PU Special :MP में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बनेगी नई नीति, हर स्कूल-कॉलेज में होंगे काउंसलर

अशोक गौतम, भोपाल। नई नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक तनाव, डिप्रेशन और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें आवश्यक परामर्श और सहयोग उपलब्ध कराना है। नीति का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग को सौंपी गई है। विधानसभा समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार हो रही इस नीति में स्कूल से लेकर राज्य स्तर तक निगरानी तंत्र का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का प्रयास है कि गंभीर स्थिति बनने से पहले ही विद्यार्थियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
हर शिक्षण संस्थान में बनेगा मानसिक स्वास्थ्य सेल
सूत्रों के अनुसार, नीति का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग को सौंपी गई है। नीति लागू होने के बाद हाईस्कूल, हायर सेकंडरी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के मानसिक स्वास्थ्य का प्रारंभिक आकलन किया जाएगा। इसके लिए सभी शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सेल गठित किए जाएंगे। इनमें प्रशिक्षित काउंसलरों के साथ वरिष्ठ विद्यार्थियों को भी वालंटियर के रूप में जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को समय पर परामर्श और सहयोग उपलब्ध कराना है।
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तीन-स्तरीय निगरानी व्यवस्था पर रहेगा फोकस
नई नीति में तीन-स्तरीय निगरानी तंत्र का प्रस्ताव रखा गया है। प्रवेश के बाद प्रत्येक छात्र-छात्रा के मानसिक स्वास्थ्य का आकलन किया जाएगा। विद्यार्थियों के व्यवहार, संवाद, हाव-भाव, पढ़ाई के प्रति रुचि और अन्य मनोवैज्ञानिक संकेतों का अध्ययन किया जाएगा। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेल कार्य करेंगे। जिला स्तर पर मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सकों की विशेषज्ञ समिति और राज्य स्तर पर समन्वय समिति पूरी व्यवस्था की निगरानी करेगी।
तनाव के कारणों की होगी पहचान और समाधान
अगर किसी विद्यार्थी के तनाव का कारण पढ़ाई, परीक्षा, प्रतिस्पर्धा या नया शैक्षणिक वातावरण होगा, तो संस्थान उसे अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता और परामर्श उपलब्ध कराएगा। वहीं अगर तनाव के पीछे पारिवारिक या सामाजिक कारण होंगे, तो काउंसलर अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें स्थिति से अवगत कराएंगे। इसके बाद समाधान के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। नीति का उद्देश्य केवल समस्या पहचानना नहीं, बल्कि उसका समय पर समाधान भी सुनिश्चित करना है।
विधानसभा समिति की रिपोर्ट बनी आधार
प्रदेश में विद्यार्थियों की आत्महत्या के मामलों और उनके सामाजिक कारणों के अध्ययन के लिए विधानसभा ने वर्ष 2016 में तत्कालीन विधायक अर्चना चिटनीस की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। समिति में कांग्रेस और भाजपा के विधायकों के अलावा तत्कालीन गृह मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री पदेन सदस्य थे। लगभग एक वर्ष के अध्ययन के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट में आत्महत्या के 55 प्रमुख कारणों की पहचान की थी। इनमें अकेलापन, नशे की लत, खुद को अयोग्य समझना, निराशा, बेबसी, पूर्ण रूप से पराजित होने की भावना और नए वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित न कर पाना प्रमुख कारण बताए गए थे।
70 से अधिक सुझावों पर तैयार हो रही नई नीति
समिति ने अपनी 68 पृष्ठों की रिपोर्ट विधानसभा को सौंपी थी। रिपोर्ट में आत्महत्या के कारणों के साथ उन्हें दूर करने के उपाय भी सुझाए गए थे। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए 70 से अधिक सुझाव दिए गए थे। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को संस्थागत स्तर पर सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से नई नीति लागू करने की तैयारी कर रही है। तत्कालीन समिति अध्यक्ष और विधायक अर्चना चिटनीस ने भी उम्मीद जताई है कि सरकार रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएगी।












