तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव नजदीक हैं और इसी बीच ईरान की सबसे ताकतवर मिलिट्री फोर्स IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने सीधे अमेरिकी वोटरों को चिट्ठी लिखी है। IRGC ने अमेरिकी जनता से अपील की है कि वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को रिजेक्ट करें और "भ्रष्ट नेताओं से सत्ता वापस लें।"
25 पन्नों के खुले पत्र में कहा वॉशिंगटन फेल हुआ
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव शुरू होने के 7 महीने बाद जारी किए गए इस लंबे पत्र में कई बड़ी बातें कही गई हैं। इसमें कहा गया है कि वॉशिंगटन फेल हो गया है। IRGC का दावा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की स्ट्रैटेजी अपने मकसद में नाकाम रही है। पत्र में कहा गया है कि आम ईरानी और आम अमेरिकी दोनों के हित एक जैसे हैं और दोनों ही महंगी जंग लड़ने वाले नेताओं की वजह से परेशान हैं। पत्र में अमेरिकी नागरिकों से अपील की गई है कि वे इजरायल को मिलने वाले अमेरिकी सपोर्ट और विदेशी मिलिट्री इंटरवेंशन का विरोध करें।
लिखा शांति मुमकिन है
अगर वॉशिंगटन अपनी नीति बदलता है तो अमेरिका और ईरान के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व संभव है। तेहरान में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए IRGC के प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि इस टकराव को खत्म करने का एक ही तरीका है - अमेरिका अपनी हार माने और पीछे हट जाए। उन्होंने कहा कि कई अमेरिकी नागरिकों को पता ही नहीं है कि ट्रंप प्रशासन की इन नीतियों से कितना नुकसान हुआ है, इसलिए उन्हें अपने नेतृत्व पर दोबारा सोचना चाहिए और सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।
चुनाव से पहले है टाइमिंग
इस चिट्ठी की टाइमिंग पर सबकी नजर है। IRGC ने ये लेटर अमेरिका के मिड-टर्म चुनाव से ठीक 5 हफ्ते पहले निकाला है। उनके मुताबिक ये वो वक्त होता है जब अमेरिकी सियासत सबसे ज्यादा हिली हुई होती है। जनरल हुसैन मोहेब्बी ने खुद कहा - देखिए, हमें नहीं लगता कि एक चिट्ठी से व्हाइट हाउस अपनी पूरी पॉलिसी बदल देगा, पर इतना जरूर है कि अमेरिकी वोटर हमारी बात सुनें, यही काफी है।
ट्रंप के दावों पर सीधा वार
पूरी चिट्ठी में एक ही बात घुमा-फिरा कर कही गई है कि ट्रंप ने ईरान के नाम पर जंग का जो बहाना बनाया, वो गलत था। ट्रंप लगातार कहते रहे कि ईरान का परमाणु प्रोग्राम दुनिया के लिए खतरा है, इसलिए मिलिट्री एक्शन जरूरी है। ईरान शुरू से यही कहता आया है कि उसका प्रोग्राम सिविलियन है, वो बम नहीं बना रहा। मोहेब्बी ने इसी बात को दोहराया, बोले - अमेरिका को अच्छे से पता है कि ईरान को एटम बम नहीं चाहिए। वॉशिंगटन बस परमाणु प्रोग्राम के नाम पर अपने दूसरे बड़े मकसद साध रहा है, तेल और इलाके में दबदबा।
हम जीत गए हैं जंग
IRGC का दावापत्र में IRGC ने खुद को विजेता बताया है। उनका कहना है कि अमेरिका और इजरायल जो सोच कर आए थे, कुछ भी हासिल नहीं कर पाए। पहले प्लान था तेहरान में सरकार गिराना और ईरान को तोड़ देना। जब वो नहीं हुआ तो गोलपोस्ट बदल दिया। अब कहने लगे बिना शर्त सरेंडर करवाएंगे, मिसाइल प्रोग्राम खत्म करवाएंगे, होर्मुज पर कब्जा करेंगे। IRGC मानता है कि हजारों हमलों से ईरान को नुकसान तो हुआ, पर अमेरिका अपने किसी भी बड़े लक्ष्य तक नहीं पहुंचा। बल्कि ईरानी हमलों में खाड़ी में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा है, यही वॉशिंगटन की हार है।
होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल को लेकर भी जिक्र किया
चिट्ठी में होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र कई बार आया है। अमेरिका कह रहा था कि ईरान का इस रूट पर कंट्रोल खत्म हो गया है, IRGC ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।मोहेब्बी का तर्क था कि दो-चार जहाजों के निकल जाने से ये नहीं मान लेना चाहिए कि पूरा रास्ता खुला है। हालांकि ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और कहती है, अभी होर्मुज से तेल का एक्सपोर्ट जंग के शुरुआती हफ्तों के मुकाबले काफी बेहतर हो गया है।