जेल से निकला ,अब मेडिकल कॉलेज लौटने की तैयारी:छात्र ने DAVV से लगाई गुहार
इंदौर। एक आपराधिक मामले में सजा पूरी कर चुके एमबीबीएस छात्र ने अब डॉक्टर बनने का अपना अधूरा सपना पूरा करने की इच्छा जताई है। छात्र ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) से अपनी मेडिकल पढ़ाई दोबारा शुरू कराने की मांग करते हुए आवेदन दिया। विश्वविद्यालय ने मामले की समीक्षा के बाद छात्र की एमबीबीएस प्रथम प्रोफ की अंकसूची जारी कर दी, लेकिन आगे की पढ़ाई की अनुमति देने का अधिकार मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर का होने के कारण मामला वहां भेज दिया गया है।
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जानकारी के अनुसार छात्र ने वर्ष 2013-14 में इंदौर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। इसी दौरान वह एक आपराधिक प्रकरण में दोषी ठहराया गया और उसे सजा हुई। जेल में रहने के दौरान छात्र ने पढ़ाई जारी रखने की अनुमति मांगी थी। इस पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद डीएवीवी ने उसे एमबीबीएस प्रथम प्रोफ की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी।
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छात्र ने परीक्षा तो दी, लेकिन उसका परिणाम लंबे समय तक जारी नहीं किया गया। सजा पूरी होने के बाद छात्र ने विश्वविद्यालय से दोबारा संपर्क कर अंकसूची जारी करने और आगे की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने का अनुरोध किया।
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मामले को कुलपति डॉ. राकेश सिंघई, कुलसचिव प्रज्वल खरे और परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी के समक्ष रखा गया। विश्वविद्यालय ने पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की। समिति की सिफारिश के आधार पर डीएवीवी ने छात्र की प्रथम प्रोफ की मार्कशीट जारी कर दी। हालांकि विश्वविद्यालय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों के अनुसार एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश, पुनः प्रवेश अथवा आगे की पढ़ाई से संबंधित निर्णय लेने का अधिकार अब डीएवीवी के पास नहीं है। यह अधिकार मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर के अधीन है।












