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महानदी विवाद पर आज दिल्ली में महामंथन, अमित शाह के सामने बैठेंगे छत्तीसगढ़-ओडिशा के CM, 8 साल पुराने विवाद के समाधान पर नजर

साय-माझी की 20 सितंबर की मुलाकात के बाद फिर निर्णायक बातचीत, जल बंटवारे और प्रबंधन पर बनेगा समाधान का रास्ता,छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर आज 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में अहम बैठक होगी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सीएम विष्णुदेव साय और ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी चर्चा करेंगे।
महानदी विवाद पर आज दिल्ली में महामंथन, अमित शाह के सामने बैठेंगे छत्तीसगढ़-ओडिशा के CM, 8 साल पुराने विवाद के समाधान पर नजर

प्रेम कुमार, रायपुर: छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर आज, 1 अक्टूबर 2026, दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी आमने-सामने होंगे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल समेत दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी प्रतिनिधि भी चर्चा में शामिल होंगे। बैठक का फोकस महानदी के पानी के बंटवारे, प्रबंधन और दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति से समाधान की दिशा तय करने पर रहेगा। 

दिल्ली में आज बड़ा महामंथन

महानदी जल विवाद को लेकर केंद्र सरकार की मध्यस्थता में बातचीत का सिलसिला अब एक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। आज दिल्ली में होने वाली बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह करेंगे। बैठक में सीएम विष्णुदेव साय और ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी के साथ दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और तकनीकी अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। 

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साय-माझी की मुलाकात के बाद बढ़ी उम्मीद

यह बैठक 20 सितंबर को भुवनेश्वर में हुई साय-माझी की मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद हो रही है। दोनों मुख्यमंत्रियों ने महानदी सहित कई मुद्दों पर एक घंटे से ज्यादा समय तक चर्चा की थी। मुलाकात के बाद सीएम साय ने विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद जताई थी। 

30 जुलाई की बैठक से आगे बढ़ेगी बातचीत

इससे पहले 30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई थी। केंद्र ने बातचीत, तकनीकी सहयोग और आपसी सहमति के जरिए विवाद सुलझाने की दिशा में प्रयास आगे बढ़ाए थे। केंद्रीय जल आयोग भी दोनों राज्यों के बीच तकनीकी स्तर पर चर्चा में शामिल है। 

2018 से ट्रिब्यूनल में लंबित है मामला

महानदी जल बंटवारे का विवाद वर्ष 2018 से महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित है। विवाद मुख्य रूप से महानदी के ऊपरी हिस्से में छत्तीसगढ़ की जल परियोजनाओं और ओडिशा में नीचे की ओर पानी के प्रवाह से जुड़े सवालों पर केंद्रित रहा है। 

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ओडिशा की चिंता क्या है?

ओडिशा लंबे समय से छत्तीसगढ़ में महानदी के ऊपरी हिस्से में बने बैराज और जल परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताता रहा है। उसका प्रमुख तर्क यह रहा है कि कम बारिश या गैर-मानसूनी अवधि में ऊपरी हिस्से की परियोजनाओं के कारण नीचे की ओर पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। 

छत्तीसगढ़ का फोकस पानी के उपयोग पर

दूसरी ओर छत्तीसगढ़ महानदी के पानी का कृषि, पेयजल और विकास संबंधी जरूरतों के लिए उपयोग करता है। दोनों राज्यों के बीच अब तकनीकी आंकड़ों और जल प्रबंधन के आधार पर किसी स्वीकार्य समाधान की तलाश की जा रही है।

CWC की रिपोर्ट और तकनीकी पहलू अहम

महानदी विवाद में सिर्फ राजनीतिक बातचीत ही नहीं, बल्कि तकनीकी आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। केंद्रीय जल आयोग के सचिव ने दोनों राज्यों के बीच हुई पिछली बैठकों की जानकारी न्यायाधिकरण के समक्ष रखी है और उसे रिकॉर्ड पर लिया गया है। 

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बाढ़ और जल प्रबंधन भी चर्चा में आ सकते हैं

हाल के दिनों में महानदी बेसिन के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बनी है। ऐसे में आज की बातचीत में सिर्फ पानी के बंटवारे ही नहीं, बल्कि जल प्रबंधन, जल प्रवाह और भविष्य की व्यवस्था जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ओडिशा सरकार ने हालिया बारिश से प्रभावित इलाकों में राहत एवं प्रबंधन की समीक्षा भी की है। 

अभी कोई अंतिम समझौता घोषित नहीं

बैठक को लेकर दोनों राज्यों की ओर से सकारात्मक संकेत जरूर दिए गए हैं, लेकिन आज की बैठक को अंतिम समझौते के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। मौजूदा जानकारी के अनुसार बातचीत का उद्देश्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ना और आपसी सहमति का रास्ता तलाशना है। अंतिम समझौते के लिए संबंधित औपचारिक और कानूनी प्रक्रियाएं भी जरूरी होंगी।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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