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बाइक पर मगरमच्छ ले जाने का वीडियो वायरल, जबलपुर में वन विभाग की रेस्क्यू व्यवस्था पर उठे सवाल

जबलपुर के पनागर इलाके में मगरमच्छ के रेस्क्यू का वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। करीब 4 से 5 फीट लंबे मगरमच्छ को रेस्क्यू वाहन के बजाय बाइक से ले जाने का दावा किया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद वन्यजीव की सुरक्षा और रेस्क्यू टीम की निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
 बाइक पर मगरमच्छ ले जाने का वीडियो वायरल, जबलपुर में वन विभाग की रेस्क्यू व्यवस्था पर उठे सवाल
बाइक से मगरमच्छ ले जाने का वीडियो वायरल

जबलपुर। जबलपुर के पनागर वन परिक्षेत्र में मगरमच्छ के रेस्क्यू से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में करीब 4 से 5 फीट लंबे मगरमच्छ को बाइक से ले जाते हुए दिखाया गया है। बताया जा रहा है कि यह मगरमच्छ द्वारिका परिसर में दिखाई दिया था, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने कई दिनों की कोशिश के बाद 11 सितंबर को उसका रेस्क्यू किया। वीडियो सामने आने के बाद विभाग की रेस्क्यू प्रक्रिया और अधिकारियों की निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वन विभाग का कहना है कि मगरमच्छ को सुरक्षित पानी में छोड़ दिया गया था।

सात दिन की कोशिश के बाद पकड़ा गया मगरमच्छ

पनागर वन परिक्षेत्र के द्वारिका परिसर में मगरमच्छ दिखाई देने के बाद उसे पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम लगातार प्रयास कर रही थी। जानकारी के मुताबिक करीब सात दिनों तक टीम ने मगरमच्छ को पकड़ने की कोशिश की। आखिरकार 11 सितंबर को उसे सुरक्षित पकड़ लिया गया। रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी दौरान सामने आए एक वीडियो ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया। वीडियो में मगरमच्छ को रेस्क्यू वाहन की जगह बाइक से ले जाते हुए दिखाए जाने का दावा किया जा रहा है।

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वीडियो वायरल हुआ तो उठे कई सवाल

सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि वन्यजीव को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए किस तरह की व्यवस्था की गई थी। वन्यजीव रेस्क्यू के दौरान उसकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में मगरमच्छ को ले जाने के तरीके को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, वीडियो के आधार पर पूरी रेस्क्यू प्रक्रिया पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

छोटे मगरमच्छ को जल्द छोड़ना जरूरी

बताया गया है कि नियमों के अनुसार 10 फीट से कम लंबाई वाले जलीय जीव को रेस्क्यू के बाद जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाना चाहिए। इस दौरान यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि वन्यजीव को अनावश्यक तनाव न हो। रेस्क्यू के समय मगरमच्छ के मुंह और शरीर को तय गाइडलाइन के अनुसार सुरक्षित रखना भी जरूरी होता है। इसके साथ ही उसे ले जाने के लिए उचित साधन और सुरक्षित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि जानवर और रेस्क्यू टीम दोनों को किसी तरह का खतरा न हो।

वन विभाग ने क्या कहा?

जबलपुर डीएफओ पुनीत सोनकर के मुताबिक मगरमच्छ छोटा था और रेस्क्यू के बाद उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ना जरूरी था। उन्होंने कहा कि कार्रवाई जैसी कोई बात नहीं है और मगरमच्छ को पानी में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। विभाग का कहना है कि तड़के रेस्क्यू के दौरान उपलब्ध वाहन और परिस्थितियों को देखते हुए रेंजर ने निर्णय लिया होगा। अधिकारियों के मुताबिक मुख्य उद्देश्य मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक स्थान तक पहुंचाना था।

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निगरानी व्यवस्था पर भी नजर

वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ मगरमच्छ को ले जाने के तरीके तक सीमित नहीं हैं। वन विभाग की रेस्क्यू टीम के काम की निगरानी और मौके पर मौजूद अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा हो रही है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर हर साल बड़ी राशि खर्च की जाती है। ऐसे में रेस्क्यू के दौरान तय सुरक्षा नियमों का पालन होना जरूरी है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर वन्यजीव रेस्क्यू के दौरान संसाधनों, निगरानी और व्यवस्था को लेकर ध्यान खींचा है।

EDIT BY: ADITI RAWAT

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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