भोपाल: डाबरी नर्सरी में 2000 से ज्यादा सागौन के पेड़ काटे जाने पर NGT सख्त, चार सदस्यीय जांच समिति गठित

भोपाल। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने इसे पर्यावरण से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को मौके का निरीक्षण कर चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले में राज्य सरकार समेत संबंधित विभागों को पक्षकार बनाया गया है और सभी से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी।
डाबरी नर्सरी में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई
एनजीटी ने संज्ञान लेते हुए कहा कि डाबरी वन क्षेत्र की नर्सरी में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। जिस जगह नए पौधे तैयार कर वन क्षेत्र को बढ़ाने का काम होना चाहिए, वहां 2000 से अधिक सागौन के पेड़ काटे जाने की बात सामने आई है। ट्रिब्यूनल ने इसे गंभीर मानते हुए वन क्षेत्र की निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
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चार सदस्यीय जांच समिति मौके पर करेगी निरीक्षण
एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को मौके का निरीक्षण कर चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय का प्रतिनिधि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रतिनिधि, भोपाल कलेक्टर का प्रतिनिधि और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रतिनिधि शामिल हैं।
वनभूमि पर अतिक्रमण और खेती की भी होगी जांच
जांच सिर्फ पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं रहेगी। आदेश के मुताबिक कंपाउंड नंबर 12 और 13 की सैकड़ों एकड़ वनभूमि पर अतिक्रमण और वहां खेती शुरू किए जाने के आरोपों की भी जांच होगी। ग्रामीणों ने पेड़ों की कटाई के साथ वनभूमि पर अतिक्रमण को लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। अब समिति मौके पर जाकर इन आरोपों की भी पड़ताल करेगी।
काटे गए पेड़ों को तत्काल कब्जे में लेने के निर्देश
एनजीटी ने डीएफओ भोपाल को निर्देश दिए हैं कि काटे गए पेड़ों को तत्काल नियमानुसार कब्जे में लिया जाए। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि इन पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किन अधिकारियों और कर्मचारियों की थी। मामले में वन क्षेत्र की निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर भी जांच की जाएगी।
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राज्य सरकार समेत संबंधित विभागों से मांगा जवाब
मामले में राज्य सरकार, पर्यावरण विभाग, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भोपाल नगर निगम, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, डीएफओ भोपाल और वन विकास निगम समेत संबंधित विभागों को पक्षकार बनाया गया है। सभी से चार सप्ताह में जवाब भी मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी।




















