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Work Pressure ने ली एक और जान! पुणे के बाद लखनऊ में HDFC बैंक में डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट काम करते-करते कुर्सी से गिरीं, हुई मौत

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में HDFC बैंक की महिला अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। ऑफिस में काम के दौरान वह अचानक बेहोश होकर कुर्सी से नीचे गिर गईं। कर्मचारी आनन-फानन में उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

ऑफिस में काम करते समय हुई बेहोश

जानकारी के मुताबिक, वजीरगंज की रहने वाली सदफ फातिमा (45) HDFC बैंक की गोमतीनगर की विभूतिखंड ब्रांच में एडिशनल डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट के पद पर तैनात थीं। 24 सितंबर दोपहर करीब 3 बजे जब वो ऑफिस में काम कर रही थीं, तभी अचानक बेहोश होकर गिर गईं। ऑफिस के कर्मचारी तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।

काम को तनाव में रहती थीं!

ऑफिस के कर्मचारियों का कहना है कि, काम को लेकर काफी प्रेशर था और इसी वजह से वह तनाव में रहती थीं। हालांकि, मामले में कोई ऑफिशियल बात करने को तैयार नहीं है। कोई भी कर्मचारी इस केस पर बात नहीं करना चाहता। उनका कहना है कि सब कुछ मुंबई से मैनेज होता है।

हार्ट अटैक की संभावना

इंस्पेक्टर विभूतिखंड सुनील सिंह ने कहा कि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की वजह पता चल पाएगी। प्रारंभिक जांच में हार्ट अटैक की बात सामने आ रही है। एक रिश्तेदार के मुताबिक, सदफ फातिमा की दवा चल रही थी। वहीं परिजनों ने अभी तक कोई शिकायती आवेदन नहीं दिया है।

सपा अध्यक्ष ने BJP पर साधा निशाना

सपा अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा- लखनऊ में काम के दबाव और तनाव के कारण HDFC की एक महिलाकर्मी की ऑफिस में ही, कुर्सी से गिरकर, मृत्यु का समाचार बेहद चिंतनीय है। ऐसे समाचार देश में वर्तमान अर्थव्यवस्था के दबाव के प्रतीक हैं।

इस संदर्भ में सभी कंपनियों और सरकारी विभागों तक को गंभीरता से सोचना होगा। ये देश के मानव संसाधन की अपूरणीय हानि है। ऐसे आकस्मिक निधन काम के हालातों को सवालों के घेरे में ले आते हैं। किसी भी देश की असली तरक़्क़ी का पैमाना सेवा या उत्पाद के आंकड़े का बढ़ना नहीं होता बल्कि ये होता है कि व्यक्ति मानसिक रूप से कितना स्वतंत्र, स्वस्थ व प्रसन्न है।

भाजपा सरकार की नाकाम आर्थिक नीतियों के कारण कंपनियों का काम-कारोबार इतना घट गया है कि अपने व्यापार-व्यवसाय को बचाने के लिए वो कम लोगों से कई गुना काम करवाती हैं। ऐसी आकस्मिक मृत्यु के लिए जितनी भाजपा सरकार ज़िम्मेदार है उतने ही जनमानस को मानसिक रूप से हतोत्साहित करने वाले भाजपाइयों के बयान भी।

इस समस्या से उबरने के लिए कंपनियों और सरकारी विभागों को ‘तत्काल सुधार’ के लिए सक्रिय और सार्थक प्रयास करने चाहिए।

वर्कलोड ले रहा जान!

हाल ही में पुणे में काम करने वाली एक 26 साल की चार्टर्ड अकाउंटेंट की कथित तौर पर ज्यादा वर्कलोड की वजह से असामयिक मौत हो गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) के मुताबिक, 2016 में लंबे समय तक काम करने की वजह से स्ट्रोक और कोरोनरी हार्ट डिजीज से 7,45,000 लोगों की मौत हुई, जो वर्ष 2000 की तुलना में 29% ज्यादा है। स्टडी के मुताबिक, 35-40 घंटे काम करने की तुलना में हर हफ्ते 55 या इससे ज्यादा घंटे काम करने से स्ट्रोक का खतरा 35% और कोरोनरी हार्ट डिजीज से मौत का खतरा 17% बढ़ जाता है।

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