7 साल से नहीं मिली 11 महीने की सैलरी, MP हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान; मिशन डायरेक्टर को 7 दिन का अल्टीमेटम

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में 7 साल से अपनी 11 महीने की सैलरी का इंतजार कर रही महिला की परेशानी पर MP हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जबलपुर हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा कि जब याचिकाकर्ता ने सेवाएं दी हैं, तो उसे उसका वेतन मिलना चाहिए। कोर्ट ने नेशनल हेल्थ मिशन के डायरेक्टर को 7 दिनों के भीतर बकाया वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
2019 में नौकरी से हटाई गई थी महिला
मामला उमरिया जिले के नौरोजाबाद के वार्ड नंबर 12 की रहने वाली मेहजबी बेगम से जुड़ा है। याचिका के मुताबिक, मेहजबी बेगम ने नेशनल हेल्थ मिशन में अस्थाई एएनएम के तौर पर सेवाएं दी थीं। बताया गया कि 27 फरवरी 2019 को पाली के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ने उन्हें पद से हटा दिया था। इससे पहले अप्रैल 2018 से फरवरी 2019 तक का वेतन उन्हें नहीं मिला था।
आवेदन के बाद भी नहीं मिली सैलरी
याचिका में कहा गया कि बकाया वेतन के भुगतान के लिए महिला ने संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए, लेकिन इसके बावजूद उसे करीब 11 महीने की सैलरी नहीं मिली। वेतन नहीं मिलने के बाद मेहजबी बेगम ने वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने मिशन डायरेक्टर को दिया 7 दिन का समय
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौरव माहेश्वरी ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने नेशनल हेल्थ मिशन के डायरेक्टर को 7 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के बकाया वेतन का भुगतान कराने का निर्देश दिया है।
भुगतान नहीं हुआ तो कोर्ट में पेश होना पड़ेगा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि अगर तय समय में महिला के वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में मिशन डायरेक्टर को खुद अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट की इस सख्ती के बाद करीब 7 साल से अपने बकाया वेतन का इंतजार कर रही महिला को अब भुगतान मिलने की उम्मीद जगी है।




















