महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर!उद्धव ठाकरे को एक और झटका, 6 सांसदों ने किया शिंदे गुट का समर्थन

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी UBT में टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। दावा किया जा रहा है कि, पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद अलग गुट बनाकर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का समर्थन करने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि, इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग भी की है।
हालांकि, पूरे मामले पर अभी आधिकारिक फैसला आना बाकी है। लेकिन दिल्ली से लेकर मुंबई तक इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के छह सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से अलग होने का फैसला किया है। इन सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि ये सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर अलग संसदीय समूह के तौर पर मान्यता मांग सकते हैं। वहीं उद्धव ठाकरे लगातार सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने 18 जून को दिल्ली में संसदीय दल की अहम बैठक भी बुलाई है।
कौन हैं वे 6 सांसद जिनके बागी होने की चर्चा?
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सांसद |
लोकसभा सीट |
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नागेश पाटिल आष्टीकर |
हिंगोली |
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संजय देशमुख |
यवतमाल |
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भाऊसाहेब वाकचौरे |
शिर्डी |
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ओमप्रकाश (ओमराजे) निंबालकर |
उस्मानाबाद |
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संजय हरिभाऊ जाधव |
परभणी |
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संजय दीना पाटिल |
मुंबई उत्तर-पूर्व |
ये 3 सांसद अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ
दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल तीन सांसद मौजूद रहे, जिन्हें उद्धव ठाकरे के साथ माना जा रहा है।
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सांसद |
लोकसभा सीट |
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अरविंद सावंत |
मुंबई दक्षिण |
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अनिल देसाई |
मुंबई दक्षिण मध्य |
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राजाभाऊ वाजे |
नासिक |
संजय राउत का आरोप- सांसदों को दिए गए करोड़ों रुपए
शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी होने जा रहे सांसदों को पहले 15-15 करोड़ रुपए दिए गए और बाद में 50-50 करोड़ रुपए तक का ऑफर किया गया। राउत ने दावा किया कि सांसदों को तीन चार्टर्ड विमानों से दिल्ली लाया गया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई आधिकारिक सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राउत बोले- अगर जाना है तो पहले इस्तीफा दें
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय राउत ने बागी सांसदों को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि, उद्धव ठाकरे और पार्टी कार्यकर्ताओं ने इन सांसदों को जिताने के लिए दिन-रात मेहनत की थी। अगर वे पार्टी छोड़ना चाहते हैं तो पहले सांसद पद से इस्तीफा दें और फिर जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ें। राउत ने यह भी कहा कि, फिलहाल पार्टी के पास सांसदों के जाने की आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन अगर 2022 जैसा घटनाक्रम दोहराया गया तो महाराष्ट्र की जनता इसका जवाब देगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों पहुंचे सिर्फ 3 सांसद?
दिल्ली में संजय राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 9 सांसदों में से सिर्फ तीन सांसद मौजूद रहे।
- अरविंद सावंत
- अनिल देसाई
- राजाभाऊ वाजे
बाकी छह सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया।
संजय दीना पाटिल ने किया बगावत से इनकार
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सांसद संजय दीना पाटिल ने पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका नाम किसी बागी सूची में नहीं है और वे उद्धव ठाकरे की पार्टी में ही बने रहेंगे।
अरविंद सावंत ने स्पीकर को लिखा पत्र
UBT सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि, अगर कोई सांसद अलग गुट बनाने का दावा करता है तो उसे पार्टी का आधिकारिक प्रतिनिधि नहीं माना जाए। उन्होंने कहा कि सदन में नेता, व्हिप और अन्य अधिकार राजनीतिक दल से आते हैं, केवल संसदीय दल से नहीं।
अनिल देसाई ने सुप्रीम कोर्ट का भी किया जिक्र
अनिल देसाई ने कहा कि यदि शिवसेना विवाद से जुड़ी स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर सुप्रीम कोर्ट पहले फैसला दे देता तो शायद आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने उम्मीद जताई कि, अगर कानून का उल्लंघन हुआ तो चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट उचित कार्रवाई करेंगे।
14 जून की बैठक में मां-बच्चों की कसम खाई
संजय राउत ने दावा किया कि, 14 जून को उद्धव ठाकरे की बैठक में शामिल सांसदों ने अपनी मां, बच्चों, साईं बाबा और देवी तुलजाभवानी की शपथ लेकर पार्टी नहीं छोड़ने का भरोसा दिया था। राउत के मुताबिक, इसके बावजूद अब जो घटनाक्रम सामने आ रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उद्धव ठाकरे ने बुलाई संसदीय दल की बैठक
पार्टी ने 18 जून को दिल्ली में संसदीय समिति की बैठक बुलाई है। सभी सांसदों को व्हिप जारी कर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है। जानकारी के मुताबिक, अगर कोई सांसद बैठक में नहीं पहुंचता है तो उसके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
'ऑपरेशन टाइगर' क्यों कहा जा रहा है?
महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक हलचल को राजनीतिक गलियारों में 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया जा रहा है। दरअसल, अविभाजित शिवसेना का चुनाव चिन्ह और पहचान 'बाघ' रहा है। माना जा रहा है कि इसी प्रतीक को आधार बनाकर इस पूरे घटनाक्रम को यह नाम दिया गया है।
फिर चर्चा में आई 2022 की बगावत
यह पहली बार नहीं है जब शिवसेना में इतनी बड़ी टूट की चर्चा हो रही है।
2022 में क्या हुआ था?
- जून 2022 में 55 में से 39 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ चले गए।
- उद्धव ठाकरे सरकार अल्पमत में आ गई।
- उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया।
- भाजपा के समर्थन से एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने।
- बाद में चुनाव आयोग ने शिवसेना का नाम और 'धनुष-बाण' चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को दे दिया।
- जनवरी 2024 में विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने भी शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना माना।
पिछले 75 दिनों में कई दलों में टूट
हाल के दिनों में कई राजनीतिक दलों में टूट देखने को मिली है।
AAP
2 अप्रैल: राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाया गया।
24 अप्रैल: 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया।
26 अप्रैल: सभापति ने उनके भाजपा में विलय को मान्यता दी।
TMC
8 जून: कई सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की।
15 जून: 20 सांसदों ने NCPI में विलय और NDA को समर्थन देने का दावा किया।
16 जून: स्पीकर ने कहा कि फैसला लेने से पहले दोनों पक्षों को सुना जाएगा।











