Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

Peoples Update Special :भोपाल में दीदी के शेल्टर होम का कमाल... 11 मील इलाके में गलियों के कुत्तों ने काटना छोड़ा

राजधानी के 11 मील इलाके में पिछले वर्ष के मुकाबले डॉग बाइट की घटनाएं कम हो गईं। इस क्षेत्र में स्ट्रीट डॉग्स वाली दीदी 'नीति खरे' ने कुत्तों की परवाह की तो उन्होंने लोगों को काटना छोड़ दिया। नीति ने डॉग्स के लिए अब तक 200 से ज्यादा हट्स बनवाई हैं।  
Follow on Google News
भोपाल में दीदी के शेल्टर होम का कमाल... 11 मील इलाके में गलियों के कुत्तों ने काटना छोड़ा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ब्रजेंद्र वर्मा, भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में डॉग बाइट को लेकर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में होगा, यह कोई नहीं जान सकता। नगरीय निकायों से नियमों का सख्ती से पालन कराएं जिससे डॉग बाइट की घटनाएं न हों। भोपाल में साल 2025 में 6 हजार से ज्यादा डॉग बाइट की घटनाएं हुई हैं। इनमें से सबसे ज्यादा बाणगंगा में 523, करोंद में 350 घटनाएं हुर्इं। वहीं 2024 में राजधानी में नर्मदापुरम रोड पर 11 मील क्षेत्र में डॉग बाइट का आंकड़ा 100 से भी कम था। 2024 में यह 135 था। ये संभव हुआ है पशु प्रेमी (स्ट्रीट डॉग्स वाली दीदी) नीति खरे के प्रयास से। ये न सिर्फ डॉग्स का खाना पानी देती हैं, बल्कि उनके लिए हट्स भी बनाती हैं।

    Uploaded media

    डॉग हट्स में रजाई-गद्दे भी

    11 मील निवासी समाज सेविका व पशु प्रेमी नीति खरे कई सालों से डॉग्स को लेकर काम कर रही हैं पर शहर में डॉग बाइट की घटनाएं रोकने नीति ने एक मुहिम छेड़ी है। स्ट्रीट डॉग्स की ठंड से मौत न हों इसलिए वे 200 हट्स बन चुकी हैं। इनमें रजाई-गद्दे की भी व्यवस्था है। वहीं डॉग्स के लिए खाने की व्यवस्था भी कर रही हैं।

    50 बच्चे अपने-अपने घर से लाते हैं खाना

    नीति खरे की इस पहल से आसपास के 8 से 16 साल के 50 बच्चे जुड़ चुके हैं, जो नीति खरे को स्ट्रीट डॉग्स वाली दीदी कहकर बुलाते हैं। बच्चे स्कूल की पढ़ाई-लिखाई से थोड़ा-थोड़ा समय चुराकर बेजुबानों का ध्यान रख रहे हैं। स्ट्रीट डॉग्स के लिए अपने-अपने घरों से खाना लाते हैं, ताकि डॉग्स भूखे न रहें। नीति खरे हर साल अपने खर्चे पर 25 से 30 स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी भी कराती हैं।

    हर माह अपनी जेब से खर्च करती हैं 25 हजार रुपए

    नीति खरे ने स्ट्रीट डॉग्स की मदद करने के लिए साल 2024 में एक निजी स्कूल से प्राचार्य की अपनी नौकरी छोड़ दी। हर महीने 20 से 25 हजार रुपए स्ट्रीट डॉग्स की सेवा करने में खर्च करती हैं। उनके घर में 5 से 6 स्ट्रीट डॉग्स रहते हैं। इस काम में उनके पति शैलेष आर्थिक रूप से मदद करते हैं। वो विदेश में नौकरी करते हैं। नीति खरे बताती हैं कि जिस तरह इंसान का व्यवहार बदल रहा है, उसी तरह स्ट्रीट डॉग्स का व्यवहार भी बदल रहा है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

    Latest Posts