Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

दिमाग पढ़ने वाला AI आ गया! इजरायली वैज्ञानिकों ने बनाया Brain-IT, अब आपकी कल्पना को हूबहू तस्वीर में बदलेगी टेक्नोलॉजी

fMRI डेटा से मन की तस्वीरों को रिक्रिएट करने वाला दुनिया का सबसे एडवांस्ड AI, स्टॉप साइन से लेकर पिज्जा की स्लाइस तक को दिखाया सटीक, 2017 की धुंधली तकनीक से बड़ी छलांग।
दिमाग पढ़ने वाला AI आ गया! इजरायली वैज्ञानिकों ने बनाया Brain-IT, अब आपकी कल्पना को हूबहू तस्वीर में बदलेगी टेक्नोलॉजी
इजरायली वैज्ञानिकों ने बनाया दिमाग पढ़ने वाला AI

तेल अवीव। इजरायली वैज्ञानिकों की एक टीम ने Brain-IT नाम से एक एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम डेवलप किया है, जो किसी व्यक्ति के दिमाग में चल रही कल्पनाओं को समझ सकता है। इसके बाद यह फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (fMRI) डेटा का इस्तेमाल करके उन मेंटल इमेजेज को बेहद सटीकता के साथ रीक्रिएट कर सकता है। इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन लर्निंग रिप्रेजेंटेशन्स (ICLR) में पेश की गई एक रिसर्च में इस सिस्टम को डिटेल में बताया गया है। यह सिस्टम ऐसे विजुअल रिजल्ट देता है जो स्ट्रक्चरल लेआउट और सिमेंटिक मीनिंग दोनों के लिहाज से प्रतिभागियों द्वारा देखी गई असली तस्वीरों को बारीकी से दर्शाते हैं। टीम द्वारा दिखाए गए विजुअल रिकंस्ट्रक्शन में सिंपल स्ट्रीट स्टॉप साइन से लेकर टमाटर और जैतून वाले पिज्जा जैसे कॉम्प्लेक्स सीन शामिल हैं। यह दर्शक द्वारा कल्पना की गई स्लाइस की सटीक संख्या को दिखाते हैं और लगभग इंटरनल कॉग्निटिव थॉट की एक डिजिटल कॉपी की तरह काम करते हैं।

धुंधले मॉडल्स से बड़ी छलांग लगाई

हालांकि AI ब्रेन-डिकोडिंग प्रोजेक्ट्स पहले भी सामने आ चुके हैं लेकिन Brain-IT स्पीड और एक्यूरेसी के मामले में एक बहुत हाई स्टैंडर्ड सेट करता है। 2017 में (पर्ड्यू यूनिवर्सिटी),  इंडियाना में डेवलप किए गए शुरुआती मॉडल एक प्रतिभागी द्वारा कल्पना की गई इमेज की जनरल कैटेगरी का अंदाजा लगा सकते थे। लेकिन इसके विजुअल रिकंस्ट्रक्शन साफ तौर पर धुंधले और अस्पष्ट थे।

जापान में भी की गई थी कोशिश

2022 में जापान के रिसर्चर्स ने ज्यादा सटीक अनुमान जनरेट करने के लिए डिफ्यूजन-स्टाइल आर्किटेक्चर को लागू किया था। हालांकि यह फ्रेमवर्क बीच के टेक्स्ट-टू-इमेज ट्रांसलेशन पर काफी हद तक निर्भर था। Brain-IT को वीजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में माइकल ईरानी के निर्देशन में डेवलप किया गया है। यह टारगेट इमेजेज को माइक्रो-लेवल एक्यूरेसी के साथ रिफ्लेक्ट करता है, एनालिसिस प्रोसेस को सिर्फ एक घंटे में पूरा कर लेता है। इससे पिछले सिस्टम्स में लगने वाले कई घंटों के प्रोसेसिंग टाइम में बड़ी कटौती होती है।

डुअल-ट्रांसलेशन 'एनकोडर' से डेटा की समस्या को सॉल्व किया

न्यूरोइमेजिंग रिसर्च में एक बड़ी चुनौती ह्यूमन डेटा कलेक्ट करने की फिजिकल और फाइनेंशियल लिमिट है। आर्किटेक्चर को ट्रेन करने के लिए रिसर्चर्स ने fMRI  मशीनों के अंदर 70,000 से ज्यादा तस्वीरों को देखने वाले आठ सब्जेक्ट्स के रिकॉर्ड जुटाए। क्योंकि आठ लोग अत्याधुनिक AI को ट्रेन करने के लिए एक छोटा ग्रुप हैं, इसलिए टीम ने बाय-डायरेक्शनल ट्रांसलेशन को इनेबल करने वाले एक एनकोडर शॉर्टकट बनाकर 24 घंटे मशीन सेशन की जरूरत को खत्म कर दिया।

एल्गोरिदम फ्रेमवर्क ने अपना ट्रेनिंग डेटा खुद तैयार किया

ईरानी ने कहा कि हमने महसूस किया कि एक रैंडम इमेज को बार-बार ट्रांसलेट करने से (डुअल कोडिंग) मॉडल इफेक्टिव रूप से एक विशाल डेटासेट बना लेते हैं। इस तरह ट्रेनिंग के दौरान मॉडल ऐसे स्कैन जनरेट करना सीख जाते हैं जो इमेजेज को इफेक्टिवली एनकोड करते हैं। भले ही वे fMRI स्कैन असल में कभी किए ही न गए हों। इस डुअल डिकोडिंग वर्किंग के जरिए, सिस्टम ने दिमाग के 128 फंक्शनल एरिया की पहचान की। इनमें पहले से जाने-पहचाने क्षेत्रों के साथ-साथ नए खोजे गए एरिया भी शामिल हैं। यह एरिया अलग-अलग लोगों में एक जैसे विजुअल प्रोसेसिंग फंक्शन करते हैं। कुछ ग्रुप फूड से जुड़ी इमेजेज पर अनुमानित रिएक्शन देते हैं, जबकि दूसरे स्पोर्ट्स देखने पर एक्टिव होते हैं। इसके साथ ही खास न्यूरल पाथवे इनडोर और आउटडोर एनवायरनमेंट के मुताबिक काम करते हैं। रिसर्चर्स को इस सफलता के प्रैक्टिकल यूज भी दिख रहे हैं। खासतौर पर पैरालाइज्ड पेशेंट्स के लिए एक असिस्टिव कम्युनिकेशन सिस्टम के तौर पर, जिन्होंने फिजिकली बोलने या चलने-फिरने की क्षमता खो दी है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

Latest Posts