वॉशिंगटन डीसी। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरे के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO सहयोगियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि, अगर सदस्य देश होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में अमेरिका का साथ नहीं देते हैं तो इसका असर पूरे NATO गठबंधन के भविष्य पर पड़ सकता है। ट्रंप का कहना है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से फायदा उठाने वाले देशों को इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी साझा करनी चाहिए।
हालिया इंटरव्यू में उन्होंने यूरोप और अन्य सहयोगी देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि, दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा यह जलमार्ग केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं हो सकता। अगर सहयोगी देश सक्रिय भूमिका नहीं निभाते हैं तो इससे NATO की विश्वसनीयता और भविष्य दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि, अगर NATO सदस्य देश होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अमेरिका के साथ खड़े नहीं होते, तो गठबंधन का भविष्य बहुत बुरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि, यह समुद्री मार्ग पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल और गैस आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में इसकी सुरक्षा केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं हो सकती।
ट्रंप ने कहा कि, जिन देशों की अर्थव्यवस्था इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर है, उन्हें इसकी सुरक्षा में भी योगदान देना चाहिए। उनका कहना था कि सुरक्षा की जिम्मेदारी साझा करना ही सही अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की पहचान है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह समुद्री गलियारा ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के बीच स्थित है और लगभग 54 किलोमीटर चौड़ा है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। मध्य पूर्व के तेल उत्पादक देशों से निकलने वाला कच्चा तेल और गैस टैंकर इसी मार्ग से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक पहुंचते हैं।
अगर यह मार्ग बाधित हो जाता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत असर पड़ सकता है और कई देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।
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हालिया घटनाओं के बाद इस क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बाधित कर दी है। इस वजह से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। दुनिया के कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
इसी स्थिति को देखते हुए ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग तेज कर दी है और सहयोगी देशों से कहा है कि वे इस मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए आगे आएं।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि NATO कई बार एकतरफा व्यवस्था बनकर रह गया है। उनका कहना है कि, अमेरिका अक्सर अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए आगे आता है और बड़े पैमाने पर संसाधन खर्च करता है, लेकिन जब अमेरिका को सहयोग की जरूरत होती है तो कई देश पीछे हट जाते हैं।
उन्होंने कहा कि, अब समय आ गया है कि सहयोगी देश भी सुरक्षा साझेदारी में उतनी ही मजबूती से भागीदारी निभाएं जितनी अमेरिका निभाता है।
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ट्रंप ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए यूक्रेन युद्ध का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि रूस के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को व्यापक सैन्य और आर्थिक सहायता दी, जबकि यह सीधे तौर पर अमेरिकी हितों का मुद्दा नहीं था। ट्रंप का कहना है कि, अमेरिका ने अपने सहयोगियों और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा के लिए यह कदम उठाया। अब जब अमेरिका अपने सहयोगियों से मदद की उम्मीद कर रहा है तो यह देखना होगा कि वे किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।
जब ट्रंप से पूछा गया कि वह सहयोगी देशों से किस प्रकार की मदद चाहते हैं, तो उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कई तरह की सुरक्षा चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सहयोगी देश निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं-
ट्रंप का कहना है कि, इन कदमों से क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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ट्रंप ने इस मुद्दे पर चीन पर भी दबाव बनाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि, चीन की तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए चीन को भी इसकी सुरक्षा में योगदान देना चाहिए। ट्रंप ने संकेत दिया कि, अगर इस मुद्दे पर चीन का रुख स्पष्ट नहीं होता है तो वह चीन की अपनी प्रस्तावित यात्रा को भी टाल सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले कई देशों से इस क्षेत्र में सहयोग की अपील कर चुके हैं। उन्होंने जिन देशों से सहयोग मांगा है उनमें चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। ट्रंप का कहना है कि यदि ये देश अपने जहाज या सुरक्षा संसाधन भेजते हैं तो तेल टैंकरों की आवाजाही सुरक्षित हो सकती है।
इस दौरान ट्रंप ने ब्रिटेन के रुख पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाइयों के दौरान ब्रिटेन ने तुरंत समर्थन नहीं दिया। ट्रंप के अनुसार जब उन्होंने ब्रिटेन से सहयोग मांगा तो वह तुरंत तैयार नहीं हुए। बाद में जब स्थिति लगभग नियंत्रण में आ गई, तब ब्रिटेन ने दो जहाज भेजने का प्रस्ताव दिया। ट्रंप ने कहा कि सहयोग उस समय जरूरी था जब अभियान चल रहा था, बाद में नहीं।
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डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को हर हाल में सुरक्षित और खुला रखा जाएगा। हालांकि अभी तक इस दिशा में कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन सामने नहीं आया है। इसी वजह से ट्रंप अपने सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ा रहे हैं ताकि वे इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभाएं।
NATO मूल रूप से उत्तरी अमेरिका और यूरोप का एक रक्षा गठबंधन है जिसका उद्देश्य सदस्य देशों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों में NATO की भूमिका और जिम्मेदारियां भी बदल रही हैं। होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा इस बात की परीक्षा बन सकता है कि NATO देश वैश्विक सुरक्षा मामलों में कितनी एकजुटता दिखाते हैं।