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PU Special :खदानें बनीं पर्यटन की नई मंजिल, रोजगार के भी खुले रास्ते; MP में बंद खदानों को रिसॉर्ट और ईको-पार्क में बदलने की पहल

मध्यप्रदेश में बंद और अनुपयोगी खदानों को रिसॉर्ट, ईको-पार्क और पर्यटन स्थलों में बदलने की पहल हो रही है। छिंदवाड़ा, सिवनी, सिंगरौली और अनूपपुर में बदली तस्वीर।
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खदानें बनीं पर्यटन की नई मंजिल, रोजगार के भी खुले रास्ते; MP में बंद खदानों को रिसॉर्ट और ईको-पार्क में बदलने की पहल
खदानें बनीं पर्यटन की नई मंजिल, रोजगार के भी खुले रास्ते

अशोक गौतम, भोपाल। कभी सिर्फ खनिज निकालने और औद्योगिक गतिविधियों के लिए पहचानी जाने वाली खदानें अब मध्यप्रदेश में पर्यटन और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित होने लगी हैं। बंद या उपयोग में नहीं आ रही खदानों को रिसॉर्ट, ईको-पार्क और पर्यटन स्थलों में बदलने के लिए निजी और सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इससे खनन के बाद खाली पड़े क्षेत्रों का उपयोग तो हो ही रहा है, साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा, सिवनी, सिंगरौली और अनूपपुर में खदानों के बदलते स्वरूप की तस्वीर सामने आ रही है। कहीं निजी निवेश से पत्थर और ग्रेनाइट खदानों को पर्यटन से जोड़ा जा रहा है, तो कहीं सरकारी प्रयासों से बंद कोयला खदानों को हरित क्षेत्र और ईको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

छिंदवाड़ा में पत्थर की खदान बनी रिसॉर्ट

छिंदवाड़ा निवासी शानू अग्रवाल ने शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित एक पत्थर की खदान को रिसॉर्ट में तब्दील किया है। यहां करीब 50 कमरे हैं और पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है। इस रिसॉर्ट की खासियत इसका आसपास का पर्यटन क्षेत्र है। यहां से तामिया, पेंच, जामसांवली और देवगढ़ किले सहित कई पर्यटन और धार्मिक स्थल आसानी से पहुंच में हैं। यही वजह है कि यहां बाहर से आने वाले पर्यटकों के साथ शादी और दूसरे आयोजनों के लिए भी लोग पहुंचते हैं। शादी के सीजन में नागपुर, पुणे और मुंबई तक से लोग यहां विवाह समारोह आयोजित करने आते हैं। इस दौरान रिसॉर्ट के कमरों की मांग इतनी बढ़ जाती है कि कई बार कमरे मिलना भी मुश्किल हो जाता है।

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सिवनी में ग्रेनाइट खदान को होटल और ईको-टूरिज्म से जोड़ने की तैयारी

इसी तरह सिवनी निवासी रमेश सिंह जिले से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित एक ग्रेनाइट खदान को होटल और ईको-टूरिज्म क्षेत्र के रूप में विकसित कर रहे हैं। खनन गतिविधियां खत्म होने के बाद खाली पड़े इस क्षेत्र को पर्यटन से जोड़ने की यह पहल एक अलग मॉडल सामने रखती है। अगर ऐसे क्षेत्रों को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए तो वे लंबे समय तक पर्यटन गतिविधियों के साथ स्थानीय रोजगार का माध्यम बन सकते हैं।

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सिंगरौली में बंद कोयला खदान बनी ईको-पार्क

सरकारी स्तर पर भी बंद खदानों के उपयोग की दिशा में काम हो रहा है। सिंगरौली के जयंत क्षेत्र में एनसीएल ने करीब दो साल पहले बंद मुदवानी कोयला खदान को ईको-पार्क के रूप में विकसित किया। यहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ झरने, बड़ा डैम और मनोरंजन की सुविधाएं पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। खदान क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों ने भी अब होम स्टे शुरू किए हैं। इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को ठहरने की सुविधा मिल रही है और स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी आय का एक नया जरिया तैयार हुआ है। सिंगरौली की दूसरी खदानों में भी पौधरोपण के जरिए हरित क्षेत्र विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। भविष्य में इन क्षेत्रों को ईको-टूरिज्म गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

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अनूपपुर में 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हरियाली

अनूपपुर जिले में कोयला खनन क्षेत्रों और उनके आसपास बड़े स्तर पर हरित क्षेत्र विकसित किए गए हैं। करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हरियाली तैयार करने के प्रयास किए गए हैं। इसमें-

  • 29,592 हेक्टेयर कोयला-मुक्त भूमि का जैविक सुधार
  • 12,673 हेक्टेयर खदान लीज क्षेत्र में एवेन्यू प्लांटेशन और अन्य पौधरोपण
  • 7,735 हेक्टेयर लीज क्षेत्र के बाहर हरित गतिविधियां शामिल हैं।

इन प्रयासों से हर साल करीब 25 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर कार्बन सिंक क्षमता तैयार होने का अनुमान है। यानी खनन के बाद इन क्षेत्रों को सिर्फ खाली जमीन के रूप में छोड़ने के बजाय पर्यावरण और भविष्य के उपयोग को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।

अब बंद खदान लेने के लिए 90 साल की लीज का आवेदन

अनूपपुर में बंद कोयला खदान को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की निजी पहल भी सामने आई है। कोतमा के रिसॉर्ट कारोबारी प्रशांत मिश्रा ने बताया कि उन्होंने सरकार के पास अनूपपुर जिले की एक बंद कोयला खदान लेने के लिए आवेदन किया है। उनका प्रस्ताव इस खदान क्षेत्र में रिसॉर्ट और शादी गार्डन विकसित करने का है। इसके लिए उन्होंने जमीन को कम से कम 90 साल की लीज पर लेने के लिए आवेदन किया है। प्रशांत मिश्रा का कहना है कि सरकार के पास मैंने भी अनूपपुर जिले की एक कोयले की बंद खदान लेने के लिए आवेदन किया है। इसमें एक रिसॉर्ट और शादी गार्डन बनाने का मेरा प्रस्ताव है। इसे कम से कम 90 साल की लीज पर लेने के लिए आवेदन किया है।

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खनन के बाद बदली तस्वीर

मध्यप्रदेश में खदानों को पर्यटन और पर्यावरण से जोड़ने के ये प्रयास एक नई संभावना दिखाते हैं। खनन पूरा होने के बाद जिन क्षेत्रों को अक्सर अनुपयोगी या उजड़ा हुआ माना जाता है, उन्हें बेहतर योजना, निवेश और पर्यावरणीय सुधार के जरिए पर्यटन स्थल, ईको-पार्क, रिसॉर्ट और रोजगार केंद्र में बदला जा सकता है। छिंदवाड़ा और सिवनी में निजी निवेश के जरिए खदानों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश हो रही है, जबकि सिंगरौली और अनूपपुर में सरकारी प्रयासों से हरित क्षेत्र और ईको-टूरिज्म की संभावनाएं तैयार की जा रही हैं। अगर इन पहलों को पर्यावरणीय मानकों और स्थानीय जरूरतों के साथ आगे बढ़ाया जाता है, तो खनन के बाद खाली पड़े क्षेत्र पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार के स्थायी केंद्र बन सकते हैं।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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