Manisha Dhanwani
8 Feb 2026
हेल्थ डेस्क। हर महीने कैलेंडर देखकर पीरियड डेट का अंदाजा लगाना और फिर अचानक पीरियड्स का जल्दी या बहुत देर से आ जाना... ये अनुभव कई महिलाओं के लिए आम है। कुछ दिनों का आगे-पीछे होना भले ही नॉर्मल माना जाता हो, लेकिन अगर ये पैटर्न बार-बार दोहराया जाए, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं। अनियमित पीरियड्स अक्सर शरीर के अंदर चल रहे किसी बदलाव या गड़बड़ी का संकेत होते हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नॉर्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल आमतौर पर 21 से 35 दिनों के बीच होती है। कई महिलाओं में ये साइकिल 28 दिन की होती है, जबकि कुछ में 24 या 30-32 दिन की भी हो सकती है। जब पीरियड्स की डेट कभी बहुत जल्दी और कभी बहुत देर से आए या साइकिल की लंबाई बार-बार बदले, तो इसे इर्रेग्युलर मेंस्ट्रुएशन कहा जाता है।
डॉक्टर्स इसे तब चिंता का विषय मानते हैं जब-
1. हार्मोनल असंतुलन
पीरियड्स की टाइमिंग एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स पर निर्भर करती है। इनका बैलेंस बिगड़ने पर ओव्यूलेशन प्रभावित होता है, जिससे पीरियड्स कभी जल्दी तो कभी देर से आते हैं। पीसीओएस, थायरॉइड डिसऑर्डर और प्रोलैक्टिन हार्मोन की गड़बड़ी पीरियड्स साइकिल को पूरी तरह बिगाड़ सकती है।
2. स्ट्रेस और बदलती लाइफस्टाइल
लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, जो पीरियड कंट्रोल करने वाले ब्रेन सिस्टम को प्रभावित करता है। इसके अलावा अचानक वजन बढ़ना या घटाना, क्रैश डाइटिंग और बहुत ज्यादा एक्सरसाइज भी साइकिल को अनियमित बना सकती है।
3. नींद की कमी और नाइट शिफ्ट
कम नींद, देर रात तक जागना, नाइट शिफ्ट में काम करना या बार-बार टाइम जोन बदलना शरीर की इंटरनल बॉडी क्लॉक को बिगाड़ देता है। इसका असर सीधे रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स और पीरियड डेट पर पड़ता है।
4. उम्र और लाइफ स्टेज का असर
पीरियड शुरू होने के शुरुआती सालों में साइकिल अनियमित होना आम है। इसी तरह मेनोपॉज से पहले के दौर यानी पेरिमेनोपॉज में भी हार्मोनल बदलाव के कारण पीरियड्स कभी जल्दी, कभी देर से आ सकते हैं।
5. प्रेग्नेंसी और बर्थ कंट्रोल
प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पीरियड्स रुकना सामान्य है। वहीं हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स, इंजेक्शन या आईयूडी शुरू या बंद करने पर कुछ महीनों तक पीरियड्स की डेट और फ्लो में बदलाव हो सकता है।
जरूरी सलाह : अनियमित पीरियड्स को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही इलाज से बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
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