दो देवियां, पाताल की कहानी और रहस्यमयी सुरंग! आखिर क्या है देवास की माता टेकरी का सच?

मध्य प्रदेश में एक ऐसी पहाड़ी है, जहां दो देवियों के विराजमान होने की मान्यता है। लेकिन इस पहाड़ी से जुड़ी कहानी सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है। कहा जाता है कि दो देवियों के बीच ऐसा मनमुटाव हुआ कि एक देवी पाताल की ओर जाने लगीं, तो दूसरी पहाड़ी से नीचे उतरने लगीं! फिर हनुमान जी और भैरव बाबा ने ऐसा क्या किया कि दोनों देवियां इसी पहाड़ी पर विराजमान हो गईं? और सबसे बड़ा सवाल- क्या इस पहाड़ी से उज्जैन की भर्तृहरि गुफा तक कोई गुप्त सुरंग जाती है? आइए जानते हैं मध्य प्रदेश के देवास की प्रसिद्ध माता टेकरी से जुड़ी इन रहस्यमयी लोककथाओं की कहानी।
देवास की माता टेकरी आखिर क्यों है इतनी खास?
मध्य प्रदेश के देवास जिले में स्थित माता टेकरी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के प्रसिद्ध मंदिर हैं। दोनों मंदिरों में दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं। खासकर नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। माता के जयकारों, घंटियों की गूंज और पूजा-अर्चना के बीच पूरी पहाड़ी भक्तिमय नजर आती है। लेकिन माता टेकरी को खास बनाने वाली बात सिर्फ यहां स्थित मंदिर नहीं हैं। इस स्थान से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और स्थानीय लोककथाएं भी लोगों के बीच लंबे समय से प्रचलित हैं। इन्हीं में एक कहानी मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा को लेकर सुनाई जाती है, जो सुनने वालों के मन में कई सवाल खड़े कर देती है।
दो देवियां, एक पहाड़ी और पाताल तक जाने की कहानी
स्थानीय लोकमान्यता के अनुसार, मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा को बहनें माना जाता है। दोनों देवियों से जुड़ी एक प्रचलित कथा के मुताबिक, किसी बात को लेकर उनके बीच मनमुटाव हो गया था। इसके बाद दोनों ने अलग-अलग दिशाओं में जाने का फैसला कर लिया। कहानी में बताया जाता है कि बड़ी माता तुलजा भवानी पाताल की ओर जाने लगीं, जबकि छोटी माता चामुंडा पहाड़ी से नीचे उतरने लगीं। कहा जाता है कि जब दोनों देवियां जाने लगीं, तब हनुमान जी और भैरव बाबा ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दोनों को शांत कराया और मान्यता के अनुसार, इसके बाद दोनों देवियां इसी पहाड़ी पर विराजमान हो गईं। आज भी यह कथा माता टेकरी से जुड़ी स्थानीय धार्मिक मान्यताओं में सुनाई जाती है।
माता टेकरी से उज्जैन तक गुप्त सुरंग?
लेकिन माता टेकरी की कहानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। इस पहाड़ी को लेकर एक और चर्चा लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती है। स्थानीय कथाओं में देवास की माता टेकरी और उज्जैन की भर्तृहरि गुफा के बीच एक गुप्त सुरंग होने का जिक्र मिलता है। कुछ लोककथाएं इस रास्ते को राजा भर्तृहरि से भी जोड़ती हैं। यही वजह है कि जब माता टेकरी के रहस्य की बात होती है, तो इस सुरंग का जिक्र भी सामने आता है। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल है- क्या वास्तव में माता टेकरी से उज्जैन तक कोई सुरंग मौजूद है? क्या यह किसी प्राचीन रास्ते की कहानी है, या समय के साथ प्रचलित हुई एक लोकमान्यता?
नवरात्रि में माता टेकरी पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
माता टेकरी का महत्व यहां की रहस्यमयी कहानियों से कहीं अधिक है। यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र है। नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के दर्शन करने पहुंचते हैं। माता के दरबार में भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और आशीर्वाद मांगते हैं। मंदिर परिसर में गूंजते जयकारे और पूजा-अर्चना का वातावरण इस जगह की धार्मिक महत्ता को दर्शाता है।



















