नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने अमेरिका-इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि, ईरान के खिलाफ चल रहे अभियान के लक्ष्य पहले से तय हैं और उनमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
राजदूत ने कहा कि, इस ऑपरेशन का उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें नो शिफ्टिंग ऑफ द गोलपोस्ट्स यानी लक्ष्य बदलने की कोई गुंजाइश नहीं है। उनका कहना है कि, सैन्य कार्रवाई का मकसद केवल इजरायल की सुरक्षा नहीं बल्कि पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक व्यापार की स्थिरता सुनिश्चित करना है। रूवेन अजार के अनुसार, अगर अभी कार्रवाई नहीं की जाती तो भविष्य में ईरान की सैन्य क्षमता और परमाणु कार्यक्रम पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बन सकते थे।
इजरायली राजदूत ने बताया कि इस अभियान के तीन मुख्य उद्देश्य हैं और पूरी कार्रवाई उसी दिशा में चल रही है।
1. परमाणु खतरे को खत्म करना
पहला लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निष्क्रिय करना है। इजरायल का कहना है कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है तो वह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
2. बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को कमजोर करना
दूसरा उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म करना है, जिससे वह इजरायल और उसके सहयोगी देशों पर हमले करने की स्थिति में न रहे।
3. दमनकारी ताकतों की शक्ति कम करना
तीसरा लक्ष्य ईरान की सैन्य और राजनीतिक ताकत को इतना कमजोर करना है कि वहां की जनता को भविष्य के लिए बेहतर विकल्प मिल सके।
राजदूत अजार ने कहा कि सैन्य अभियान पूरी तरह इन तीनों लक्ष्यों के अनुरूप चल रहा है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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हाल ही में ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए अजार ने कहा कि यह अप्रत्याशित नहीं था। उनका कहना है कि इजरायल को पहले से अंदाजा था कि ईरान के पास जवाबी हमला करने की क्षमता है। हालांकि, जून में की गई कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। राजदूत ने कहा कि, इस बार इजरायल को होने वाला नुकसान पहले के मुकाबले काफी कम रहा है।
इजरायली राजदूत के अनुसार, मौजूदा समय में ईरान रोजाना लगभग 10 मिसाइलें दाग रहा है। इनमें कुछ क्लस्टर बम वाली मिसाइलें भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि, इजरायल में लगातार सायरन बज रहे हैं क्योंकि इन मिसाइलों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में काउंटर-मिसाइल लॉन्च करनी पड़ रही हैं। अब तक इन हमलों में 13 इजरायली नागरिकों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं।
रूवेन अजार ने आरोप लगाया कि ईरान ने क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाकर तनाव को और बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि, ईरान द्वारा 12 देशों पर हमले किए जाना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना कदम है और इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि इस संघर्ष में ईरान को मुख्य आक्रामक पक्ष के रूप में देखा जाए।
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हाल ही में ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी थी। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में से एक है। इसके जरिए खाड़ी देशों से तेल और गैस अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचती है।
हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बाद में स्पष्ट किया कि यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, बल्कि केवल दुश्मनों और उनके सहयोगियों के जहाजों के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। इजरायली राजदूत ने कहा कि, आर्थिक असर जरूर हो सकता है, लेकिन यह उतना बड़ा नहीं होगा जितना अनुमान लगाया जा रहा है।
तेल और गैस संकट पर पूछे गए सवाल के जवाब में रूवेन अजार ने कहा कि वर्तमान समस्या अपेक्षाकृत छोटी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर दुनिया को एक बड़े संकट से बचाया है। अजार के मुताबिक, यदि ईरान को नहीं रोका जाता तो वह पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर सकता था।
इजरायली राजदूत ने यह भी दावा किया कि ईरान 2027 तक इजरायल पर बड़े हमले की तैयारी कर रहा था। उनका कहना है कि, ईरान खाड़ी और अरब देशों के मौजूदा ढांचे को कमजोर कर क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता था। अगर ऐसा होता तो खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों और भारत के आर्थिक हितों पर भी असर पड़ सकता था।
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रूवेन अजार ने स्पष्ट किया कि न तो इजरायल और न ही अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य केवल ईरान को अपना रवैया बदलने के लिए मजबूर करना है। इजरायल का लक्ष्य किसी लंबी जंग में फंसना नहीं बल्कि ईरान की आक्रामक क्षमता को कमजोर करना है।
राजदूत ने कहा कि सैन्य कार्रवाई के बाद कूटनीतिक समाधान की संभावना भी बनी रहनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अमेरिका और क्षेत्र के कई देशों के साथ लगातार बातचीत चल रही है। यदि ईरान अपना रुख बदलता है और इजरायल के अस्तित्व को स्वीकार करता है तो भविष्य में स्थिरता की संभावना बढ़ सकती है।
रूवेन अजार ने इस बात को खारिज किया कि इजरायल और अमेरिका के बीच इस अभियान को लेकर कोई मतभेद है। उन्होंने कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। दोनों देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान या तो अंतरराष्ट्रीय शर्तों को स्वीकार करे या उसकी सैन्य क्षमता इतनी कमजोर हो जाए कि वह किसी को नुकसान न पहुंचा सके।
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हाल ही में सोशल मीडिया पर यह अफवाह तेजी से फैल रही थी कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत हो गई है और उनकी जगह AI से बने वीडियो जारी किए जा रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रूवेन अजार ने कहा कि प्रधानमंत्री पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही यह खबरें पूरी तरह गलत हैं और नेतन्याहू का कैफे वाला वीडियो भी असली है, किसी तरह का AI या डीपफेक नहीं है।
राजदूत अजार ने कहा कि इजरायल और ईरान के बीच दुश्मनी का इतिहास इस्लामिक क्रांति के बाद शुरू हुआ। उससे पहले दोनों देशों के बीच काफी अच्छे संबंध थे। लेकिन क्रांति के बाद ईरान ने इजरायल को अपना दुश्मन घोषित कर दिया और तब से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।
इजरायली राजदूत के अनुसार, अमेरिका और इजरायल को उम्मीद है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा। हालांकि यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान अपनी नीतियों में बदलाव करता है या नहीं। यदि तेहरान अपना रुख बदलने को तैयार नहीं होता तो तनाव और बढ़ सकता है।