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ईरान पर 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' गिराने की तैयारी में अमेरिका, ट्रंप के प्लान से दुनिया में हलचल, जानिए कितना खतरनाक

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर नए सैन्य हमलों के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स (MOAB) के इस्तेमाल की संभावना तलाश रहा है। जानिए इस शक्तिशाली बम की क्षमता, ईरान के परमाणु ठिकानों पर इसका संभावित असर और ट्रंप पर बढ़ता राजनीतिक दबाव।
ईरान पर 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' गिराने की तैयारी में अमेरिका, ट्रंप के प्लान से दुनिया में हलचल, जानिए कितना खतरनाक
ट्रंप का ईरान के खिलाफ महाबम प्लान! क्या परमाणु ठिकानों को तबाह कर पाएगा MOAB?

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां दुनिया की नजरें वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ ऐसा हथियार इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं, जिसका नाम ही उसकी विनाशकारी ताकत की कहानी बयां करता है? रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ईरान के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े गैर-परमाणु बमों में शामिल मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स (MOAB) के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।

क्या है अमेरिका का MOAB प्लान?

इस योजना से परिचित अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पेंटागन ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए MOAB के इस्तेमाल समेत कई सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इस बम को गिराने का अंतिम फैसला हो चुका है। फिलहाल इसे संभावित सैन्य विकल्पों में से एक माना जा रहा है। MOAB का पूरा नाम मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट है। इसे आम तौर पर 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' कहा जाता है। यह एक बेहद शक्तिशाली पारंपरिक बम है, जिसे बड़े इलाके में भारी तबाही मचाने के लिए तैयार किया गया है। इसकी खासियत बड़े क्षेत्र में विस्फोट का प्रभाव पैदा करना है। लेकिन इसकी ताकत के बावजूद यह हर तरह के सैन्य लक्ष्य को नष्ट करने के लिए उपयुक्त नहीं है।

क्या ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह कर सकता है MOAB?

अमेरिका के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या MOAB ईरान की जमीन के काफी नीचे बनी संदिग्ध परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचा पाएगा? रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में इस बम की क्षमता सीमित हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि MOAB बड़े क्षेत्र में तबाही मचाने में सक्षम है, लेकिन यह जमीन के भीतर बहुत गहराई तक पहुंचकर लक्ष्य को नष्ट करने वाला हथियार नहीं है। ऐसे में अगर ईरान की परमाणु सुविधाएं पहाड़ों या जमीन के काफी नीचे बनाई गई हैं, तो इस बम से उन्हें पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल हो सकता है। योजना की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने भी इसके सीमित इस्तेमाल की ओर इशारा किया। उसके मुताबिक, यह बड़े इलाके को साफ करने वाला हथियार है, लेकिन गहराई में मौजूद ठिकानों को नष्ट करने के लिए इसे खास तौर पर तैयार नहीं किया गया है। इसलिए MOAB के इस्तेमाल की चर्चा के बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निर्णायक नुकसान पहुंचाया जा सकेगा।

पहले कभी ईरान के खिलाफ नहीं हुआ इस्तेमाल

MOAB को ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने की चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि इस संघर्ष में अब तक इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है। यदि अमेरिका इस विकल्प को चुनता है, तो यह युद्ध में तनाव बढ़ाने वाला बड़ा कदम साबित हो सकता है। अमेरिका और इजरायल अपने सैन्य अभियान का बचाव करते हुए दावा करते रहे हैं कि उनका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। दूसरी ओर, ईरान लगातार परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करने के आरोपों से इनकार करता रहा है। ऐसे में किसी बेहद शक्तिशाली बम के इस्तेमाल की संभावना क्षेत्रीय सुरक्षा और युद्ध के भविष्य को लेकर नई चिंताएं पैदा कर सकती है।

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क्या युद्ध से निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं ट्रंप?

रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई है। अमेरिकी सैन्य अधिकारी ऐसे विकल्पों पर भी चर्चा कर रहे हैं, जिनके जरिए ट्रंप अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सकें, भले ही युद्ध शुरू करते समय तय किए गए सभी लक्ष्य हासिल न हों। पेंटागन की योजना से परिचित एक सूत्र ने कुछ प्रस्तावित विकल्पों को ऐसी आतिशबाजी बताया, जिसका मकसद सैन्य शक्ति का बड़ा प्रदर्शन करना हो सकता है। इन विकल्पों से ट्रंप को युद्ध से पीछे हटने का राजनीतिक रास्ता मिल सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन वास्तव में ऐसा फैसला लेने की तैयारी कर रहा है या नहीं। फिलहाल ये विकल्प चर्चा के स्तर पर बताए जा रहे हैं।

ट्रंप पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष खत्म करने के लिए कूटनीतिक प्रयास फिलहाल ठप पड़े हैं। दूसरी ओर, अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप पर घरेलू राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक, युद्ध और इसके कारण ईंधन समेत दूसरी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों का असर ट्रंप की लोकप्रियता पर पड़ रहा है। इससे उनकी रिपब्लिकन पार्टी के सामने भी राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। ऐसे हालात में ट्रंप के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ ईरान के खिलाफ अपने सैन्य उद्देश्यों को लेकर सख्त रुख दिखाना है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध की आर्थिक और राजनीतिक कीमत को भी ध्यान में रखना है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका वास्तव में MOAB का इस्तेमाल करेगा, या इस शक्तिशाली बम की चर्चा ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है? फिलहाल किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इतना साफ है कि इस विकल्प पर चर्चा भी अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर दुनिया की चिंता बढ़ाने के लिए काफी है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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