PU Special :MP पुलिस की सेकंड DPC अटकी, करीब 12 हजार पुलिसकर्मियों के प्रमोशन पर फिर इंतजार

मध्यप्रदेश पुलिस की सितंबर में प्रस्तावित सेकंड DPC अटक गई है। ACR, सर्विस रिकॉर्ड और लंबित प्रकरणों की जानकारी पूरी नहीं मिलने से करीब 12 हजार पुलिसकर्मियों के प्रमोशन से जुड़े मामले प्रभावित होने की चर्चा है।
MP पुलिस की सेकंड DPC अटकी, करीब 12 हजार पुलिसकर्मियों के प्रमोशन पर फिर इंतजार
MP पुलिस की सेकंड DPC अटकी

विजय एस. गौर, भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस में पदोन्नति की दूसरी डीपीसी यानी डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी की प्रक्रिया फिलहाल अटक गई है। जिलों और बटालियनों से कर्मचारियों की ACR (गोपनीय चरित्रावली), अपडेटेड सर्विस रिकॉर्ड और आपराधिक, कोर्ट या विभागीय प्रकरणों से जुड़ी जानकारी पूरी तरह नहीं मिलने के कारण डीपीसी कमेटी के गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। सितंबर 2026 में प्रस्तावित सेकंड डीपीसी अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इस देरी का असर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की पदोन्नति पर पड़ने की बात सामने आ रही है। विभागीय स्तर पर करीब 12 हजार पुलिसकर्मियों के मामले प्रभावित होने की चर्चा है हालांकि इस संख्या की पुलिस विभाग ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

जुलाई से हुई DPC, कई कर्मचारी रह गए प्रमोशन से वंचित

मध्यप्रदेश पुलिस में जुलाई 2026 से अलग-अलग संवर्गों की डीपीसी आयोजित कर पदोन्नति सूचियां जारी की गई थीं। इस प्रक्रिया में कई ऐसे कर्मचारी पदोन्नति हासिल नहीं कर सके, जो पदोन्नति के लिए पात्र माने जा रहे थे। जानकारी के मुताबिक कुछ कर्मचारियों के ACR और अद्यतन सर्विस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। वहीं कुछ कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण, कोर्ट केस या विभागीय जांच लंबित थी। इन कारणों से उनके मामलों पर पहली डीपीसी में विचार नहीं किया गया। उस समय विभाग की ओर से कहा गया था कि जिन कर्मचारियों के मामले पात्रता पूरी करने के बावजूद किसी कारण से डीपीसी में नहीं आ सके, उनके प्रकरणों पर सितंबर में प्रस्तावित सेकंड डीपीसी में विचार किया जाएगा। इसके लिए संबंधित कर्मचारियों का सर्विस रिकॉर्ड पूरा होना और उनके खिलाफ विभागीय जांच या अन्य संबंधित प्रकरण लंबित नहीं होना जरूरी रखा गया था।

जिलों और बटालियनों से रिकॉर्ड नहीं आने से अटकी प्रक्रिया

दूसरी डीपीसी के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर पर कर्मचारियों से पदोन्नति संबंधी आवेदन और दावे लिए गए थे। इसके बाद संबंधित जिलों और बटालियनों से उनके रिकॉर्ड मंगाए गए ताकि पात्रता की जांच की जा सके। लेकिन अपेक्षित जानकारी पूरी तरह उपलब्ध नहीं होने के कारण मामलों का परीक्षण पूरा नहीं हो पाया। इसी वजह से डीपीसी कमेटी के गठन की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी। पुलिस मुख्यालय के सामने अब लंबित रिकॉर्ड जुटाने और प्रत्येक कर्मचारी के प्रकरण की स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है, ताकि सेकंड डीपीसी की प्रक्रिया दोबारा गति पकड़ सके।

पुलिस मुख्यालय में प्रशासनिक बदलाव भी हुए

दूसरी डीपीसी की प्रक्रिया के बीच पुलिस विभाग में कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव भी हुए। चंचल शेखर का तबादला संचालक, खेल एवं युवा कल्याण के पद पर किया गया। वहीं डी. श्रीनिवास वर्मा को एसएएफ का प्रभार दिया गया। इसके अलावा आईजी इरशाद बली का तबादला आईजी सागर जोन के पद पर होने के बाद एसएएफ में भी प्रशासनिक स्तर पर बदलाव हुआ। इन परिवर्तनों के बीच प्रमोशन से जुड़े मामलों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नए प्रशासनिक सेटअप के सामने भी रही है।

लंबे समय से सेवा कर रहे कर्मचारियों की उम्मीदें अटकीं

पुलिसकर्मियों के लिए पदोन्नति केवल पद बदलने का मामला नहीं है बल्कि इससे वेतन, पद, जिम्मेदारी और सेवा से जुड़े दूसरे लाभ भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में डीपीसी समय पर नहीं होने से लंबे समय से इंतजार कर रहे कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बन सकती है।

पूर्व DGP अरुण गुर्टू ने समय पर DPC की जरूरत बताई

पूर्व पुलिस महानिदेशक अरुण गुर्टू के मुताबिक वर्षों की नौकरी के बाद पदोन्नति की प्रक्रिया समय पर पूरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देरी होने से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है। उनका कहना है कि पदोन्नति नहीं मिलने से केवल पद बदलने में देरी नहीं होती बल्कि वेतन के साथ पद और जिम्मेदारी से जुड़े लाभ भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने प्रमोशन चैनल से जुड़े अधिकारियों को इस प्रक्रिया पर समय से ध्यान देने की जरूरत बताई।

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DPC कमेटी में शामिल होते हैं तीन वरिष्ठ अधिकारी

स्पेशल डीजी, एडमिन आदर्श कटियार ने बताया कि डीपीसी के लिए पुलिस महानिदेशक तीन अधिकारियों के नाम तय करते हैं और डीपीसी की समय-सीमा भी निर्धारित की जाती है। उन्होंने बताया कि कमेटी में किसी भी तीन वरिष्ठ अधिकारियों को नामित किया जा सकता है। सामान्य तौर पर विभाग प्रमुख के रूप में एडीजी, आईजी और एक एसपी को कमेटी में शामिल किए जाने की व्यवस्था रहती है।

ADG SAF बोले- लंबित मामलों की स्थिति देखी जा रही

एडीजी एसएएफ डी. श्रीनिवास वर्मा ने बताया कि जिन कर्मचारियों की डीपीसी पहले नहीं हो सकी थी और जिनके प्रकरणों पर उस समय विचार नहीं किया गया था, उनकी वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह देखा जा रहा है कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच (DE) या अन्य कोई मामला लंबित तो नहीं है। जिन मामलों में ऐसी कोई बाधा नहीं होगी, उन्हें सेकंड डीपीसी में शामिल करने की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने का प्रयास किया जाएगा।

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अब रिकॉर्ड पूरा होने और कमेटी गठन पर टिकी नजर

मध्यप्रदेश पुलिस में दूसरी डीपीसी का उद्देश्य पहली प्रक्रिया में छूटे या लंबित रह गए पात्र कर्मचारियों के मामलों पर दोबारा विचार करना है। लेकिन जिलों और बटालियनों से रिकॉर्ड पूरा नहीं आने के कारण यह प्रक्रिया तय समय पर आगे नहीं बढ़ पाई। अब पुलिस मुख्यालय को लंबित ACR, सर्विस रिकॉर्ड और प्रकरणों की जानकारी पूरी कराकर पात्र कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसके बाद डीपीसी कमेटी का गठन और आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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