'दोस्त की तरह मतभेदों को...', मोदी-जिनपिंग मुलाकात से पहले चीन ने दिया बड़ा संदेश

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच रहे हैं। उनके दिल्ली रवाना होने से पहले बीजिंग की ओर से भारत-चीन रिश्तों को लेकर अहम बयान सामने आया है। चीन ने कहा है कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को सही तरीके से संभालते हुए अच्छे पड़ोसी और दोस्त की तरह आगे बढ़ना चाहिए। इसके साथ ही चीन ने बातचीत और सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि बीजिंग और नई दिल्ली दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ अपने रिश्तों को लंबे समय के नजरिए से आगे बढ़ाना चाहता है। इसके लिए दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने की जरूरत है।
मतभेदों को सही तरीके से संभालने पर जोर
शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि चीन दोनों नेताओं की रणनीतिक सोच के मुताबिक भारत के साथ काम करना चाहता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत बढ़ाने और सहयोग मजबूत करने की जरूरत बताई। चीन का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब भारत और चीन के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं। ऐसे में बीजिंग का जोर इस बात पर है कि असहमति के बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहनी चाहिए। चीन रिश्तों को लंबे समय के नजरिए से देखने और मतभेदों को सही तरीके से संभालने की बात कर रहा है। चीन की ओर से दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी और एक-दूसरे की कामयाबी में मदद करने वाले साझेदार के तौर पर आगे बढ़ने का संदेश दिया गया है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने भी दिया यही संकेत
भारत को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी इसी तरह का बयान दिया है। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ संवाद बढ़ाने के लिए तैयार है। दोनों देशों को अपने रिश्तों को रणनीतिक और लंबे समय के नजरिए से देखना चाहिए। माओ निंग ने भी मतभेदों को सही तरीके से संभालने पर जोर दिया। उन्होंने भारत और चीन को अच्छे पड़ोसी बताते हुए कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की सफलता में मदद करने वाले साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
सात साल बाद भारत आ रहे हैं जिनपिंग
शी जिनपिंग शनिवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। वह 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी होगी। जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं। इससे पहले वह 2019 में चेन्नई के पास महाबलीपुरम आए थे, जहां प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी अनौपचारिक बैठक हुई थी। इस बार दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे वक्त हो रही है, जब भारत-चीन संबंधों में सीमा समेत कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। हालांकि, हाल के समय में दोनों देशों की ओर से बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिशें भी हुई हैं।
BRICS में भी सहयोग पर चीन का जोर
जिनपिंग का भारत दौरा सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत तक सीमित नहीं है। वह 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। चीन ने ब्रिक्स को लेकर भी बातचीत और सहयोग पर जोर दिया है। माओ निंग ने कहा कि बीजिंग ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए काम करना चाहता है। अब सबकी नजर प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक पर है। दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा होती है और भारत-चीन रिश्तों को लेकर क्या संकेत सामने आते हैं, यह देखना अहम होगा।



















