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Rambha Teej 2026 :सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं के लिए क्यों खास है यह व्रत? जानें पूजा विधि और महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ग की अप्सरा रंभा ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके सौभाग्य और सुखी जीवन का वरदान प्राप्त किया था। तभी से इस व्रत को रंभा तीज के नाम से जाना जाता है।  
सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं के लिए क्यों खास है यह व्रत? जानें पूजा विधि और महत्व
Rambha Teej 2026

हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का एक विशेष महत्व है। मान्यता है कि उनकी आराधना करने से दांपत्य जीवन में खुशियां आती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसी उद्देश्य से ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रंभा तीज का व्रत रखा जाता है। आइए जानते हैं आखिर क्यों इसे रंभा नाम दिया गया, इसकी पूजा विधि और धार्मिक महत्व क्या है...

मान्यता है कि शिव और पार्वती की पूजा को वैवाहिक सुख, आदर्श संबंधों और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन देवी स्वरूप स्त्रियां अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखती हैं। इसे रंभा तीज व्रत कहा जाता है। साल 2026 में रंभा तीज का व्रत 17 जून, बुधवार को रखा जाएगा। यह व्रत खासतौर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं। वहीं अविवाहित लड़कियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं।

क्यों कहा जाता है रंभा तीज?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ग की अप्सरा रंभा ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके सौभाग्य और सुखी जीवन का वरदान प्राप्त किया था। तभी से इस व्रत को रंभा तीज के नाम से जाना जाता है।  

रंभा तीज 2026 तिथि

तृतीया तिथि की शुरुआत : 16 जून रात 12:53 बजे

तृतीया तिथि समाप्त : 17 जून रात 9:49 बजे

उदया तिथि के अनुसार व्रत : 17 जून 2026, बुधवार

Religious

रंभा तीज पूजा विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • व्रत और पूजा का संकल्प लें।
  • सबसे पहले भगवान गणेश जी की पूजा करें।
  • शिवलिंग का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • भगवान शिव को बेलपत्र, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  • माता पार्वती को चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं।
  • धूप और दीप जलाकर पूजा करें।
  • 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ गौर्यै नमः' मंत्र का जाप करें।
  • रंभा तीज व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
  • अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
  • प्रसाद वितरित करें और अपनी श्रद्धा अनुसार दान-पुण्य करें।
  • दिनभर व्रत रखें। यदि निर्जला व्रत संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं।

रंभा तीज पर व्रत रखने के महत्व

वैवाहिक जीवन में प्रेम और आपसी समझ बढ़ती है। पति-पत्नी के रिश्ते में मजबूती आती है। अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है। परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। अविवाहित कन्याओं को योग्य और मनचाहा जीवनसाथी मिलने की मान्यता है। भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।

जीवन में आती है सकारात्मकता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया रंभा तीज व्रत जीवन में सुख, सौभाग्य और खुशहाली लेकर आता है। मान्यता है कि जो अविवाहित कन्याएं योग्य और मनचाहें जीवन साथी की कामना के साथ इस व्रत का पालन करती हैं, उनके जीवन में तमाम मनोकामनाओं की पूर्ति शीघ्र होती है। ग्रंथों में इस व्रत को शुभ फल देने वाला और जीवन में मंगलकारी परिर्वतन लाने वाला बताया गया है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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