वॉशिंगटन। ऊनी मैमथ (Woolly Mammoth) हजारों साल पहले ही धरती से खत्म हो चुके थे। लेकिन अब एक बायोटेक कंपनी उनके कुछ खास गुणों को जिंदा हाथियों में वापस लाने पर काम कर रही है। कोलोसल बायोसाइंसेज (Colossal Biosciences) नाम की कंपनी विलुप्त प्रजाति के चुनिंदा जेनेटिक लक्षणों को डालकर ठंड में जी सकने वाले, मैमथ जैसे हाथी को तैयार कर रही है। 'आइस एज' के जानवर को आज की दुनिया में वापस लाने के आइडिया ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। हालांकि कंपनी का कहना है कि उनका मकसद मैमथ की हूबहू कॉपी बनाना नहीं है।
वैज्ञानिक मैमथ को वापस क्यों लाना चाहते हैं?
ऊनी मैमथ कभी उत्तरी गोलार्ध के बर्फीले इलाकों में घूमते थे। उनके घने बाल, शरीर की गर्मी बनाए रखने वाली चर्बी और दूसरी खासियतों ने उन्हें बेहद ठंड में भी जिंदा रहने लायक बनाया था। कोलोसल का प्रोजेक्ट इन्हीं खूबियों को एशियाई हाथी में डालने का है, क्योंकि यही मैमथ का सबसे करीबी जिंदा रिश्तेदार है। कंपनी इस काम को सिर्फ प्रयोग नहीं मानती, बल्कि इसे संरक्षण और इकोलॉजी से भी जोड़ रही है। उनका मानना है कि ऐसे जानवरों की वापसी से बिगड़े हुए इकोसिस्टम को फिर से ठीक करने में मदद मिल सकती है।
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AI इस आइस एज जीव को वापस लाने में कैसे मदद करेगा?
इस पूरी प्रोसेस में AI और एडवांस कंप्यूटेशनल टूल्स की बड़ी भूमिका है। ये टूल्स रिसर्चर्स को जेनेटिक डेटा को एनालाइज करने और DNA में उन खास बदलावों को पकड़ने में मदद करते हैं, जिनकी वजह से मैमथ में ठंड में जीने की ताकत आई थी। वैज्ञानिक हजारों साल पुराने सुरक्षित मैमथ अवशेषों से मिले जेनेटिक मटीरियल की तुलना आज के जिंदा हाथियों के DNA से करते हैं। इससे उन्हें पता चलता कि कौन से जेनेटिक अंतर ठंड को झेलने के लिए जरूरी हो सकते हैं। यहां AI सिर्फ एक हिस्सा है।
एडवांस जेनेटिक्स का होगा प्रयोग
चुने हुए गुणों वाले जीव को बनाने के लिए इसके साथ जीन एडिटिंग और एडवांस ब्रीडिंग तकनीकों की भी जरूरत पड़ेगी। क्या वैज्ञानिक असली ऊनी मैमथ बना पाएंगे? नहीं, जो जीव बनेगा वो 100% असली ऊनी मैमथ नहीं होगा। रिसर्चर्स का टारगेट मैमथ जैसी कुछ चुनिंदा खूबियों वाला हाथी तैयार करना है। यह फर्क समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि ओरिजिनल प्रजाति हजारों साल पहले खत्म हो चुकी है और उसके पूरे बायोलॉजिकल सिस्टम को हूबहू रीक्रिएट करना मुमकिन नहीं है। इस प्रोजेक्ट के सामने अभी भी कई बड़ी चुनौतियां हैं - जैसे भ्रूण का सही विकास, हाथियों में प्रजनन की जटिलता और जानवरों के कल्याण से जुड़े सवाल।
टाइमलाइन 2030 के दशक तक क्यों खिसक गई?
कोलोसल ने शुरू में कहा था कि वो 2028 तक मैमथ जैसा पहला बच्चा पैदा करने का टारगेट रख रही है। लेकिन अब नई रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि यह टाइमलाइन खिसक कर 2030 के दशक तक जा सकती है। इसकी वजह ये है कि एक जिंदा और हेल्दी जानवर बनाना सिर्फ जेनेटिक अंतर ढूंढने से कहीं ज्यादा मुश्किल काम है। रिसर्चर्स को जेनेटिक इंजीनियरिंग, भ्रूण के डेवलपमेंट और रिप्रोडक्शन से जुड़ी कई बड़ी बाधाओं को भी पार करना होगा।
क्या मैमथ जैसे जानवर सच में फिर से धरती पर घूमेंगे?
फिलहाल यह प्रोजेक्ट एक बहुत ही महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक कोशिश है, न कि विलुप्त प्रजाति की 100% वापसी की गारंटी। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो इससे ऊनी मैमथ की कुछ चुनिंदा खूबियों वाला हाथी पैदा हो सकता है।लेकिन ऐसा जीव असल में नेचुरल माहौल में सर्वाइव कर पाएगा या नहीं, और क्या वो इकोलॉजिकल रोल निभा पाएगा जैसा सोचा जा रहा है, इस पर अभी कुछ भी पक्के तौर पर कहना जल्दबाजी होगी।