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सोहागपुर :त्रैलोक्य की राजधानी था कभी सोहागपुर, शिवपुराण में मिलता है शोणितपुर का उल्लेख

भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव के युद्ध तथा बाणासुर की कथा से जुड़ा है नगर का पौराणिक इतिहास
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त्रैलोक्य की राजधानी था कभी सोहागपुर, शिवपुराण में मिलता है शोणितपुर का उल्लेख
सोहागपुर

सोहागपुरसोहागपुर का प्राचीन नाम शोणितपुर माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं एवं शिवपुराण में वर्णित कथा के अनुसार यह नगर परम शिवभक्त असुरराज बाणासुर की राजधानी था। कहा जाता है कि भगवान शिव से वरदान प्राप्त कर बाणासुर ने त्रिलोकी के अनेक शासकों को परास्त किया और शोणितपुर को अपनी राजधानी बनाया।

कथा के अनुसार बाणासुर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। उसने भगवान शिव से अपने पुत्रों और गणों सहित शोणितपुर में नगराध्यक्ष के रूप में निवास करने का आग्रह किया, जिसे भगवान शिव ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद भगवान शिव लंबे समय तक इस नगरी में विराजमान रहे।

बाणासुर ने भगवान शिव से की थी खास प्रर्थना

बताया जाता है कि एक अवसर पर बाणासुर ने अपने हजार हाथों से तांडव करते हुए भगवान शिव को पुनः प्रसन्न किया और उनसे कहा कि अब उसके समान कोई बलशाली योद्धा नहीं बचा है। उसने भगवान शिव से अपनी हजार भुजाओं का अभिमान समाप्त कराने की प्रार्थना की। भगवान शिव उसके अहंकार को समझ गए और उसे ऐसा वरदान दिया कि समय आने पर उसकी इच्छा पूरी होगी।

इसी बीच भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध और बाणासुर की पुत्री उषा के प्रसंग के कारण भगवान श्रीकृष्ण को शोणितपुर पर चढ़ाई करनी पड़ी। अपने भक्त बाणासुर की रक्षा के लिए भगवान शिव स्वयं उसके पक्ष में युद्धभूमि में उतरे। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव के बीच भीषण युद्ध हुआ।

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श्रीकृष्ण ने क्या आग्रह किया था?

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने भगवान शिव से निवेदन किया कि वे तो उनके ही वरदान और शाप के अनुसार बाणासुर का अभिमान दूर करने आए हैं। तब भगवान शिव ने श्रीकृष्ण को "जृम्भणास्त्र" का प्रयोग कर उन्हें जृम्भित (निद्रालु एवं निष्क्रिय) करने का उपाय बताया। श्रीकृष्ण ने ऐसा ही किया और इसके बाद बाणासुर की हजार भुजाओं में से चार को छोड़कर शेष सभी भुजाएं काट दीं। जब श्रीकृष्ण उसका सिर काटने लगे तो भगवान शिव ने हस्तक्षेप कर बाणासुर का जीवनदान कराया। इसके पश्चात राजकुमारी उषा का विवाह अनिरुद्ध के साथ संपन्न हुआ। मान्यता है कि विवाह के उपरांत भगवान श्रीकृष्ण कुछ समय तक शोणितपुर में रहे और बाद में बाणासुर ने उन्हें सम्मानपूर्वक दान-दहेज सहित विदा किया। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार सोहागपुर में स्थापित भगवान शिव-पार्वती की प्राचीन दुर्लभ पाषाण प्रतिमा भी इस पौराणिक परंपरा की स्मृतियों से जुड़ी मानी जाती है।

Edited By : Aakash Waghmare

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

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