बताया गया, जबकि हनुमान जी के लिए ‘पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप’ सिखाया गया। गरबा प्रैक्टिस के दौरान बच्चों को राम, कृष्ण और हनुमान जी की कहानियों के साथ अभिमन्यु के चक्रव्यूह जैसे प्रसंग भी सुनाए गए।

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तर्क के साथ संस्कार देने और मोबाइल से दूरी की पहल

आरांक्षा ने कहा कि उनका बेटा भी सात साल का है और जेन अल्फा पीढ़ी से है, जो हर बात के पीछे लॉजिक मांगती है। इसलिए बच्चों को हर बात तर्क के आधार पर समझाई जा रही है और गरबा के बाद हर दिन 15 से 20 मिनट का सेशन होता है। उन्होंने बताया कि पहले अपने बेटे को मोबाइल से दूर किया, फिर बच्चों को तीन दिन तक मोबाइल और टीवी से दूरी रखने का टास्क दिया, जिसे बच्चों ने ईमानदारी से फॉलो किया और अब वे ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने पर अपने माता-पिता को भी टोकने लगे हैं।

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पांच साल की अनायरा ने सीखे 10 श्लोक

पांच साल की अनायरा दवे भी गरबा सीखने जाती हैं और उन्होंने 10 श्लोक सीखे हैं। वह सुबह नहाकर भगवान के सामने इन श्लोकों को दोहराती हैं। अनायरा की मां आरुषि दवे ने बताया कि बच्चे राम, कृष्ण और हनुमान जी के प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हैं। उन्होंने कहा कि आज बच्चे मोबाइल और टीवी की लत में हैं, लेकिन यहां उन्हें इनसे दूरी बनाना सिखाया जा रहा है और बच्चे अपने माता-पिता को भी टोकते हैं, जो अच्छी सीख है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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