कल NGT में भोपाल की बड़ी, छोटी झील और कलियासोत की रिपोर्ट होगी पेश

भोपाल। बारिश में केरवा डैम का जल स्तर मेंटेन नहीं किया जा रहा है । इससे डैम का वैज्ञानिक सर्वे नहीं हो सका। क्या संबंधित अधिकारियों ने यह जान बूझकर किया? जिससे डैम के कैचमेंट एरिया में जिन रसूखदारों ने अतिक्रमण किए हैं, वो बच जाए। यह सब बात मंगलवार को नेशनल ग्रीन टि्रब्यूलन (NGT) की सुनवाई में मंगलवार को सर्वे टीम के सदस्य व वरिष्ठ पर्यावरणविद् सुभाष सी पांडेय और राशिद नूर रखेंगे। वहीं टीम की ओर से 5 से 9 सितंबर तक किए गए बड़ी झील,छोटी झील व कलियासोत डैम के वैज्ञानिक सर्वे व ग्राउंड ट्रूथिंग की रिपोर्ट भी पेश करेंगे। इसके बाद एनजीटी की तरफ से जो आदेश मिलेगा,उस आधार पर वाटर बॉडीज के जल भराव वाले क्षेत्रों में साल 2017 से हुए अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे सभी अतिक्रमण हटाए जाएंगे, जिनके कारण वाटर बॉडीज के एफटीएल व कैचमेंट एरिया में पानी के फैलाव को रोक रहे हैं।
सर्वे में आ चुके हैं कई अतिक्रमण, जो पानी के फैलाव को रोक रहे हैं
पांच दिन के बड़ी झील,छोटी झील व कलियासोत डैम के सर्वे में कई अतिक्रमण आ चुके हैं। इन अतिक्रमणों की ड्रोन से फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी की गई है। इसमें सभी तरह के अतिक्रमण रिकॉर्ड हो गए हैं। बड़ी झील के शहरी क्षेत्र में 50 मीटर के दायर में बड़ी संख्या में मकान,बंगले,झुग्गियां,बाउंड्रीवॉल,डेयरियां समेत कई तरह के अतिक्रमण हुए हैं, जो पानी के फैलाव को रोक रहे हैं। बैरागढ़ व टीटी नगर क्षेत्र में कई एफटीएल में लगी कई मुनारों के 10 से 15 फीट तक पानी आगे निकल चुका है। यह सब वैज्ञानिक सर्वे में रिकॉर्ड किया गया है।
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सिर्फ केरवा डैम सर्वे से छूटा, कई रसूखदारों के अतिक्रमण कैचमेंट में
केरवा डैम के नए गेटों का निर्माण होने से डैम से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। डैम से पानी अधिक मात्रा में न निकले। इसके लिए कोई अस्थाई व्यवस्था तक नहीं कराई है। इससे डैम का जल स्तर मेंटेन नहीं हो रहा है। एनजीटी की ओर से गठित टीम में शामिल एक्सपर्ट का मानना है कि जब तक जल स्तर मेंटेन नहीं होगा, तब तक वैज्ञानिक सर्वे,ग्राउंड ट्रूथिंग ठीक से नहीं होगी। इससे अतिक्रमणों के आसपास पानी के फैलाव का सही पता नहीं लग पाएगा। टीम के सदस्य व वरिष्ठ पर्यावरणविद् डॉ सुभाष सी पांडेय व राशिद नूर एनजीटी से डैम का सर्वे कराने की बात रखेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि केरवा डैम के कैचमेंट एरिया में बड़े स्तर पर अतिक्रमण हुए हैं। इसमें पूर्व विधायक,पूर्व मंत्री,सेवानिवृत आईएएस,आइपीएस सहित अन्य रसूखदार लोग हैं, इसलिए केरवा डैम का भी सर्वे होना जरूरी है।
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