लव जिहाद फंडिंग केस में फरार कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी ने किया सरेंडर, कोर्ट परिसर में लोगों ने की पीटने की कोशिश

इंदौर। शहर के बहुचर्चित लव जिहाद फंडिग मामले में तीन माह से फरार चल रहे आरोपी कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। पुलिस द्वारा मामले में पूछताछ के लिए 8 दिन की डिमांड मांगी गई है।
लव जिहाद फंडिंग मामले में आरोपी कादरी पर 20,000 रुपए का इनाम घोषित था और पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही थी। कोर्ट में पेशी के दौरान जब वह पुलिस की सुरक्षा घेरे में पहुंचा, तो वहां मौजूद लोगों का गुस्सा भड़क उठा। भीड़ ने उसकी ओर बढ़कर मारपीट की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे सुरक्षित कोर्ट कक्ष तक पहुंचा दिया।
छिपने के लिए बदली शक्ल
अनवर कादरी तीन माह से फरार था और पुलिस उसकी तलाश में दिल्ली सहित कई स्थानों पर छापेमारी कर चुकी थी। पेशी के लिए वह दाढ़ी-मूंछ कटवाकर कोर्ट पहुंचा, ताकि पहचान से बच सके। इस बीच, इसी मामले में कादरी की बेटी आयशा को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था, हालांकि उसे बाद में जमानत मिल गई थी।
आरोपियों ने लिया कादरी का नाम
बाणगंगा थाना क्षेत्र में करीब दो माह पहले दर्ज हुए एक मामले में दो युवकों पर दो युवतियों से रेप और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगा था। जांच के दौरान सामने आए वीडियो में दोनों आरोपियों ने कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी का नाम लिया था। आरोप है कि कादरी ने युवकों को लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने के लिए एक लाख रुपए और निकाह कराने पर दो लाख रुपए देने का ऑफर दिया था। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कादरी का नाम एफआईआर में जोड़ा था।
फर्जी पहचान बनाकर फंसाते थे लड़कियां
आरोपी साहिल शेख और अल्ताफ ने सोशल मीडिया पर फर्जी हिंदू नामों जैसे ‘अर्जुन’ और ‘राज’ से आईडी बनाकर युवतियों से दोस्ती की। मोबाइल की जांच में यह साफ हुआ कि वे युवतियों को बहलाकर मुलाकात के लिए बुलाते और फिर शादी व धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालते थे। इसी नेटवर्क में अनवर कादरी की भूमिका भी सामने आई।
पार्षद पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू
अनवर कादरी को पार्षद पद से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। महापौर परिषद ने इस पर सहमति देते हुए नगर निगम कमिश्नर दीपक सिंह को शोकॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था। नोटिस में कादरी से 25 अगस्त तक जवाब मांगा गया था, लेकिन नोटिस की समय सीमा पूरी होने से पहले ही वह कोर्ट में पेश हो गया।
‘डकैत’ नाम से पहचान
अनवर कादरी की आपराधिक पृष्ठभूमि लंबी रही है। 1996 में उज्जैन के महाकाल थाने में दर्ज एक डकैती केस के बाद उसे ‘अनवर डकैत’ नाम से जाना जाने लगा। 2009 में इंदौर में गवाही देने वाले एक व्यक्ति पर हमले के मामले में भी कादरी और उसके साथियों को गिरफ्तार किया गया था। 2011 में इस मामले में अदालत ने उसे एक साल की सजा सुनाई थी। पुलिस ने उसके पास से पिस्तौल, कट्टा, तलवार और चाकू भी बरामद किए थे।
कांग्रेस की सियासत में रहा प्रभाव
अनवर कादरी तीन बार कांग्रेस से पार्षद रह चुका है और उसकी पत्नी भी दो बार पार्षद रह चुकी है। प्रमोद टंडन के शहर कांग्रेस अध्यक्ष रहने के दौरान कादरी को शहर कांग्रेस का महामंत्री नियुक्त किया गया था। उसने एक बार निर्दलीय चुनाव भी लड़ा।





















