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PU Special :केंद्र सरकार ने निजी बाइक से कमाई का रास्ता खोला, लेकिन MP में 9 साल पुराने नियम के कारण असमंजस

केंद्र सरकार ने व्यक्तिगत बाइक को भी लोगों की आय का जरिया बनाने की व्यवस्था दे दी  है लेकिन मप्र में 2017 के एग्रीगेटर नियम लागू होने से आम व्यक्ति अपने निजी दोपहिया वाहन को बाइक टैक्सी की सेवाओं में इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने निजी बाइक से कमाई का रास्ता खोला, लेकिन MP में 9 साल पुराने नियम के कारण असमंजस
फाइल फोटो

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। केंद्र सरकार ने ऐप आधारित कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन-2025 पिछले साल 1 जुलाई को जारी की थी। इसका सबसे बड़ा बदलाव यह है कि राज्य सरकार अनुमति दे तो नॉन-ट्रांसपोर्ट यानी निजी मोटरसाइकिल को भी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म से जोड़कर यात्री सेवा में लगाया जा सकता है। लेकिन एक साल बाद भी मध्यप्रदेश ने इस नई व्यवस्था के लिए अलग नियम या स्पष्ट प्रक्रिया जारी नहीं की है। प्रदेश में फिलहाल 2017 के एग्रीगेटर नियम लागू हैं, जिनमें मोटरसाइकिल एग्रीगेटर की व्यवस्था तो है, लेकिन निजी बाइक को नई केंद्रीय व्यवस्था के तहत किस तरह जोड़ा जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है।

40 से 50 लाख लोगों को मिल सकता है रोजगार

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 25 सितंबर को भोपाल में इसी तरह की व्यवस्था के रोजगार संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यदि मध्यप्रदेश इसे लागू करता है तो 40 से 50 लाख बेरोजगार लोगों को रोजगार मिल सकता है। गडकरी के मुताबिक देश में निजी वाहनों को टैक्सी के रूप में इस्तेमाल करने की व्यवस्था से रोजगार के बड़े अवसर बने हैं। 

केंद्र की गाइडलाइन : निजी बाइक वाला कैसे कमाएगा?

नई केंद्रीय व्यवस्था में निजी मोटरसाइकिल को सीधे सड़क पर टैक्सी की तरह चलाने की छूट नहीं है। राज्य सरकार को इसकी अनुमति देनी होगी। इसके बाद राज्य द्वारा तय शुल्क और शर्तों के तहत वाहन को एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा सकेगा। यानी सामान्य युवक अपनी बाइक ऐप पर पंजीकृत कराकर यात्री उठा सकेगा, लेकिन इसके लिए राज्य की अनुमति और निर्धारित सुरक्षा, बीमा तथा वाहन संबंधी शर्तें पूरी करना जरूरी होगा। केंद्र की गाइडलाइन में एग्रीगेटर के लिए ड्राइवर की जांच, मेडिकल और मनोवैज्ञानिक जांच, प्रशिक्षण, यात्री बीमा, वाहन की निगरानी, शिकायत व्यवस्था और ऐप आधारित सुरक्षा जैसे प्रावधान हैं। ड्राइवर की अपनी गाड़ी होने पर उसे कम से कम 80 प्रतिशत किराया देने का प्रावधान है।

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MP की 2017 व्यवस्था : बाइक एग्रीगेटर की अनुमति पहले से 

मध्यप्रदेश के 2017 नियम पूरे प्रदेश में लागू हैं। इनमें मोटरसाइकिल को एग्रीगेटर सेवा में शामिल किया गया है। मोटरसाइकिल के लिए अलग लाइसेंस, हर शहर के लिए अलग आवेदन और कम से कम 25 वाहन रखने की शर्त है। लाइसेंस की अवधि दो साल और मोटरसाइकिल एग्रीगेटर के लिए लाइसेंस फीस 15 हजार रुपए है। साथ ही एक लाख रुपए की परफॉर्मेंस गारंटी का प्रावधान है। इन नियमों में एग्रीगेटर को यह सुनिश्चित करना होता है कि प्लेटफॉर्म पर शामिल वाहन का वैध पंजीयन, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और वैध परमिट हो तथा चालक के पास संबंधित श्रेणी का वैध लाइसेंस हो। किराया राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जाना है।

दोनों में बड़ा अंतर क्या?

2017 MP नियम मुख्य रूप से लाइसेंसधारी एग्रीगेटर और वैध परमिट वाले वाहनों की व्यवस्था करते हैं। 2025 केंद्रीय गाइडलाइन राज्य को इससे आगे जाकर निजी यानी नॉन-ट्रांसपोर्ट बाइक को भी अनुमति देने का विकल्प देती है। यही वह बदलाव है, जिससे अपनी बाइक रखने वाला युवक एग्रीगेटर के जरिए कमाई का नया रास्ता पा सकता है।

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नए प्रावधानों को लेकर प्रस्ताव प्रक्रिया में हैं

“मध्यप्रदेश में एग्रीगेटर से जुड़े 2017 के नियम लागू हैं और नए प्रावधानों को लेकर प्रस्ताव प्रक्रिया में है। वर्तमान में तीन एग्रीगेटरों के पास वैध लाइसेंस हैं, जिनमें दो मोटरसाइकिल एग्रीगेटर हैं। निजी बाइक के लिए अभी अलग अनुमति, फीस या अथॉराइजेशन जारी नहीं किया गया है। लाइसेंस के अनुसार ओला, उबर और रैपिडो के पास बाइक और कार की अनुमति है।”

 उमेश जोगा, आयुक्त परिवहन, मध्यप्रदेश

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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