‘भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए'...! मैडिसन स्क्वायर गार्डन में गूंजा मोहन भागवत का संदेश, हिंदुत्व और मानवता पर कही ये बात

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की विविधता, एकता, धर्म और मानवता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान ही अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के साथ मिलकर रहने की रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत की सोच और उसकी सांस्कृतिक परंपरा को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत में विविधता और एकता दोनों साथ-साथ चलती हैं और यही भारत की खास पहचान है। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित इस कार्यक्रम में 5 हजार से ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। इसके अलावा करीब 30 देशों से लगभग 180 धार्मिक नेताओं ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
‘भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए’ सोच हिंदुत्व नहीं
कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने हिंदू धर्म और मानवता को लेकर अहम बात कही। उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। उन्होंने समझाया कि हिंदू विचारधारा का आधार सभी लोगों के सम्मान और अलग-अलग रास्तों को स्वीकार करने में है। उनके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति खुद को हिंदू मानता है तो उसे यह समझना चाहिए कि लोगों के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य एक ही हो सकता है। भागवत ने कहा कि किसी व्यक्ति का धर्म, पूजा करने का तरीका या जीवन जीने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन इससे उसकी इंसानियत कम नहीं होती।
'इंसानियत सबसे ऊपर, रास्ते भले अलग हों'
RSS प्रमुख ने कहा कि दुनिया में लोगों की पहचान अलग-अलग हो सकती है। किसी का पहनावा अलग है, किसी की भाषा अलग है और किसी की पूजा-पद्धति अलग है। इसके बावजूद सभी इंसानों के बीच एक प्राकृतिक जुड़ाव मौजूद है। उन्होंने कहा कि मानवता सभी धार्मिक पहचान से ऊपर है। अलग-अलग धर्म और परंपराएं इंसान को सत्य तक पहुंचने के अलग-अलग रास्ते दिखा सकती हैं। भागवत ने भारत की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को पहले खुद ‘विविधता में एकता’ के विचार को सही मायने में समझना और अपनाना होगा। इसके बाद भारत पूरी दुनिया को भी इस सोच का अनुभव करा सकता है।
'सही सोच इंसान को आगे ले जाती है'
मोहन भागवत ने इंसान की सोच और उसके व्यवहार पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मनुष्य के पास सोचने और समझने की क्षमता होती है और यही उसे दूसरे जीवों से अलग बनाती है। हालांकि, सिर्फ सोचने की क्षमता होना ही पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति किस दिशा में सोचता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
'भारतीयों को कर्मभूमि के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए'
अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को लेकर भी मोहन भागवत ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीयों की एक जन्मभूमि है और एक कर्मभूमि। भारत उनकी जन्मभूमि है, जबकि जिस देश में वे रहते और काम करते हैं, वह उनकी कर्मभूमि है। भागवत ने कहा कि भारतीयों को अपनी कर्मभूमि के प्रति ईमानदार और जिम्मेदार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका में रहने वाले भारतीयों का इस देश के प्रति भी कर्तव्य है और उन्हें उसे पूरा करना चाहिए। साथ ही, भारत से मिले संस्कार और मूल्यों को भी अपने जीवन में बनाए रखना चाहिए।
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‘जन्मभूमि से मिले मूल्यों पर जिएं’
भागवत ने कहा कि भारत अपनी संतानों से यह उम्मीद करता है कि वे उन मूल्यों के साथ जीवन जिएं, जो उन्हें अपनी जन्मभूमि से मिले हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश में रहने वाले भारतीय अगर भारत के लिए कुछ करना चाहते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं। लेकिन सबसे पहले जिस देश में वे रह रहे हैं, वहां अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना जरूरी है।



















