डोकलाम और गलवान के दौरान चीन के कमांडर रहे झाओ जोंगकी पर कार्रवाई, शी जिनपिंग सरकार ने छीनी अहम जिम्मेदारियां

भारत-चीन सीमा पर डोकलाम गतिरोध और गलवान घाटी की हिंसक झड़प के दौरान चीन की सेना के अहम कमांडर रहे जनरल झाओ जोंगकी पर चीन में बड़ी कार्रवाई हुई है। चीन की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (CPPCC) ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी है। इसके साथ ही उन्हें संस्था की स्थायी समिति और जातीय एवं धार्मिक मामलों की समिति के उपाध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया है। झाओ जोंगकी उस समय चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रमुख थे, जब 2017 में डोकलाम में भारत और चीन के सैनिक करीब 72 दिनों तक आमने-सामने रहे थे। इसके बाद 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ा और जून में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई।
गलवान के दौरान झाओ के हाथ में थी कमान
झाओ फरवरी 2016 में पुनर्गठित वेस्टर्न थिएटर कमांड के पहले कमांडर बने थे। यह चीन की उन प्रमुख सैन्य कमानों में शामिल है, जिसके जिम्मे तिब्बत और शिनजियांग के साथ-साथ भारत से लगी सीमा के बड़े हिस्से में सैन्य गतिविधियों की निगरानी है। 2017 में डोकलाम विवाद के दौरान झाओ इसी कमांड का नेतृत्व कर रहे थे। 2020 में पूर्वी लद्दाख में तनाव शुरू हुआ, तब भी वह वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रमुख थे। यह तनाव 15 जून 2020 को गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प में बदल गया, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए। चीन ने अपने चार सैनिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की थी।
क्या झाओ ने गलवान ऑपरेशन को मंजूरी दी थी?
गलवान हिंसा के बाद झाओ जोंगकी की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट सामने आई थी। 2020 में ANI ने एक अमेरिकी खुफिया आकलन का हवाला देते हुए दावा किया था कि झाओ ने गलवान ऑपरेशन को मंजूरी दी थी और इसका मकसद भारत को सबक सिखाना था। हालांकि, यह दावा एक अमेरिकी खुफिया आकलन पर आधारित रिपोर्टिंग थी और चीन ने सार्वजनिक रूप से झाओ की ऐसी भूमिका की पुष्टि नहीं की है। इसलिए झाओ को हटाने की मौजूदा कार्रवाई को सीधे गलवान की घटना से जोड़ना फिलहाल आधिकारिक तौर पर सही नहीं होगा। चीन ने उनकी सदस्यता और पद हटाने की घोषणा तो की है लेकिन इस कार्रवाई की वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
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शी जिनपिंग की सेना में जारी है बड़ी सफाई
झाओ पर हुई कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेना में भ्रष्टाचार और अनुशासन के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। हाल ही में चीन ने दो वरिष्ठ जनरलों झांग यूशिया और लियू झेनली को केंद्रीय सैन्य आयोग से हटा दिया। रॉयटर्स के मुताबिक दोनों के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक और कानूनी उल्लंघनों की जांच चल रही है। हालांकि झाओ जोंगकी को हटाने के मामले में चीन ने फिलहाल न तो भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है और न ही किसी जांच की आधिकारिक जानकारी दी है। इसलिए उनकी कार्रवाई को शी जिनपिंग की व्यापक सैन्य सफाई से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इसके पीछे की सटीक वजह अभी स्पष्ट नहीं है।
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भारत-चीन संबंधों के बीच अहम घटनाक्रम
झाओ जोंगकी का नाम भारत-चीन सीमा से जुड़े दो बड़े सैन्य टकरावों के दौरान सामने आया था। एक तरफ 2017 का डोकलाम विवाद था, तो दूसरी ओर 2020 का गलवान संघर्ष। ऐसे में उनकी राजनीतिक जिम्मेदारियां खत्म किया जाना भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। दिलचस्प बात यह है कि यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन हाल के दिनों में सीमा पर तनाव कम करने और संवाद बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। दोनों देशों ने 26 अगस्त को उच्चस्तरीय सीमा वार्ता के बाद सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।




















