Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

कुबेरेश्वर धाम में भगदड़ : धक्का-मुक्की के बीच दो की मौत, एक गंभीर घायल, कांवड़ यात्रा से एक दिन पहले टूटी व्यवस्थाएं

कुबेरेश्वर धाम में भगदड़ : धक्का-मुक्की के बीच दो की मौत, एक गंभीर घायल, कांवड़ यात्रा से एक दिन पहले टूटी व्यवस्थाएं
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    सीहोर जिले के प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में मंगलवार को कांवड़ यात्रा से पहले दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ के चलते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। धक्का-मुक्की में दबने से दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है। यह हादसा उस समय हुआ जब श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती चली गई और व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गईं।

    यह घटना ऐसे समय में हुई जब बुधवार को पं. प्रदीप मिश्रा की अगुवाई में कुबेरेश्वर से चितावलिया हेमा गांव तक कांवड़ यात्रा आयोजित होनी है, जिसके लिए देशभर से हजारों श्रद्धालु पहले ही कुबेरेश्वर धाम पहुंच चुके हैं।

    भीड़ बढ़ने से मची अफरा-तफरी

    मंगलवार को जैसे-जैसे दिन चढ़ा, कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। दर्शन, भंडारे और रुकने की जगहों पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि जगह-जगह भगदड़ जैसा माहौल बन गया। इसी अफरा-तफरी में दो श्रद्धालु नीचे गिर गए और भारी भीड़ में दबकर उनकी मौके पर ही मौत हो गई। एक अन्य श्रद्धालु को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

    कांवड़ यात्रा से पहले ही टूट गईं व्यवस्थाएं

    6 अगस्त को आयोजित कांवड़ यात्रा के लिए प्रशासन और आयोजकों ने दावा किया था कि 4 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए नमक चौराहा, राधेश्याम कॉलोनी, बजरंग अखाड़ा, अटल पार्क, शास्त्री स्कूल, लुर्द माता स्कूल और सीवन नदी के पास ठहरने की व्यवस्था की गई है।

    पूरे सावन मास के लिए भंडारा, जल व्यवस्था और दर्शन व्यवस्था के व्यापक इंतजामों की बात भी कही गई थी। लेकिन एक दिन पहले ही बढ़ती भीड़ ने सारे दावों को धराशायी कर दिया।

     डायवर्जन प्लान लागू नहीं हुआ

    सीहोर एसपी दीपक शुक्ला ने जानकारी दी थी कि 5 अगस्त रात 12 बजे से लेकर 6 अगस्त रात 11 बजे तक डायवर्जन और पार्किंग प्लान लागू होगा। भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने और छोटे वाहनों को न्यू क्रिसेंट चौराहा से अमलाहा होते हुए डायवर्ट करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन हादसे के समय तक यह ट्रैफिक प्लान जमीन पर लागू नहीं हो सका, जिससे यातायात और भीड़ नियंत्रण की पूरी व्यवस्था फेल हो गई।

    सवालों के घेरे में आयोजन और प्रशासन

    इस हादसे ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    •         जब आयोजन की तारीख पहले से तय थी, तो सुरक्षा और नियंत्रण व्यवस्था समय से क्यों लागू नहीं की         गई?
    •        भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल और वालंटियर क्यों नहीं तैनात किए गए?
    •        भीड़भाड़ के पूर्वानुमान के बावजूद ठहराव और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था अपर्याप्त क्यों रही?

    हादसे के बाद धाम परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और प्रशासन अब कंट्रोल रूम के माध्यम से निगरानी कर रहा है। मृतकों की पहचान और परिजनों की तलाश की जा रही है। वहीं, आयोजकों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    ये भी पढ़ें: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भोपाल के वन विहार पहुंची बाघिन, तीन महीने की निगरानी के बाद लिया फैसला

     

    Vaishnavi Mavar
    By Vaishnavi Mavar

    Latest Posts