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सीएम ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़े ‘नीरा’ और ‘व्योम’ चीते, कहा-इनका मानव से संघर्ष नहीं होता

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों ‘व्योम’ और ‘नीरा’ को छोड़ा। चीतों के लिए मुहली रेंज में 5 बोमा तैयार किए गए हैं। सरकार बफर जोन के गांवों में होम-स्टे और स्थानीय ग्रामीणों की पर्यटन में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है।
सीएम ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़े ‘नीरा’ और ‘व्योम’ चीते, कहा-इनका मानव से संघर्ष नहीं होता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीते रिलीज किए।

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों व्योम और नीरा को छोड़ा। दोनों कूनो नेशनल पार्क से लाए गए हैं। इनके लिए मुहली रेंज में 5 बोमा तैयार किए गए हैं। चीतों की सुरक्षा के लिए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष इंतजाम किए गए हैं। वन विभाग उनकी निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा-चीतों का कभी किसी मनुष्य से संघर्ष नहीं होता है। वे बहुत आराम से रहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपनी ओर से आज दो चीते छोड़ रहा हूं, लेकिन अगले महीने वापस दो लेकर के आएंगे। यह चार अपना परिवार बढ़ाएंगे। यह आबाद करेंगे।

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बफर जोन के गांवों में होम-स्टे विकसित किए जा रहे हैं 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  कहा कि प्रदेश में जहां-जहां अभयारण्य हैं, वहां पर्यटन से होने वाली आय में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। बफर जोन के गांवों में होम-स्टे विकसित किए जा रहे हैं। ग्रामीणों को होम-स्टे विकसित करने के लिए सरकार की ओर से अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।

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वन्यप्राणियों में समृद्ध है अपना मप्र

मुख्यमंत्री ने कहा- देश में सबसे ज्यादा गिद्ध मध्यप्रदेश में हैं। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। देश में सबसे ज्यादा टाइगर भी अपने ही राज्य में हैं। ऐसे ही चंबल में घड़ियाल, नर्मदा, मां नर्मदा की कथा और मां नर्मदा का महत्व सबको मालूम है। कार्यक्रम में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि चीतों का आना केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है। इससे सागर और बुंदेलखंड में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने मुहली में गाइड के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोलने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवा अलग-अलग भाषाएं सीखकर गाइड बन सकेंगे।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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