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पति, बच्चों, घर-द्वार और अपना राज्य छोड़कर भोपाल में आसरा

103 साल की गयाबाई का भी यहीं आशियाना, प्रति व्यक्ति 2200 रुपए सामाजिक न्याय विभाग देता है राशि
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पति, बच्चों, घर-द्वार और अपना राज्य छोड़कर भोपाल में आसरा

पुष्पेन्द्र सिंह-भोपाल । शुक्रवार 25 अक्टूबर  भोपाल के शाहजहांनाबाद स्थित ‘आसरा’ नाम से संचालित वृद्धजन सेवा आश्रम में दोपहर साढ़े बारह बजे बुजुर्ग महिला और पुरुष एक साथ कुर्सी - टेबल पर भोजन कर रहे हैं। इस भोजन की व्यवस्था बैशाली नगर निवासी दीप्ति निगम ने अपने ससुर की पहली पुण्यतिथि पर की है। आश्रम में 100 बुजुर्गों के रहने की क्षमता है लेकिन 40 महिला और 35 पुरुष हैं। वृद्ध आश्रम के संचालन का भार सामाजिक न्याय विभाग उठा रहा है। प्रति व्यक्ति 2,200 रुपए के मान से उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रदेश में संचालित कुल 79 में 11 आश्रम सरकारी भवनों में हैं। बाकी वृद्धाश्रम किराये के या स्वयं के हैं। इनमें करीब 3000 बुजुर्ग आसरा पा रहे हैं।

47 साल पहले हो गई अकेले, ‘आसरा’ ही मेरा घर

जयपुर निवासी कृष्णा तिवारी ने 47 साल पहले (1 अप्रैल 1977) पति, बच्चे, परिवार सब छोड़ दिया। 18 साल दिल्ली में भाई के यहां रही और 26 साल जयपुर में एक वकील के यहां घर का काम किया। भोपाल में 7 माह से हैं। वे कहती हैं यहां किसी चीज की कमी नहीं है। हार्ट की बीमारी है, अकेले रहूंगी तो लाश सड़ जाएगी। इसलिए देहदान कर दिया है। मेरी पोती की शादी हो गई है उसके दो बच्चे हैं। यहां किसी को चिढ़ाती हूं, हंसाती हूं और गुदगुदाती हूं।

होंठों से छू लो तुम.. गीत गुनगुनाते हैं

71 साल के एडवोकेट विजय कुमार फ्रांसिस बताते हैं कि नागपुर हाईकोर्ट में प्रेक्टिस करता थे। एक दत्तक पुत्री की शादी गुजरात में की है। रामनगर में रिश्तेदार के यहां नहीं रह पाए, आसरा आ गए कब उसकी बेटी गुजरात से आए और ले जाए। होठों से छू लो....गुनगुनाकर दिल बहलाते हैं।

बच्चों का जिक्र होते ही डबडबा गईं आंखें

भोपाल निवासी 75 वर्षीय जमुना बाई 6 साल से आसरा केंद्र में हैं। उनकी चार लड़की और एक लड़का है। उनका कहना है कि वे किसी बच्चे के पास नहीं रहती, यह कहते ही उनकी आंखें डबडबा जाती हैं। आंसू भरी आंखों से वे कहती हैं कि बच्चे कभी कभार मिलने चोरी से आते हैं।

बुजुर्गों के बीच आकर अच्छा लगता है

दीप्ति निगम वैशाली नगर भोपाल से पति और बच्चे के साथ अपने ससुर की पहली पुण्यतिथि पर बुजुर्गों को भोजन कराने आई हैं। वह कहती हैं बड़े बुजुर्गों के साथ कुछ घंटे बिताना अच्छा लगता है। यहां पर 103 साल की गया बाई भी रहती हैं। उनसे बात करके दिल का सुकून मिलता है।

हालात ये भी... बिछाने ओढ़ने के लिए एक चादर

एक ऐसा वार्ड जहां चलने-फिरने में लाचार बुजुर्ग रहते हैं। यहां पलंग में बिछाने और ओढ़ने के लिए एक ही चादर दिखा। गंदगी इसलिए कि बुजुर्गों का पाखाना और पेशाब वहीं होता है। वहीं महिला वार्ड की छत बहुत पुरानी चादरों की है। बारिश के पानी से दीवारों में सीलन है।

डॉ.आरआर भोसले, आयुक्त, सामाजिक न्याय

  • सवाल- क्या प्रदेश में नए वृद्ध आश्रम खोले जाएंगे।
  • जवाब- सात और जिलों में नए वृद्ध आश्रम प्रारंभ करने का प्रपोजल है।
  • सवाल- सर्वसुविधायुक्त आश्रम बनेगा?
  • जवाब- भोपाल में 24 करोड़से तैयार हो चुका है। यह ओल्डऐज होम देश का सबसे पहला होगा।
  • सवाल-आसरा में बहुत कमियां हैं।
  • जवाब- जल्द ही विजिट करके सभी कमियां दूर की जाएंगी।
People's Reporter
By People's Reporter

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