नर्मदा चौथे चरण की राह में रोड़े ही रोड़े! छह महीने बाद भी निर्माण की चाल धीमी,अमृत योजना-2 में छह महीने बाद भी काम सुस्त

इंदौर। शहर की बढ़ती पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए नर्मदा के चौथे चरण से बड़ी उम्मीदें हैं। हर बार जलसंकट के बीच इसी परियोजना को भविष्य की राहत के तौर पर सामने रखा जाता है, लेकिन अमृत योजना-2 के मौजूदा हालात इन उम्मीदों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। काम शुरू हुए करीब छह महीने बीत चुके हैं, इसके बावजूद कई हिस्सों में निर्माण की जगह अभी कागजी और तकनीकी प्रक्रिया ही आगे बढ़ रही है। फरवरी 2026 में अलग-अलग पैकेज के ठेके और वर्क ऑर्डर जारी किए गए थे। लक्ष्य वर्ष 2028-29 तक परियोजना को पूरा करने का है, लेकिन चारों पैकेज की प्रगति एक जैसी नहीं है। खासतौर पर पैकेज-2 में काम की रफ्तार बेहद धीमी है। करीब 448 करोड़ रुपए के इस पैकेज में अब तक सिर्फ 1 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज हुई है।
कहीं डिजाइन अटका, कहीं जमीन तो कहीं पुरानी टंकियां बनीं रोड़ा
परियोजना के तहत इंटकवेल, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, डिस्ट्रीब्यूशन लाइन और पानी की टंकियों से जुड़े काम किए जाने हैं। मगर अलग-अलग स्तर पर तकनीकी मंजूरियां और अन्य प्रक्रियाएं निर्माण की राह में अड़चन बनी हुई हैं।
पैकेज-1 में सबसे ज्यादा काम आगे बढ़ा
करीब 800 करोड़ रुपए से अधिक के इस पैकेज का जिम्मा एसपीएमएल इंफ्रा के पास है। इसमें लगभग 18 प्रतिशत काम पूरा बताया गया है। हाइड्रोलिक्स और जीएडी की मंजूरी मिलने के बाद इंटकवेल और डब्ल्यूटीपी साइट पर खुदाई शुरू हो चुकी है।
पैकेज-2 सबसे पीछे
तिरुपति सीमेंट को मिले करीब 448 करोड़ रुपए से अधिक के इस काम की प्रगति केवल 1 प्रतिशत है। सर्वे पूरा होने के बाद अब टनल सहित डिजाइन और ड्राइंग की तकनीकी मंजूरी का इंतजार है। प्रस्ताव आईआईटी को भेजे गए हैं। मंजूरी नहीं मिलने से जमीनी काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
पैकेज-3 में सर्वे पूरा, निर्माण की रफ्तार धीमी
करीब 410 करोड़ रुपए के इस पैकेज का काम तिरुपति सीमेंट प्रोडक्ट्स कर रही है। यहां सर्वे पूरा होने का दावा है, जबकि डिजाइन-ड्राइंग करीब 60 प्रतिशत तक तैयार हुई है। इस हिस्से में डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के साथ पानी की टंकियों का निर्माण प्रस्तावित है। कुल भौतिक प्रगति करीब 5 प्रतिशत बताई गई है। पुरानी टंकियों की मजबूती जांच यानी स्ट्रक्चरल असेसमेंट भी अभी बाकी है।
पैकेज-4 में छह स्थानों पर जमीन का इंतजार
लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग को मिले करीब 497 करोड़ रुपए के इस पैकेज में लगभग 5.5 प्रतिशत काम हुआ है। सर्वे करीब 70 प्रतिशत पूरा बताया गया है और डिजाइन-ड्राइंग की प्रक्रिया जारी है। इस पैकेज में 23 टंकियां प्रस्तावित हैं, लेकिन छह स्थानों पर अभी जमीन की स्वीकृति नहीं मिली है।
छह महीने बाद भी मंजूरियों का इंतजार
परियोजना की मौजूदा स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि जब लक्ष्य 2028-29 तक काम पूरा करने का है, तो शुरुआती चरण में ही तकनीकी मंजूरियों, जमीन और डिजाइन-ड्राइंग में इतनी देरी आगे चलकर समयसीमा पर कितना असर डालेगी। सर्वे के कई काम पूरे होने के बावजूद वास्तविक निर्माण की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
अधिकारियों ने भी मांगा जवाब, पेनल्टी की तैयारी
काम की रफ्तार को लेकर विभागीय स्तर पर भी नाराजगी सामने आ चुकी है। पिछली समीक्षा बैठक में एसीएस ने डिजाइन और ड्राइंग में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे। इसके बाद इस सप्ताह हुई बैठक में जल कार्य प्रभारी एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा और अपर आयुक्त आशीष पाठक ने संबंधित एजेंसियों से देरी का कारण पूछा।



















