केन-बेतवा लिंक परियोजना पर हाईकोर्ट सख्त, CEC रिपोर्ट पेश करने के निर्देश; 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई

जबलपुर। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। याचिका में परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व और वन क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले में केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार से रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी के साथ तीन बिंदुओं पर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव पर सवाल
जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी की ओर से दायर याचिका में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा और बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का असर वन क्षेत्र पर पड़ेगा।
परियोजना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार दाऊधन बांध के जलाशय से करीब 9,000 हेक्टेयर क्षेत्र के डूब क्षेत्र में आने की जानकारी दी गई है, जिसमें 5,761 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। परियोजना प्राधिकरण के मुताबिक पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया 22 गांवों और 5,075 प्रभावित परिवारों से जुड़ी है।
छतरपुर में विरोध का भी याचिका में जिक्र
याचिका में छतरपुर जिले में परियोजना के विरोध में आदिवासी और किसानों के आंदोलन का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों ने अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज कराया है। याचिका में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि आंदोलनकारियों पर प्रशासनिक दबाव बनाया गया और कुछ गांवों में राशन, पानी तथा अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति और आवाजाही को प्रभावित किया गया। इन आरोपों पर सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष रखा।
CEC रिपोर्ट को लेकर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी पूछा है कि रिपोर्ट में किन अनियमितताओं या आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। दरअसल, केंद्र सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार CEC ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केन-बेतवा परियोजना की वन्यजीव मंजूरी की जांच की थी और 30 अगस्त 2019 को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी। इस रिपोर्ट में पन्ना टाइगर रिजर्व पर परियोजना के संभावित प्रतिकूल प्रभावों से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई की भी मांगी जानकारी
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी बताने को कहा है कि केन-बेतवा परियोजना से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में किस स्थिति में है। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार से पूछा गया है कि CEC की रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार की ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान क्रमश: एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित रहे। अब मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
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परियोजना को लेकर सरकार का पक्ष
केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण के अनुसार यह परियोजना बुंदेलखंड में पानी की कमी और सिंचाई की समस्या को कम करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। सरकार के मुताबिक परियोजना के साथ पर्यावरण प्रबंधन, प्रतिपूरक वनीकरण, वन्यजीव संरक्षण और Greater Panna Landscape के लिए Integrated Landscape Management Plan जैसे उपाय भी लागू किए जा रहे हैं।




















