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PU Special :पानी की गुणवत्ता बिगड़ी तो तय होगी जिम्मेदारी, MP में जिला-ब्लॉक स्तर पर बनेंगी वॉश समितियां

मध्यप्रदेश में पेयजल व्यवस्था की निगरानी के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर वॉश समितियां बनेंगी। पानी की गुणवत्ता, सप्लाई और पाइप लाइन की मरम्मत की निगरानी होगी।
पानी की गुणवत्ता बिगड़ी तो तय होगी जिम्मेदारी, MP में जिला-ब्लॉक स्तर पर बनेंगी वॉश समितियां
MP में जिला-ब्लॉक स्तर पर बनेंगी वॉश समितियां

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में पेयजल व्यवस्था की निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी है। शहरों और गांवों में पानी की सप्लाई, गुणवत्ता, पाइप लाइन की मरम्मत और शुद्धीकरण जैसी व्यवस्थाओं पर नजर रखने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर वॉश (वाटर, सेनिटेशन एंड हाइजीन) समितियां गठित की जाएंगी। नई व्यवस्था में पानी से जुड़ी गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय करने के लिए जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक निगरानी तंत्र तैयार किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जल योजनाओं के संचालन और संधारण में पंचायतों के साथ ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के इंजीनियरों की भूमिका बढ़ेगी। वहीं शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी नगरीय निकायों की रहेगी।

जिला पंचायत CEO से लेकर इंजीनियरों तक होगी जिम्मेदारी

ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत और जनपद पंचायत स्तर पर वॉश समितियां गठित की जाएंगी। जिला स्तर की समिति की अध्यक्षता जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) करेंगे जबकि ब्लॉक स्तर पर जनपद पंचायत के CEO समिति के अध्यक्ष होंगे। इन समितियों में तकनीकी जिम्मेदारी RES के इंजीनियरों की रहेगी। समितियां यह सुनिश्चित करने की निगरानी करेंगी कि जल योजनाओं के जरिए लोगों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पानी मिल रहा है या नहीं। पानी की गुणवत्ता की जांच, पाइप लाइन में खराबी, मरम्मत, पंपिंग और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता जैसे मामलों पर भी नजर रखी जाएगी। बताया गया है कि नई व्यवस्था अगले दो महीने में शुरू होने की संभावना है।

पंचायतों की PHE पर निर्भरता होगी कम

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने RES के कामों में PHE के Schedule of Rates (SOR) को शामिल किया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप लाइन और जलापूर्ति से जुड़े कामों के लिए पंचायतों की PHE पर निर्भरता कम होगी। RES के इंजीनियर जल योजनाओं के निर्माण, मरम्मत और संचालन से जुड़े तकनीकी कामों को आगे बढ़ा सकेंगे। पाइप लाइन से संबंधित जरूरी मटेरियल को भी RES के SOR में शामिल किया गया है। इससे जल योजनाओं में खराबी आने पर मरम्मत और दूसरे तकनीकी कामों को स्थानीय स्तर पर तेजी से कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

आउटडोर जल सप्लाई में जल निगम की भूमिका

जल जीवन मिशन की योजनाओं के संचालन और संधारण की जिम्मेदारी पंचायतों तथा WASH समितियों को दिए जाने के साथ PHE की भूमिका में भी बदलाव की तैयारी है। नदी, तालाब और बांधों जैसे स्रोतों से पानी पंप कर मुख्य जलशोधन संयंत्रों तक पहुंचाने वाली आउटडोर जलापूर्ति व्यवस्था में मध्यप्रदेश जल निगम की भूमिका रहने की संभावना है। वहीं PHE के कई कर्मचारी पहले से ही नगरीय निकायों में प्रतिनियुक्ति पर शहरी पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में 1.11 करोड़ नल कनेक्शन का लक्ष्य

प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में करीब 40 लाख परिवार हैं। इनमें कई इलाकों में पाइप लाइन के जरिए पानी पहुंचाया जाता है जबकि कुछ स्थानों पर टैंकरों से भी जलापूर्ति की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत करीब 1.11 करोड़ घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से करीब 70 प्रतिशत घरों में कनेक्शन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में इन योजनाओं के संचालन और नियमित जलापूर्ति की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

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भागीरथपुरा जैसी घटनाओं के बाद गुणवत्ता पर फोकस

इंदौर के भागीरथपुरा में सामने आई पेयजल से जुड़ी घटना के बाद पानी की गुणवत्ता और उसकी नियमित जांच को लेकर सरकार के सामने चुनौती बढ़ी है। नई व्यवस्था में WASH समितियों के जरिए पानी की गुणवत्ता की जांच से लेकर पाइप लाइन की मरम्मत और पंपिंग व्यवस्था तक की निगरानी की जाएगी। जरूरत के अनुसार RO पानी की व्यवस्था पर भी नजर रखी जाएगी। इसका उद्देश्य जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतों का स्थानीय स्तर पर समाधान करना और किसी तरह की गड़बड़ी होने पर संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी तय करना है।

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जिला से ब्लॉक स्तर तक बनेगा निगरानी तंत्र

वॉश समितियों में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ग्रामीण विकास विभाग का तकनीकी अमला भी शामिल रहेगा। RES के इंजीनियर पाइप लाइन की मरम्मत, पानी की सप्लाई और पंचायतों से जुड़ी जल संबंधी समस्याओं के निराकरण में भूमिका निभाएंगे।

मप्र जल विकास निगम मर्यादित के एमडी केवीएस कोलसानी चौधरी के अनुसार, जिला और ब्लॉक स्तर पर वॉश समितियां गठित की जा रही हैं। इनमें अधिकारियों के साथ ग्रामीण विकास का तकनीकी अमला रहेगा। पाइप लाइन से जुड़े मटेरियल को RES के SOR में शामिल किया गया है जिससे इन कार्यों के लिए PHE पर निर्भरता कम होगी।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण पेयजल योजनाओं की निगरानी अधिक स्थानीय स्तर पर होने और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की व्यवस्था बनने की उम्मीद है।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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