PU Special :MP में 100 से ज्यादा विद्यार्थियों वाले संस्थानों में काउंसलर जरूरी, मनोबल केंद्र होगा अनिवार्य

हर्षित चौरसिया, जबलपुर। पढ़ाई का बढ़ता दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, असफलता का डर और उससे जुड़ी मानसिक चुनौतियों को देखते हुए मध्यप्रदेश में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर अब संस्थागत स्तर पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। यूनिफार्म मेंटल हेल्थ पॉलिसी 2026 के तहत स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और आवासीय कोचिंग संस्थानों में मनोबल केंद्र स्थापित करना अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सर्कुलर जारी कर जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, जिन संस्थानों में 100 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, वहां बाल एवं किशोर मनोविज्ञान में प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। काउंसलर को दूसरे शैक्षणिक या प्रशासनिक काम नहीं सौंपे जाएंगे, ताकि वह विद्यार्थियों की काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर ही पूरी तरह ध्यान दे सके।
तनाव और मानसिक चुनौतियों से निपटने में मिलेगी मदद
शैक्षणिक संस्थानों में मनोबल केंद्र बनाने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसा स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे पढ़ाई के दबाव, परीक्षा की चिंता, करियर को लेकर तनाव और व्यक्तिगत परेशानियों पर विशेषज्ञ से बातचीत कर सकें। अधिकारियों के मुताबिक कई बार विद्यार्थी अपनी परेशानी परिवार या शिक्षकों के सामने खुलकर नहीं रख पाते। ऐसे में संस्थान के भीतर प्रशिक्षित काउंसलर की उपलब्धता से शुरुआती स्तर पर मानसिक दबाव को समझने और समय पर मदद उपलब्ध कराने में सहूलियत हो सकती है। मनोबल केंद्र के जरिए जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों की काउंसलिंग, मार्गदर्शन और आगे की सहायता के लिए रेफरल की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
100 से ज्यादा विद्यार्थियों वाले संस्थानों पर विशेष फोकस
नई व्यवस्था में विद्यार्थी संख्या को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। 100 से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों में प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति जरूरी होगी। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि अधिक विद्यार्थी संख्या वाले स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और आवासीय कोचिंग संस्थानों में नियमित मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध रहे। काउंसलर के लिए बाल एवं किशोर मनोविज्ञान से जुड़ा प्रशिक्षण और संबंधित विशेषज्ञता पर जोर दिया गया है, ताकि विद्यार्थियों की उम्र और परिस्थितियों के अनुसार उनकी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
काउंसलर को दूसरे कामों में नहीं लगाया जाएगा
नई व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियुक्त काउंसलर को दूसरे प्रशासनिक या शैक्षणिक कामों में नहीं लगाया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि काउंसलर का मुख्य फोकस विद्यार्थियों की मानसिक सेहत और काउंसलिंग पर बना रहे। इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों की समस्याओं की पहचान, व्यक्तिगत बातचीत, आवश्यक मार्गदर्शन और गंभीर स्थिति में संबंधित विशेषज्ञ तक पहुंच बनाने पर ध्यान दिया जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
मनोबल केंद्रों के लिए प्रशिक्षित काउंसलरों की अनिवार्य नियुक्ति से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ने के साथ इस क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर तैयार हो सकते हैं। मनोविज्ञान, काउंसलिंग और बाल एवं किशोर मनोविज्ञान में प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग संस्थानों में अपनी विशेषज्ञता के अनुसार काम करने के अवसर मिल सकते हैं। यानी नीति का असर केवल विद्यार्थियों की मानसिक सेहत तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि काउंसलिंग और मनोविज्ञान के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार का एक नया आधार भी तैयार हो सकता है।
हॉस्टल और परिसर की सुरक्षा पर भी जोर
मनोबल केंद्रों के साथ विद्यार्थियों की भौतिक सुरक्षा को लेकर भी कई प्रावधान किए गए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, खासतौर पर हॉस्टल और छात्र परिसर में जोखिम वाले स्थानों की पहचान कर सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। हॉस्टल के कमरों में टैम्पर-प्रूफ सीलिंग फैन, छत और दूसरे जोखिम वाले स्थानों तक विद्यार्थियों की पहुंच सीमित करने तथा सामान्य क्षेत्रों में CCTV कैमरे लगाने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करना है, जहां मानसिक स्वास्थ्य के साथ उनकी शारीरिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा सके।
परीक्षा और प्रतियोगी तैयारी के दबाव पर भी फोकस
आज के समय में विद्यार्थी पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, करियर की चिंता और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के दबाव से गुजर रहे हैं। ऐसे में छोटी समस्याएं भी कई बार गंभीर मानसिक तनाव का रूप ले सकती हैं। मनोबल केंद्रों के जरिए विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, परीक्षा की चिंता, असफलता से निपटने, आत्मविश्वास और पढ़ाई से जुड़े दबाव जैसे विषयों पर काउंसलिंग उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे संस्थानों के स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य को केवल समस्या सामने आने के बाद संभालने के बजाय पहले से सहायता और जागरूकता का हिस्सा बनाने की कोशिश होगी।
समय पर काउंसलिंग से बढ़ेगी मदद
क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग प्रोफेसर डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने कहा कि विद्यार्थियों की मानसिक सेहत को अब शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने की जरूरत है। उनके मुताबिक उच्च शिक्षा विभाग से मनोबल केंद्र तैयार करने के लिए निर्देश प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि यूनिफार्म मेंटल हेल्थ पॉलिसी 2026 के तहत मनोबल केंद्र और प्रशिक्षित काउंसलर की व्यवस्था की जा रही है। इससे विद्यार्थियों को तनाव, चिंता और दूसरी मानसिक चुनौतियों से निपटने में समय पर मदद मिल सकेगी।




















