बर्लिन। पूर्वी जर्मनी में दशकों तक लिग्नाइट खनन से बने विशाल गड्ढे अब झीलों, वेटलैंड्स और रीस्टोर की गई जमीन के एक बड़े नेटवर्क में बदले जा रहे हैं। बर्लिन और ड्रेसडेन के बीच ब्रैंडेनबर्ग और सैक्सोनी में फैला लुसातिया लेक डिस्ट्रिक्ट, पुरानी ओपन-कास्ट खदानों में पानी भरकर और उनके आसपास के एरिया को नया रूप देकर बनाया जा रहा है। यह टूरिज्म डेस्टिनेशन अब लगभग 14,000 हेक्टेयर वॉटर एरिया में फैली 23 पोस्ट-माइनिंग झीलों से मिलकर बना है। यह बदलाव 1967 में सेन्फ्टेनबर्ग झील से शुरू हुआ और दशकों तक चलता रहा, जिससे जर्मनी के सबसे बड़े कोयला उत्पादक क्षेत्रों में से एक एक नए जल परिदृश्य में बदल गया। यह प्रोजेक्ट एनवायरनमेंटल रेस्टोरेशन को टूरिज्म, रिक्रिएशन और खनन से बुरी तरह प्रभावित जमीन के लॉन्ग-टर्म रिहैबिलिटेशन के साथ जोड़ता है।
कई माइन पिट्स में भरा पानी
बता दें कि लुसातिया जर्मनी के प्रमुख लिग्नाइट माइनिंग क्षेत्रों में से एक था। ओपन-कास्ट माइनिंग से कोयला निकालने के बाद विशाल खुदे हुए गड्ढे बच गए थे। उनके ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में पहला बड़ा कदम 1967 में उठाया गया था। तब पूर्व नीम्त्श ओपन-कास्ट माइन को भरकर सेन्फ्टेनबर्ग झील का निर्माण शुरू हुआ। वॉटर-फिलिंग का काम 1972 में पूरा हुआ और अगले साल झील को पब्लिक के लिए खोल दिया गया। तब से कई अन्य माइन पिट्स को भी पानी से भर दिया गया है। इससे क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा इसे यूरोप का सबसे बड़ा आर्टिफिशियल वॉटर लैंडस्केप बताया गया है। इस प्रोसेस में ग्राउंडवाटर और नदियों व अन्य सोर्सेज से लाया गया पानी दोनों का इस्तेमाल किया गया है।
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रीस्टोर नहीं कर सकते थे इसलिए भरा पानी
माइनिंग-रिहैबिलिटेशन कंपनी LMBV के अनुसार, कुछ माइन पिट्स को तेजी से पानी से भरना जरूरी था क्योंकि माइनिंग के दौरान निकाले गए मटेरियल ने बड़े-बड़े गड्ढे बना दिए थे। यह इतने बड़े थे कि इन्हें आसानी से ओरिजिनल फॉर्म में रिस्टोर नहीं किया जा सकता था।
23 झीलों का जाल बन गया
लुसाटियन लेकलैंड कोई एक विशाल झील नहीं है, बल्कि पूर्व खनन स्थलों का एक समूह है। एलएमबीवी ने इस पर्यटन स्थल के भीतर 23 खनन-पश्चात झीलों (post-mining lakes) की पहचान की है, जिनका संयुक्त जल क्षेत्र लगभग 14,000 हेक्टेयर है। इनमें से पांच सबसे प्रमुख हैं सेन्फ्टेनबर्गर सी, गेयर्सवाल्डर सी, पार्टविट्जर सी, सेडलिट्जर सी और ग्रॉसरैशेनर सी। इनका रूपांतरण अलग-अलग समयावधि में हुआ है, जिसमें सेन्फ्टेनबर्गर सी समूह में सबसे पुराना है। वहीं, सेडलिट्जर सागर अपने लक्ष्य स्तर तक पहुंचने वाला सबसे नया है। 2025 में सेडलिट्जर सी अपने निर्धारित जल स्तर तक पहुंच गया। यह झील जाल के निर्माण में एक महत्वपूर्ण चरण है।
जलमार्ग का निर्माण करती हैं यह झीलें
यह परिवर्तन केवल अलग-अलग झीलों के निर्माण तक ही सीमित नहीं है। कई पूर्व खनन गड्ढों को जोड़ने के लिए नहरों का निर्माण किया जा रहा है। इससे नौकाएं उन झीलों के बीच आवागमन कर सकेंगी जो कभी खनन अवसंरचना और अपशिष्ट ढेरों से अलग थीं। करीब 15 महीने पहले पांच प्रमुख झीलों को आधिकारिक तौर पर वॉटरवेज के माध्यम से जोड़ा गया। इससे लगभग 5,100 हेक्टेयर का एक सतत जल क्षेत्र बन गया। इस नेटवर्क में सेन्फ्टेनबर्गर सी, गेयर्सवाल्डर सी, पार्टविट्जर सी, सेडलिट्जर सी और ग्रॉसरैशेनर सी शामिल हैं।
प्रकृति का फिर से विकास हो रहा
झीलों का निर्माण इस क्षेत्र के पर्यावरणीय परिवर्तन का मात्र एक हिस्सा है। खनन पुनर्वास में पूर्व खदानों की ढलानों को स्थिर करना, भूमि को पुनर्स्थापित करना और उन क्षेत्रों में नई वनस्पतियों को पनपने देना भी शामिल है जो पहले बुरी तरह प्रभावित थे। इस बदलाव से पूर्व अपशिष्ट ढेरों पर नए जंगल उग रहे हैं। वहीं नवनिर्मित जल निकायों के आसपास घास के मैदान, आर्द्रभूमि और अन्य पर्यावास उभर रहे हैं।