Peoples Update Special :कुपोषण के कलंक से बाहर आया श्योपुर, लेकिन भिंड, मुरैना और ग्वालियर में बढ़े कुपोषित बच्चे

प्रदेश में कुपोषण के लिए पहचाना जाने वाला श्योपुर जिला अब अपनी पुरानी पहचान बदल रहा है। यहां कुपोषित बच्चों की संख्या कम हो रही है। हालांकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है।
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कुपोषण के कलंक से बाहर आया श्योपुर, लेकिन भिंड, मुरैना और ग्वालियर में बढ़े कुपोषित बच्चे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। चंबल क्षेत्र का सहरिया बहुल आदिवासी बहुल श्योपुर जिला कुपोषण के कलंक के नाम से जाता था। अब इस जिले में पिछले पांच साल से किए जा रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य के प्रति चलाए जा रहे जन जागरुकता अभियान से सुधार की संभावनाएं बढ़ीं हैं। इस जिले में जहां वर्ष 2023 में  कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 4,470 थी, वहीं अब वर्ष 2025 में घटकर 3,204 हो गई है। जबकि भिंड, मुरैना और ग्वालियर में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है।

    उज्जैन संभाग में आई कमी

    मालवा क्षेत्र में भी उज्जैन संभाग के उज्जैन जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या में तेजी से कमी आई। राज्य सरकार ने ग्वालियर-चंबल और मालवा क्षेत्र के दो दर्जन जिलों पर आधारित जानकारी में बताया है कि कुपोषण से लड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है।

    पोषण ट्रैकर ऐप में दर्ज हो रही हर दिन जानकारी

    भारत सरकार द्वारा संचालित पोषण ट्रैकर ऐप के आंकड़ें भी बताते हैं कि पिछले एक साल में बच्चों की कुपोषण स्थिति में सुधार हो रहा है लेकिन कम वजन और दुबलेपन जैसे खतरनाक श्रेणियों में मध्य प्रदेश का देश में अभी भी दूसरा स्थान है।

    कुपोषण को खत्म करने ये कार्यक्रम

    सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 एवं राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्द्धन कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जा रहा है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 अंतर्गत अतिगंभीर कुपोषित एसएएम बच्चों को अतिरिक्त आहार थर्ड मिल के रूप में राशि 4 रुपए प्रति बच्चा प्रतिदिन प्रदाय किए जाने का प्रावधान है।

    उज्जैन संभाग की जिलेवार जानकारी

    (वर्ष 23-24 से 25-26 की स्थिति)

    जिला    बच्चों की संख्या  कुपोषण मुक्त हुए

    आगर मालवा   8,852      1,276

    देवास             18,696     5,547

    मंदसौर           34,403     1,682

    नीमच             29,631    1,201

    रतलाम           44,502     9,298

    शाजापुर          39,764     1,742

    उज्जैन           48,627     21,572

    (संख्या कुपोषित, कम वजन और छोटे कद के बच्चे शामिल)

    स्रोत : विधानसभा में दी गई जानकारी।

     

    चंबल-ग्वालियर संभाग की स्थिति

    कुपोषित बच्चों की संख्या

    जिला           वर्ष 22-23      24-25

    श्योपुर             4,470     3,777

    भिंड                   822     6,583

    मुरैना               8,382   13,981

    ग्वालियर           3,505   5,519

    अशोकनगर        4,568   4,116

    शिवपुरी             3,811   3,602

    कुपोषण खत्म करने पर पूरा फोकस है

    कुपोषित बच्चों की नियमित मॉनिटरिंग और पूरा पोषण उपलब्ध कराने की निगरानी की जा रही है। जहां कुपोषण कम नहीं हो रहा, वहां जिम्मेदारी तय की जा रही है। श्योपुर सहित अन्य आदिवासी बहुल जिलों में कुपोषण खत्म करने पर पूरा फोकस है। जल्द ही एक और प्रपोजल तैयार किया जाएगा।

    निधि निवेदिता, आयुक्त, महिला एवं बाल विकास

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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