फिल्म इंडस्ट्री में छाया मातम!मशहूर एक्टर-डायरेक्टर के. भाग्यराज का निधन, फैंस को लगा बड़ा झटका

एंटरटेनमेंट डेस्क। तमिल फिल्म इंडस्ट्री से बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर अभिनेता, निर्देशक, लेखक और स्क्रीनप्ले राइटर के. भाग्यराज का 73 साल की उम्र में निधन हो गया। 27 जून को उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। उनके निधन की खबर से पूरे साउथ फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती
जानकारी के अनुसार, शनिवार को के. भाग्यराज की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें सीने में तेज दर्द महसूस हुआ, जिसके बाद परिवार के लोग उन्हें तुरंत अपोलो अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन उन्हें कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट (Cardiopulmonary Arrest) आया। काफी कोशिशों के बाद भी डॉक्टर उन्हें दोबारा होश में नहीं ला सके और उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार, निर्देशक और उनके चाहने वालों में दुख का माहौल छा गया।
करीब पांच दशकों तक तमिल सिनेमा पर छोड़ी छाप
के. भाग्यराज ने लगभग 50 साल तक तमिल फिल्म इंडस्ट्री में शानदार काम किया। उन्होंने अपनी बेहतरीन एक्टिंग, दमदार निर्देशन और शानदार कहानी लिखने की कला से लाखों लोगों का दिल जीता। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने 75 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया और 25 से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी कई फिल्में आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में गिनी जाती हैं।
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इन सुपरहिट फिल्मों से मिली पहचान
के. भाग्यराज ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में दीं, जिन्हें आज भी क्लासिक माना जाता है। उनकी कुछ सबसे लोकप्रिय फिल्मों में शामिल हैं- मुंधनाई मुदिचू, अंधा 7 नाटकाल और चिन्ना वीदु। इन फिल्मों की कहानी, निर्देशन और स्क्रीनप्ले को लोगों ने खूब पसंद किया। यही वजह रही कि उनकी कई फिल्मों का हिंदी, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में भी रीमेक बनाया गया।
'स्क्रीनप्ले के बादशाह' के नाम से थे मशहूर
के. भाग्यराज को भारतीय सिनेमा में "स्क्रीनप्ले का बादशाह" कहा जाता था। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत उनकी मजबूत कहानी और शानदार स्क्रीनप्ले होती थी। उन्होंने कई ऐसी कहानियां लिखीं, जो दर्शकों को शुरू से आखिर तक बांधे रखती थीं। उनकी लिखी फिल्मों को अलग-अलग भाषाओं में दोबारा बनाया गया और उन्हें हर जगह सफलता मिली।
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ऐसे शुरू हुआ था फिल्मी सफर
के. भाग्यराज ने अपने करियर की शुरुआत साल 1977 में की थी। उन्होंने मशहूर तमिल फिल्म '16 वयथिनिले' में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अभिनय, लेखन और निर्देशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। मेहनत और प्रतिभा के दम पर उन्होंने खुद को तमिल सिनेमा के सबसे सफल कलाकारों में शामिल किया।
परिवार में कौन-कौन हैं?
के. भाग्यराज अपने पीछे अपना परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी पूर्णिमा भाग्यराज, बेटा शांतनु भाग्यराज और बेटी सरन्या भाग्यराज हैं। उनके बेटे शांतनु भी तमिल फिल्मों में अभिनेता के रूप में काम कर चुके हैं। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय है और फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर
के. भाग्यराज के निधन की खबर सामने आते ही तमिल सिनेमा सहित पूरे भारतीय फिल्म जगत में शोक की लहर फैल गई। कई कलाकारों, निर्देशकों और उनके प्रशंसकों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी। हर कोई उनके योगदान को याद कर रहा है। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने काम से भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी और स्क्रीनप्ले लिखने की कला को एक अलग पहचान दिलाई।











