PU Special :मध्यप्रदेश के 12 जिलों के 90 शहरों में जल संकट की आशंका, जनवरी से बिगड़ सकते हैं हालात; पानी की बर्बादी रोकने के निर्देश

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में औसत से कम बारिश वाले 12 जिलों के 90 नगरीय निकायों में आने वाले महीनों में पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। अनुमान है कि इन शहरों में जनवरी से पानी की कमी की स्थिति बन सकती है। बारिश कम होने के कारण जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसे देखते हुए नगरीय निकायों को पानी की बर्बादी रोकने, पाइपलाइन लीकेज पर नियंत्रण करने और वैकल्पिक जलस्रोत तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। गर्मी शुरू होने से पहले ही पेयजल संकट से निपटने की तैयारी पर जोर दिया जा रहा है। जलप्रदाय योजनाओं की पाइपलाइनों में होने वाले लीकेज की लगातार निगरानी करने और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की तत्काल मरम्मत कराने को कहा गया है। लीकेज के कारण रोजाना बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद होने की आशंका रहती है। इसलिए निकायों को ऐसी जगहों की पहचान कर समय पर सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
नल कनेक्शन में टोंटी नहीं तो एक सप्ताह में लगानी होगी
नगरीय निकायों को अपने क्षेत्रों में सर्वे कर यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि किन घरों में नल कनेक्शन तो हैं लेकिन उनमें टोंटी नहीं लगी है। ऐसे सभी कनेक्शनों में एक सप्ताह के भीतर टोंटी लगाने की व्यवस्था करनी होगी। इसका उद्देश्य जलप्रदाय के दौरान पानी को अनावश्यक रूप से बहने से रोकना है। इसके साथ ही निकाय क्षेत्रों में संचालित अवैध नल कनेक्शनों का भी एक सप्ताह में सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे कनेक्शनों को नियमानुसार बंद करने या वैध करने की कार्रवाई की जाएगी। खास तौर पर अवैध कॉमर्शियल कनेक्शनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है।
निर्माण कार्य, स्वीमिंग पूल और वाहन धुलाई में पीने के पानी पर रोक
कम बारिश को देखते हुए उपलब्ध पेयजल का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण कार्यों, स्वीमिंग पूल, बगीचों और निजी वाहनों की धुलाई में पीने योग्य पानी के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है। इसका उद्देश्य सीमित मात्रा में उपलब्ध पेयजल को घरेलू जरूरतों के लिए सुरक्षित रखना है ताकि आने वाले महीनों में पानी की कमी होने पर आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
सार्वजनिक पेयजल स्रोतों के 500 मीटर दायरे में नए बोरवेल की अनुमति नहीं
नगरीय निकायों में जलप्रदाय के लिए इस्तेमाल किए जा रहे जलस्रोतों में उपलब्ध पानी की नियमित जांच और निगरानी करने को कहा गया है। जिन स्थानों पर जलस्तर या पानी की उपलब्धता कम हो रही है, वहां वैकल्पिक जलस्रोतों की पहले से पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर इन जलस्रोतों के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी समय पर पूरी करनी होगी। इसके अलावा सार्वजनिक पेयजल स्रोतों के 500 मीटर के दायरे में गैर-पेयजल उपयोग के लिए नए कुएं या बोरवेल खोदने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे सार्वजनिक पेयजल स्रोतों पर अतिरिक्त दबाव को रोकने की कोशिश की जाएगी।
टैंकरों की मरम्मत कराकर रखनी होगी तैयारी
प्रशासन ने नगरीय निकायों को संभावित जल संकट से निपटने के लिए टैंकरों की व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए हैं। पानी की कमी बढ़ने पर शहरों में टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए निकायों में उपलब्ध टैंकरों की जरूरत के अनुसार मरम्मत कराने को कहा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल जल परिवहन शुरू किया जा सके।
12 जिलों के निकायों पर सबसे ज्यादा फोकस
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि प्रदेश में कम बारिश के कारण नगरीय निकायों को अभी से पानी की मितव्ययिता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। निकायों से कहा गया है कि वे जल संकट से निपटने की तैयारी पहले से करें ताकि जरूरत पड़ने पर आम जनता को पानी के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा फोकस कम बारिश वाले 12 जिलों के नगरीय निकायों पर किया गया है।




















