मलकपुर जंगल में अकेले भटक रहे जंगली हाथी का रेस्क्यू, बांधवगढ़ भेजा गया; साथी की करंट से हुई थी मौत

मऊगंज। जिले के मलकपुर जंगल में साथी हाथी की करंट लगने से मौत के बाद अकेले भटक रहे दूसरे जंगली हाथी को वन विभाग की संयुक्त टीम ने मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। करीब दो दिन तक चले जटिल रेस्क्यू अभियान के बाद हाथी को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भेज दिया गया। हाथी को पकड़ने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए मऊगंज, रीवा और सीधी वन मंडल की टीमों के साथ बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिजर्व से चार प्रशिक्षित हाथियों की मदद ली गई। प्रशिक्षित हाथियों रामा, सूर्या, चित्रा और बापू ने रेस्क्यू अभियान में अहम भूमिका निभाई।
चार प्रशिक्षित हाथियों ने की घेराबंदी
रेस्क्यू अभियान के दौरान प्रशिक्षित हाथियों की मदद से जंगली हाथी को चारों तरफ से घेरा गया। टीम ने उसे आबादी वाले इलाके से दूर सुरक्षित दायरे में लाकर नियंत्रित किया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने हाथी को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया। आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ले जाया गया। डीएफओ मऊगंज लोकेश निरापुरे के मुताबिक, मऊगंज, रीवा और सीधी वन विभाग की संयुक्त टीम ने संजय और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से आए प्रशिक्षित हाथियों की मदद से मलकपुर जंगल में मौजूद हाथी को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद उसे बांधवगढ़ ले जाया जा रहा है।
19 सितंबर की रात मलकपुर पहुंचा था हाथियों का झुंड
बताया गया कि हाथियों का यह जोड़ा 19 सितंबर की रात मलकपुर क्षेत्र में पहुंचा था। इसके बाद शनिवार सुबह पेड़ की पत्तियां खाते समय एक हाथी 11 केवी बिजली लाइन के संपर्क में आ गया, जिससे उसकी मौत हो गई। साथी हाथी की मौत के बाद दूसरा हाथी इलाके में अकेला भटक रहा था। वन विभाग की टीम उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही थी। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने के लिए संयुक्त अभियान शुरू किया गया। करीब दो दिन तक चले अभियान में वन विभाग के कई दलों ने हाथी की लोकेशन पर नजर रखते हुए उसे आबादी क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थान पर लाने की कोशिश की। प्रशिक्षित हाथियों की मदद से आखिरकार उसे रेस्क्यू कर लिया गया।
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बिजली के तारों को लेकर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल
हाथी की करंट से मौत के मामले में पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह 'बन्ना' ने प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। पूर्व विधायक का कहना है कि क्षेत्र में पिछले करीब छह महीने से हाथियों की मौजूदगी की जानकारी थी और इसी वजह से कुछ गांवों में बिजली आपूर्ति भी बंद रखी जा रही थी। इसके बावजूद घटनास्थल पर बिजली के तारों में करंट कैसे दौड़ रहा था, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डीएफओ और सीसीएफ स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और हादसे से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए। उन्होंने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
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हाथियों की मौजूदगी के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हाथियों के लगातार क्षेत्र में आने के कारण ग्रामीण इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बना हुआ था। साथी हाथी की करंट से मौत के बाद बिजली लाइनों की सुरक्षा और हाथियों की निगरानी को लेकर भी सवाल उठे हैं। फिलहाल दूसरे हाथी को सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भेज दिया गया है। वन विभाग की टीम आगे भी क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखेगी, ताकि ग्रामीण आबादी और वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति को रोका जा सके।



















