मानसून की विदाई से पहले आखिरी आस! यशवंत सागर 3 फीट खाली, बिलावली आधा भी नहीं भरा

इंदौर। इस बार कमजोर मानसून ने इंदौर के जलस्रोतों की तस्वीर बदल दी है। शहर के प्रमुख तालाब अब तक अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच सके हैं। इंदौर की जलापूर्ति के लिहाज से अहम यशवंत सागर में फिलहाल 16 फीट पानी है, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 19 फीट है। यानी जलाशय अभी भी करीब 3 फीट खाली है। दूसरी ओर, 34 फीट क्षमता वाला बिलावली तालाब महज 12 फीट तक ही भर पाया है।
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हालांकि, पिछले दो-तीन दिनों में हुई बारिश ने सूखती उम्मीदों को कुछ सहारा जरूर दिया है। बारिश से सोयाबीन समेत अन्य फसलों को समय पर पानी मिल गया, जिससे फसलों को फिलहाल राहत मिली है। शहर में लगाए गए हजारों-लाखों पौधों को भी बारिश का पानी मिला। जमीन में नमी बढ़ने से भूजल स्तर और बोरिंगों को भी कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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इसके बावजूद इंदौर के तालाबों की स्थिति अभी संतोषजनक नहीं है। शहर में सामान्य मानसून के दौरान करीब 34 से 35 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक सिर्फ करीब 23 इंच पानी ही बरसा है। कम बारिश का सीधा असर नदी-नालों और जलाशयों पर दिखाई दे रहा है।हर साल अच्छे मानसून में यशवंत सागर लबालब भर जाता है और क्षमता से अधिक पानी होने पर इसके गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है। इस बार मानसून सीजन में ऐसा मौका ही नहीं आया। पूरे सीजन में एक बार भी गेट नहीं खोले जा सके, क्योंकि जलाशय अपनी 19 फीट की क्षमता तक पहुंच ही नहीं पाया।
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बिलावली की हालत भी कुछ ऐसी ही है। हालांकि यह तालाब सामान्य तौर पर भी पूरी क्षमता तक नहीं भरता, लेकिन मानसून में इसका जलस्तर 20 से 22 फीट तक पहुंच जाता है। इस बार बारिश कम होने से यह आंकड़ा अभी 12 फीट पर ही अटका हुआ है।अब मानसून की वापसी से पहले होने वाली बारिश पर शहर की नजरें टिकी हैं। अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों, भूजल और जलाशयों—तीनों को राहत मिल सकती है।




















