एमपी में बिजली संकट के बीच सरकार का पावर मैनेजमेंट, प्रदेश को 17,500 मेगावाट बिजली की जरूरत; उपलब्धता करीब 13,500 मेगावाट

भोपाल। भाजपा सरकार के कार्यकाल में पहली बार पैदा हुए इस बड़े बिजली संकट से निपटने के लिए दूसरे राज्यों से बिजली खरीदने के साथ बंद और कम क्षमता पर चल रही परियोजनाओं से उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि नवंबर तक बिजली की स्थिति सामान्य होने लगेगी। फिलहाल उत्तर प्रदेश, गुजरात और पंजाब से बिजली आपूर्ति के लिए किए गए पावर परचेज मैनेजमेंट का सहारा लिया जा रहा है। इन राज्यों को बिजली उपलब्ध कराने से जुड़ी व्यवस्थाओं में अक्टूबर-नवंबर के दौरान बदलाव होने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश में मांग के अनुरूप बिजली उपलब्ध कराना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।
बिरसिंहपुर और सरदार सरोवर से राहत
बिजली संकट के बीच बिरसिंहपुर थर्मल पावर परियोजना में ट्यूब फटने से उत्पादन बंद हो गया था। वहीं सरदार सरोवर परियोजना में जलस्तर कम होने के कारण बिजली उत्पादन घटाकर करीब 300 मेगावाट तक सीमित करना पड़ा था। अब दोनों परियोजनाओं से उत्पादन बहाल होने और बढ़ने से करीब 800 मेगावाट बिजली बनाना शुरू कर दिया है, अगले हफ्ते से 200 मेगावॉट और बनाना शुरू कर देगा।
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मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने गुजरात के मुख्य सचिव से चर्चा की
सरदार सरोवर परियोजना को पूरी क्षमता से चलाने के लिए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने गुजरात के मुख्य सचिव एसके दास से चर्चा की। इसमें बरगी और ओंकारेश्वर से पानी छोड़कर सरदार सरोवर में जलस्तर बनाए रखने की योजना पर बात हुई। इसके बाद गुरुवार से गुजरात सरकार ने परियोजना को पूरी (1000) क्षमता से चलाना शुरू कर दिया है। इससे मध्यप्रदेश को बिजली संकट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। नवम्बर के बाद से बिजली संकट से प्रदेश उबर जाएगा।
त्योहारों में शाम को कटौती नहीं
मुख्यमंत्री ने बिजली संकट की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि नवरात्र के दौरान बड़े शहरों में शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक बिजली कटौती नहीं की जाए। छोटे शहरों में भी कटौती की अवधि अधिक नहीं होनी चाहिए। किसानों को सिंचाई के लिए दिन में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। सरकार की प्राथमिकता त्योहारों के दौरान शहरी उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने और खेती के लिए आपूर्ति बनाए रखने की है।
कम बारिश वाले जिलों में जल पंचायतें
कैबिनेट में ऊर्जा विभाग ने बिजली संकट और उसके प्रबंधन को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें मालवा और ग्वालियर-भोपाल क्षेत्र में तापमान बढ़ने तथा पानी की कमी के कारण बिजली की मांग पर दबाव की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जल पंचायतें आयोजित करने की सलाह दी। कम बारिश वाले जिलों में लोगों को जल उपलब्धता की स्थिति बताने और कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक करने को कहा गया। गेहूं जैसी अधिक पानी लेने वाली फसलों की बुवाई पर भी परिस्थितियों के अनुसार किसानों को सलाह देने पर जोर दिया गया है, क्योंकि बांधों में कम पानी रहने से सिंचाई प्रभावित हो सकती है।




















